क्या म्यांमार-थाईलैंड सीमा पर फंसे 16 भारतीयों को बचाने के लिए ओवैसी ने विदेश मंत्री से अपील की?
सारांश
Key Takeaways
- म्यांमार-थाईलैंड सीमा पर 16 भारतीय नागरिक फंसे हैं।
- असदुद्दीन ओवैसी ने विदेश मंत्री से हस्तक्षेप की अपील की है।
- सभी नागरिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
- सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
- पिछले वर्ष भी कई भारतीयों को वापस लाया गया था।
हैदराबाद, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने गुरुवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर से आग्रह किया कि वे म्यांमार-थाईलैंड सीमा पर फंसे 16 भारतीय नागरिकों को बचाने के लिए तुरंत कदम उठाएं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर ओवैसी ने बताया कि उन्हें वहां बंधक बनाए गए एक व्यक्ति से बेहद चिंताजनक संदेश प्राप्त हुआ है।
उन्होंने लिखा, “कम से कम 16 भारतीय नागरिकों को थाईलैंड में नौकरी का लालच देकर म्यांमार-थाईलैंड सीमा पर ले जाया गया और वहां उन्हें बंधक बना लिया गया। इनमें हैदराबाद के तीन लोग भी शामिल हैं, जिनसे रोज 18 से 20 घंटे काम कराया जा रहा है, उन्हें शारीरिक सजा दी जाती है और उनके पासपोर्ट, मोबाइल और चिकित्सा सुविधाएं भी छीन ली गई हैं।”
ओवैसी ने विदेश मंत्री से अनुरोध किया कि सभी फंसे भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए त्वरित कार्रवाई की जाए।
उन्होंने बताया कि यह जानकारी हैदराबाद के उस्मान नगर के निवासी मीर सज्जाद अली से मिली है। मीर सज्जाद अली इस समय म्यांमार-थाईलैंड सीमा पर कैद हैं। उनके साथ दो अन्य लोग भी हैं, जो मौलाली और बंजारा हिल्स से हैं।
पिछले वर्ष भारत ने थाईलैंड से 1,500 से अधिक भारतीय नागरिकों को विशेष उड़ानों के माध्यम से वापस लाया था। ये सभी संगठित साइबर फ्रॉड गिरोहों के शिकार थे, जिन्हें अच्छी नौकरी का झांसा देकर विदेश ले जाया गया और फिर बंधक बना कर अवैध ऑनलाइन काम करने के लिए मजबूर किया गया।
नवंबर में तेलंगाना के 11 लोगों को भी थाईलैंड से वापस लाया गया था, जो 270 भारतीयों के समूह का हिस्सा थे। ये लोग म्यांमार में साइबर अपराध के ठिकानों पर की गई सैन्य कार्रवाई के बाद वहां से भागकर थाईलैंड पहुंचे थे।
इसके अलावा, आंध्र प्रदेश के 55 लोगों को भी म्यांमार के साइबर अपराध केंद्रों से बचाया गया था। वे 370 भारतीयों के समूह में शामिल थे। सभी विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम के निवासी हैं।
म्यांमार में उनके मोबाइल जब्त कर लिए गए थे और उनके पास पैसे नहीं थे, इसलिए भारत पहुंचने पर आंध्र प्रदेश सरकार ने उन्हें सहायता प्रदान की। राज्य सरकार ने कुल 79 लोगों को सुरक्षित उनके घर पहुंचाने में मदद की।
इससे पहले भी आंध्र प्रदेश के विभिन्न इलाकों के 24 लोग थाईलैंड से वापस लाए गए थे।