वर्ल्ड उइगर कांग्रेस की मार्को रुबियो से अपील: उज्बेकिस्तान यात्रा में उठाएं मध्य एशिया के उइगरों का मुद्दा
सारांश
मुख्य बातें
वर्ल्ड उइगर कांग्रेस (WUC) ने 17 अक्टूबर 2026 को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से आग्रह किया है कि वह अगले सप्ताह उज्बेकिस्तान की अपनी नियोजित यात्रा के दौरान मध्य एशिया में रह रहे उइगर समुदाय की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और चीन की सीमाओं के बाहर जारी दमन का मुद्दा उठाएं। संगठन का कहना है कि चीन इन देशों पर दबाव बनाकर उइगर शरणार्थियों की राजनीतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों को कुचलने में सहयोग माँग रहा है।
मध्य एशिया में उइगरों की स्थिति
WUC के अनुसार, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान जैसे देश एक तरफ उन उइगरों के लिए शरणस्थली बने हैं जो शिनजियांग क्षेत्र में कथित उत्पीड़न से भागकर आए हैं। लेकिन इन्हीं देशों में वे निगरानी, धमकी, मनमानी हिरासत और जबरन चीन वापस भेजे जाने जैसे गंभीर खतरों का सामना कर रहे हैं। संगठन का आरोप है कि बीजिंग इन सरकारों से उइगरों की शांतिपूर्ण गतिविधियों — जिनमें धार्मिक आस्था और विदेश में रहने वाले रिश्तेदारों से संपर्क भी शामिल है — पर अंकुश लगाने के लिए सहयोग की माँग करता है।
रुबियो से क्या माँगी गई है
WUC ने मार्को रुबियो से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली, मध्य एशियाई सरकारों पर दबाव डाला जाए कि वे किसी भी उइगर को जबरन चीन वापस न भेजें, क्योंकि लौटाए जाने पर उन्हें कथित तौर पर यातना, मनमानी हिरासत और अन्य गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों का सामना करना पड़ सकता है। दूसरी, इन देशों को चीनी अनुरोधों पर उइगरों की निगरानी या उन्हें चुप कराने से रोका जाए। तीसरी, अमेरिका उइगर अधिकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को खुलकर दोहराए।
पोम्पियो की मिसाल और ऐतिहासिक संदर्भ
संगठन ने याद दिलाया कि अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने 2019 में मध्य एशियाई नेताओं के साथ बैठक में सार्वजनिक रूप से उइगरों का मुद्दा उठाया था और उनसे उइगरों को चीन न भेजने की अपील की थी। 2020 में कजाकिस्तान की यात्रा के दौरान भी उन्होंने यही चिंता दोहराई थी। WUC का तर्क है कि रुबियो के पास भी इसी भावना को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
शी जिनपिंग की वाशिंगटन यात्रा से जुड़ी पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि पिछले महीने WUC ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन से भी अनुरोध किया था कि 24 सितंबर को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा के दौरान शिनजियांग में उइगरों के कथित नरसंहार और विदेशों में उनके समुदाय पर चीनी दबाव का मुद्दा उठाया जाए। WUC के अध्यक्ष तुर्गुनजान अलाउडुन ने कहा था, 'शी जिनपिंग की वाशिंगटन यात्रा केवल उइगर नरसंहार की निंदा करने तक सीमित रहने का नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाने का एक अहम अवसर है।' उन्होंने जोड़ा कि 'अमेरिका लंबे समय से उइगर लोगों का मजबूत और मुखर समर्थक रहा है, और डोनाल्ड ट्रंप को इस अवसर का उपयोग कर यह समर्थन जारी रखना चाहिए।'
आगे क्या होगा
रुबियो की उज्बेकिस्तान यात्रा मध्य एशिया में अमेरिका की कूटनीतिक सक्रियता के व्यापक संदर्भ में हो रही है। यह यात्रा ऐसे समय में आई है जब चीन-अमेरिका संबंधों में तनाव बना हुआ है और मानवाधिकार समूह शिनजियांग नीति पर अमेरिकी रुख पर पैनी नज़र रखे हुए हैं। WUC की अपील इस बात का संकेत है कि उइगर समर्थक संगठन ट्रंप प्रशासन को इस मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करने की कोशिश जारी रखेंगे।