ली छ्यांग की ताशकंद यात्रा: उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति और PM से मुलाकात, व्यापार-स्वास्थ्य समेत कई समझौतों पर हस्ताक्षर
सारांश
मुख्य बातें
चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने 18 अक्टूबर 2026 को ताशकंद में उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिरोमोनोविच मिर्ज़ियोयेव से द्विपक्षीय वार्ता की। इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने चीन-उज्बेकिस्तान संबंधों को और गहरा करने तथा 'साझा भविष्य वाले समुदाय' के निर्माण को गति देने पर सहमति जताई।
मुख्य घटनाक्रम
ली छ्यांग ने राष्ट्रपति मिर्ज़ियोयेव के साथ बैठक में कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और मिर्ज़ियोयेव के रणनीतिक मार्गदर्शन में हाल के वर्षों में दोनों देशों के संबंधों ने नए मुकाम हासिल किए हैं। उन्होंने कहा कि जटिल और अस्थिर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच चीन और उज्बेकिस्तान को एकजुट होकर और अधिक घनिष्ठ सहयोग के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
ली छ्यांग ने यह भी रेखांकित किया कि चीन उज्बेकिस्तान के साथ रणनीतिक संचार को मजबूत करने, एक-दूसरे के मूल हितों का दृढ़तापूर्वक समर्थन जारी रखने और पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग का विस्तार करने का इच्छुक है।
प्रधानमंत्री अरिपोव से वार्ता
ताशकंद प्रवास के दौरान ली छ्यांग ने उज्बेकिस्तान के प्रधानमंत्री अब्दुल्ला निगमातोविच अरिपोव के साथ भी अलग से वार्ता की। इस बातचीत में उन्होंने कहा कि इसी वर्ष अगस्त 2026 में राष्ट्रपति शी चिनफिंग और राष्ट्रपति मिर्ज़ियोयेव की बैठक ने द्विपक्षीय संबंधों की दिशा को और सुदृढ़ किया।
ली छ्यांग ने यह भी उल्लेख किया कि अगले वर्ष चीन और उज्बेकिस्तान के बीच राजनयिक संबंध स्थापना की 35वीं वर्षगाँठ है। उन्होंने कहा कि चीन इस अवसर का उपयोग पारंपरिक मित्रता को नई ऊँचाई देने, राजनीतिक आपसी विश्वास को और गहरा करने और व्यावहारिक सहयोग को और व्यापक बनाने के लिए करना चाहता है।
सहयोग दस्तावेजों पर हस्ताक्षर
वार्ता के उपरांत दोनों पक्षों ने व्यापार, शिक्षा, सीमा शुल्क, स्वास्थ्य और गरीबी उन्मूलन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में कई द्विपक्षीय सहयोग दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। इसके अतिरिक्त, यात्रा के दौरान ई-कॉमर्स, जलवायु और मीडिया क्षेत्रों में भी सहयोग समझौते संपन्न हुए।
गौरतलब है कि यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच मध्य एशियाई देशों के साथ चीन की कूटनीतिक सक्रियता बढ़ रही है। उज्बेकिस्तान, 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' के तहत चीन का एक प्रमुख साझेदार देश है।
आगे क्या होगा
दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की 35वीं वर्षगाँठ को देखते हुए आगामी वर्ष उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान और नई संयुक्त पहलों की संभावना है। हस्ताक्षरित समझौतों के क्रियान्वयन और उनके व्यावहारिक परिणामों पर दोनों देशों की नज़र रहेगी।