27 जून 2026
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चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग की हुन सेन से बैठक, 'डायमंड हेक्सागोन' और AI सहयोग पर जोर

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चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग की हुन सेन से बैठक, 'डायमंड हेक्सागोन' और AI सहयोग पर जोर

सारांश

चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग और कंबोडिया के हुन सेन की बीजिंग में मुलाकात महज शिष्टाचार भेंट नहीं थी — यह दक्षिण-पूर्व एशिया में चीन की गहरी होती पकड़ का संकेत है। AI, हरित ऊर्जा और 'डायमंड हेक्सागोन' ढाँचे पर जोर बताता है कि बीजिंग अब परंपरागत बुनियादी ढाँचे से आगे बढ़कर तकनीकी और आर्थिक निर्भरता की नई परतें बुन रहा है।

मुख्य बातें

चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने 27 जून 2025 को बीजिंग के जन वृहद भवन में हुन सेन से उच्चस्तरीय वार्ता की।
चीन ने 'डायमंड हेक्सागोन' सहयोग ढाँचे , 'औद्योगिक विकास गलियारे' और 'मछली एवं चावल गलियारे' को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।
सहयोग के नए क्षेत्रों में AI , स्वच्छ ऊर्जा , डिजिटल अर्थव्यवस्था , नीली अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला शामिल हैं।
हुन सेन ने अधिक चीनी निवेश का स्वागत किया और कंबोडियाई पीपुल्स पार्टी व चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के बीच आदान-प्रदान बढ़ाने पर सहमति जताई।
दोनों देश संयुक्त राष्ट्र , लानत्सांग-मेकांग और आसियान मंचों पर मिलकर काम करेंगे।

चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने 27 जून 2025 को बीजिंग स्थित जन वृहद भवन में कंबोडियाई पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष एवं सीनेट के अध्यक्ष हुन सेन के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने, आर्थिक सहयोग विस्तार और बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई।

ली छ्यांग ने रखा सहयोग का रोडमैप

बैठक में ली छ्यांग ने कहा कि चीन और कंबोडिया ऐसे घनिष्ठ मित्र हैं जिन्होंने सुख और संकट दोनों में एक-दूसरे का साथ दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन अपनी पड़ोसी कूटनीति में कंबोडिया को प्राथमिकता देता है और कंबोडिया की सरकार के सुचारू कामकाज को निरंतर समर्थन देता रहेगा।

ली ने कहा कि चीन दोनों देशों के बीच रणनीतिक संचार बढ़ाना, राजनीतिक विश्वास को और मजबूत करना तथा पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग का दायरा बढ़ाना चाहता है। गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दक्षिण-पूर्व एशिया में चीन की कूटनीतिक सक्रियता तेज हो रही है।

'डायमंड हेक्सागोन' और औद्योगिक गलियारों पर फोकस

चीनी प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देश अपनी-अपनी विकास योजनाओं को आपस में जोड़ेंगे और 'डायमंड हेक्सागोन' सहयोग ढाँचे को सुदृढ़ किया जाएगा। इसके साथ ही 'औद्योगिक विकास गलियारे' और 'मछली एवं चावल गलियारे' के निर्माण में गति लाई जाएगी।

सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचा, कृषि, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) शामिल हैं। दोनों पक्षों ने सांस्कृतिक, पर्यटन और शैक्षिक आदान-प्रदान बढ़ाने पर भी सहमति जताई। संयुक्त राष्ट्र, लानत्सांग-मेकांग और आसियान जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भी दोनों देश मिलकर काम करेंगे।

हुन सेन ने जताया आभार, निवेश का दिया न्योता

हुन सेन ने कहा कि कंबोडिया-चीन मैत्री ने अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक उतार-चढ़ाव की कड़ी परीक्षा सफलतापूर्वक पार की है। उन्होंने चीन के दीर्घकालिक समर्थन और सहायता के प्रति आभार व्यक्त किया।

हुन सेन ने कहा कि कंबोडिया डिजिटलीकरण, हरित परिवर्तन, नीली अर्थव्यवस्था, आपूर्ति श्रृंखला और वित्त जैसे उभरते क्षेत्रों में नई सहयोग संभावनाओं का दोहन करना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि कंबोडिया अधिक चीनी कंपनियों के निवेश का स्वागत करता है और कंबोडियाई पीपुल्स पार्टी, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ आदान-प्रदान और बढ़ाने को तत्पर है।

व्यापक संदर्भ और आगे की राह

यह बैठक चीन की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है जिसके तहत वह दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ अपने संबंधों को नई ऊँचाई देना चाहता है। कंबोडिया लंबे समय से चीन के करीबी सहयोगी के रूप में जाना जाता है और आसियान मंचों पर अक्सर बीजिंग के पक्षों का समर्थन करता रहा है। दोनों नेताओं के बीच इस वार्ता से द्विपक्षीय संबंधों में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें वह परंपरागत बुनियादी ढाँचे की जगह AI, डिजिटल अर्थव्यवस्था और हरित ऊर्जा को नए बंधन-सूत्र बना रहा है। कंबोडिया का आसियान में चीन-समर्थक रुख जगजाहिर है, इसलिए यह साझेदारी क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन पर भी असर डालती है। 'डायमंड हेक्सागोन' जैसे ढाँचों की असली परीक्षा यह है कि क्या ये कंबोडिया की आम जनता के लिए ठोस आर्थिक लाभ लाते हैं, या केवल बीजिंग की भू-राजनीतिक उपस्थिति को मजबूत करते हैं।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ली छ्यांग और हुन सेन की बैठक कब और कहाँ हुई?
यह बैठक 27 जून 2025 को बीजिंग स्थित जन वृहद भवन में हुई। इसमें चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग और कंबोडियाई पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष एवं सीनेट के अध्यक्ष हुन सेन ने द्विपक्षीय संबंधों पर विस्तृत चर्चा की।
'डायमंड हेक्सागोन' सहयोग ढाँचा क्या है?
'डायमंड हेक्सागोन' चीन और कंबोडिया के बीच एक बहु-आयामी सहयोग ढाँचा है जो आर्थिक, औद्योगिक और विकास परियोजनाओं को एकीकृत करता है। ली छ्यांग ने इस ढाँचे को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।
चीन और कंबोडिया किन नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएँगे?
दोनों देश AI, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, नीली अर्थव्यवस्था, आपूर्ति श्रृंखला और वित्त में सहयोग की नई संभावनाएँ तलाशेंगे। इसके अलावा सांस्कृतिक, पर्यटन और शैक्षिक आदान-प्रदान भी बढ़ाया जाएगा।
हुन सेन ने इस बैठक में चीन से क्या अपील की?
हुन सेन ने चीनी कंपनियों को कंबोडिया में निवेश का न्योता दिया और कंबोडियाई पीपुल्स पार्टी व चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के बीच आदान-प्रदान बढ़ाने की इच्छा जताई। उन्होंने चीन के दीर्घकालिक समर्थन के लिए आभार भी व्यक्त किया।
यह बैठक क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से क्यों अहम है?
कंबोडिया आसियान का एक प्रमुख सदस्य है और ऐतिहासिक रूप से चीन का करीबी सहयोगी रहा है। यह बैठक दक्षिण-पूर्व एशिया में चीन की बढ़ती कूटनीतिक और आर्थिक सक्रियता को दर्शाती है, जिसमें अब तकनीकी सहयोग को भी केंद्र में रखा जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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