18 सितंबर 2026
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शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा से पहले वर्ल्ड उइगर कांग्रेस की ट्रंप से अपील — शिनजियांग मानवाधिकार उल्लंघन उठाएं

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शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा से पहले वर्ल्ड उइगर कांग्रेस की ट्रंप से अपील — शिनजियांग मानवाधिकार उल्लंघन उठाएं

सारांश

शी जिनपिंग की 24 सितंबर की वाशिंगटन यात्रा से पहले वर्ल्ड उइगर कांग्रेस ने ट्रंप से सीधी अपील की है — शिनजियांग के कथित नरसंहार पर केवल शब्दों से नहीं, ठोस कूटनीतिक कार्रवाई से जवाब दें।

मुख्य बातें

वर्ल्ड उइगर कांग्रेस (WUC) ने 18 सितंबर 2026 को राष्ट्रपति ट्रंप से शिनजियांग में कथित नरसंहार और मानवाधिकार उल्लंघन उठाने की अपील की।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की वाशिंगटन यात्रा 24 सितंबर को निर्धारित है।
अमेरिका ने पहली बार 19 जनवरी 2021 को शिनजियांग की स्थिति को आधिकारिक रूप से 'नरसंहार' माना था।
अमेरिकी विदेश विभाग ने 10 सितंबर को जारी बयान में यह रुख दोहराया।
WUC ने श्रम हस्तांतरण कार्यक्रमों के ज़रिए उइगरों के कथित जबरन विस्थापन और अमेरिका में सीमा-पार दमन पर भी चिंता जताई।

वर्ल्ड उइगर कांग्रेस (WUC) ने 18 सितंबर 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन से अपील की है कि वे चीन के शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र में उइगरों के कथित नरसंहार और मानवाधिकार उल्लंघनों का मुद्दा प्रभावी ढंग से उठाएं। यह अपील चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की 24 सितंबर को होने वाली वाशिंगटन यात्रा से महज़ कुछ दिन पहले आई है।

WUC की अपील की पृष्ठभूमि

WUC ने याद दिलाया कि अमेरिका ने पहली बार 19 जनवरी 2021 को शिनजियांग की स्थिति को आधिकारिक रूप से 'नरसंहार' के तौर पर मान्यता दी थी। संगठन के अनुसार, अमेरिकी विदेश विभाग ने भी 10 सितंबर को जारी एक आधिकारिक बयान में इस रुख को पुनः दोहराया — यानी शी की यात्रा से ठीक पहले।

यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-चीन संबंध व्यापार, तकनीक और भू-राजनीति पर कई मोर्चों पर तनावपूर्ण बने हुए हैं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बैठकों में अक्सर मानवाधिकार के मुद्दे व्यापार और सुरक्षा एजेंडे की आड़ में दब जाते हैं।

WUC अध्यक्ष का बयान

WUC के अध्यक्ष तुर्गुनजान अलावदुन ने कहा, 'शी की वाशिंगटन यात्रा उइगर नरसंहार की निंदा के शब्दों से आगे बढ़ने का रणनीतिक अवसर है। अमेरिका उइगर लोगों का मजबूत और मुखर सहयोगी रहा है और डोनाल्ड ट्रंप को इस अवसर का इस्तेमाल इसे साबित करने के लिए करना चाहिए।'

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी उइगर अधिकार संगठन ने अमेरिकी राष्ट्रपति से इस मुद्दे पर कार्रवाई की माँग की हो — लेकिन शी की आगामी यात्रा ने इस बार की अपील को विशेष राजनयिक महत्व दे दिया है।

शिनजियांग में कथित दमन: नए स्वरूप

WUC ने आरोप लगाया कि चीन के अधिकारियों ने दमन के तरीकों में बदलाव किया है, लेकिन हिरासत में लिए गए और लापता हुए लाखों उइगरों का अब भी कोई अता-पता नहीं है। संगठन के मुताबिक हाल के वर्षों में श्रम हस्तांतरण कार्यक्रमों में वृद्धि हुई है, जिनके तहत उइगर श्रमिकों को कथित तौर पर जबरन विस्थापित कर काम करने पर मजबूर किया जा रहा है।

WUC का यह भी दावा है कि 'एथनिक यूनिटी एंड प्रोग्रेसिव लॉ' के लागू होने के बाद धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों की बुनियादी अभिव्यक्तियों को भी अपराध की श्रेणी में रखा गया है। संगठन ने इन आरोपों के लिए बीजिंग को सीधे जिम्मेदार ठहराया है, हालाँकि चीन ने ऐसे सभी आरोपों को लगातार खारिज करते हुए इन्हें 'आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप' बताया है।

अमेरिका में उइगर समुदाय पर कथित दबाव

WUC ने चीन पर विदेशों में बसे उइगर समुदायों को निशाना बनाने और उनकी गतिविधियों को बाधित करने का भी आरोप लगाया। संगठन के अनुसार, विशेष रूप से अमेरिका में रह रहे मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर डराने-धमकाने की कोशिशें की जा रही हैं — जिसे संगठन 'सीमा-पार दमन' कहता है।

WUC ने अमेरिकी प्रशासन से माँग की कि वह शी जिनपिंग के साथ वार्ता के दौरान न केवल उइगरों, बल्कि तिब्बती, हांगकांग और चीनी प्रवासी समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का दबाव बनाए।

आगे क्या होगा

शी जिनपिंग की 24 सितंबर की यात्रा को लेकर वाशिंगटन में कूटनीतिक सरगर्मी तेज है। यह देखना अहम होगा कि ट्रंप प्रशासन इस बैठक में मानवाधिकार के मुद्दों को व्यापार और सुरक्षा वार्ता के साथ किस प्राथमिकता पर रखता है। आलोचकों का कहना है कि अतीत में अमेरिकी प्रशासन आर्थिक हितों के सामने मानवाधिकार एजेंडे को पीछे धकेलते रहे हैं — और यही पैटर्न इस बार भी दोहराए जाने की आशंका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो मानवाधिकार एजेंडा प्रायः व्यापार और सुरक्षा वार्ता की परछाईं में दब जाता है। अमेरिका ने 2021 में 'नरसंहार' की मान्यता दी, लेकिन आलोचकों का कहना है कि मान्यता और कार्रवाई के बीच की खाई कभी नहीं पाटी गई। ट्रंप प्रशासन की पहली पारी में भी उइगर मुद्दा व्यापार सौदों की मोलतोल में सौदेबाज़ी का चिप बनकर रह गया था। अब सवाल यह नहीं कि अमेरिका इस मुद्दे को उठाएगा या नहीं — सवाल यह है कि क्या वह इसे 'एजेंडा' से आगे 'नतीजे' तक ले जाने की राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाएगा।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वर्ल्ड उइगर कांग्रेस (WUC) ने ट्रंप से क्या माँग की है?
WUC ने राष्ट्रपति ट्रंप से अपील की है कि वे 24 सितंबर को शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा के दौरान शिनजियांग में उइगरों के कथित नरसंहार और मानवाधिकार उल्लंघनों का मुद्दा ठोस और प्रभावी तरीके से उठाएं। संगठन ने विशेष रूप से जबरन श्रम हस्तांतरण, धार्मिक-सांस्कृतिक अधिकारों के अपराधीकरण और अमेरिका में उइगरों पर कथित सीमा-पार दमन को रोकने का दबाव बनाने की माँग की है।
शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा कब है और इसका महत्व क्या है?
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 24 सितंबर 2026 को वाशिंगटन की यात्रा पर आने वाले हैं। यह यात्रा अमेरिका-चीन संबंधों में व्यापार, तकनीक और भू-राजनीतिक तनाव के बीच हो रही है, इसलिए मानवाधिकार संगठनों ने इसे उइगर मुद्दे पर ठोस कदम उठाने के लिए रणनीतिक अवसर बताया है।
अमेरिका ने शिनजियांग को 'नरसंहार' कब और कैसे माना?
अमेरिका ने पहली बार 19 जनवरी 2021 को शिनजियांग की स्थिति को आधिकारिक रूप से 'नरसंहार' के तौर पर मान्यता दी थी। WUC के अनुसार, अमेरिकी विदेश विभाग ने 10 सितंबर 2026 को जारी एक आधिकारिक बयान में इस रुख को पुनः दोहराया है।
चीन शिनजियांग में दमन के आरोपों पर क्या कहता है?
चीन ने शिनजियांग में दमन, जबरन श्रम और नरसंहार के सभी आरोपों को लगातार खारिज किया है। बीजिंग इन्हें अपने आंतरिक मामलों में पश्चिमी हस्तक्षेप बताता है और शिनजियांग में चल रहे कार्यक्रमों को 'आतंकवाद-विरोधी' और 'व्यावसायिक प्रशिक्षण' पहल के रूप में प्रस्तुत करता है।
WUC ने अमेरिका में उइगर समुदाय की सुरक्षा को लेकर क्या चिंता जताई?
WUC ने आरोप लगाया कि चीन अमेरिका समेत विदेशों में रह रहे उइगर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर डराने-धमकाने की कोशिश कर रहा है। संगठन ने इस 'सीमा-पार दमन' को रोकने और उइगर, तिब्बती, हांगकांग तथा चीनी प्रवासी समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी प्रशासन से दबाव बनाने की माँग की है।
राष्ट्र प्रेस
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