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महाराष्ट्र सूखा संकट: कांग्रेस की मांग — ₹50,000 प्रति हेक्टेयर तत्काल मुआवजा और संपूर्ण कर्जमाफी

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महाराष्ट्र सूखा संकट: कांग्रेस की मांग — ₹50,000 प्रति हेक्टेयर तत्काल मुआवजा और संपूर्ण कर्जमाफी

सारांश

महाराष्ट्र में डेढ़ महीने से बारिश नहीं, फसलें बर्बाद — और विपक्ष का आरोप है कि महायुति सरकार बेपरवाह बैठी है। कांग्रेस ने ₹50,000 प्रति हेक्टेयर मुआवजे और संपूर्ण कर्जमाफी की माँग रखी है, वरना मंत्रियों के आवागमन पर जनआक्रोश की चेतावनी दी है।

मुख्य बातें

एमपीसीसी अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने 19 सितंबर 2026 को महाराष्ट्र सरकार पर सूखे के प्रति उदासीनता का आरोप लगाया।
कांग्रेस की माँग: तत्काल सूखा घोषणा, किसानों को ₹50,000 प्रति हेक्टेयर सीधे बैंक खातों में और संपूर्ण कर्जमाफी ।
राज्य के कई हिस्सों में डेढ़ महीने से अधिक समय से वर्षा नहीं, खड़ी फसलें पूरी तरह नष्ट।
सपकाल का आरोप: सरकार ने कुंभ मेले में सीसीटीवी पर ₹350 करोड़ खर्च किए, किसानों के लिए राहत नहीं।
चुनाव आयोग (ECI) पर भी पक्षपात का आरोप; कांग्रेस ने SIR प्रक्रिया को मताधिकार के लिए खतरा बताया।
सपकाल ने चेतावनी दी कि राहत न मिली तो दशहरे से पहले मंत्रियों को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ेगा।

महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने 19 सितंबर 2026 को मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली महायुति सरकार पर राज्य में व्याप्त गंभीर सूखे को लेकर पूर्णत: उदासीन रहने का आरोप लगाया। उन्होंने माँग की कि सरकार तत्काल सूखे की आधिकारिक घोषणा करे, किसानों के बैंक खातों में सीधे ₹50,000 प्रति हेक्टेयर जमा करे और संपूर्ण कर्जमाफी लागू करे। सपकाल ने चेतावनी दी कि यदि ये कदम शीघ्र नहीं उठाए गए, तो जनता का आक्रोश मंत्रियों के सार्वजनिक आवागमन तक को बाधित कर देगा।

सूखे की गंभीरता: डेढ़ महीने से नहीं हुई बारिश

सपकाल के अनुसार, महाराष्ट्र के अनेक जिलों में डेढ़ महीने से अधिक समय से वर्षा नहीं हुई है, जिसके चलते खड़ी फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। उन्होंने कहा कि किसान सर्वाधिक संकटग्रस्त हैं और उनके समक्ष आजीविका का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र पहले से ही कृषि संकट की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माने जाते हैं, और ऐसे में दीर्घकालीन वर्षाभाव किसानों के लिए दोहरी मार साबित हो रहा है।

एमपीसीसी अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कैबिनेट की बैठकों में इस संकट पर चर्चा तो होती है, परन्तु कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रभारी मंत्री अब तक प्रभावित किसानों से मिलने तक नहीं गए हैं — जिसे उन्होंने सरकारी संवेदनहीनता का प्रमाण बताया।

सरकार पर प्राथमिकताएँ गलत रखने का आरोप

सपकाल ने कहा कि महायुति सरकार ने कुंभ मेले में सीसीटीवी कैमरे लगाने पर ₹350 करोड़ खर्च किए, लेकिन सूखाग्रस्त किसानों के लिए राहत कोष जारी करने में वह हिचकिचा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सख्त जरूरत के बावजूद क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम वर्षा) का कोई निर्णय नहीं लिया गया। उनका कहना था कि प्रशासन को नागरिकों की भलाई से नहीं, बल्कि 'भ्रष्टाचार और कमीशन' से मतलब है — यह एक गंभीर आरोप है जिसे सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

उन्होंने सरकार से अपील की कि दशहरा और त्योहारी सीजन से पहले किसानों तक राहत पहुँचाई जाए, ताकि ग्रामीण परिवारों को कुछ आर्थिक सहारा मिल सके।

प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन समारोह पर तीखी टिप्पणी

सपकाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर दीये जलाने की अपील की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि जब युवा बेरोजगार हैं, महिलाओं की सुरक्षा खतरे में है और किसान बर्बाद हो रहे हैं, तब जन्मदिन उत्सव मनाना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि पहले मोदी ने तेल की खपत कम करने, विदेश यात्रा सीमित करने और सोना न खरीदने की सादगी की अपील की थी — और अब तेल के दीये जलाने का आह्वान इसी रवैये से विरोधाभासी है।

चुनाव आयोग पर भी साधा निशाना

एमपीसीसी प्रमुख ने भारत के चुनाव आयोग (ECI) पर भी आरोप लगाया कि वह सत्तारूढ़ भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया लागू करने से नागरिकों के मताधिकार पर खतरा मंडरा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए घातक है। उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस इन कदमों का कड़ा विरोध करेगी और सड़कों पर संघर्ष जारी रखेगी।

आगे क्या

सपकाल की इन माँगों और चेतावनियों के बाद महायुति सरकार पर दबाव बढ़ना तय है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में विपक्ष पहले से ही कृषि संकट और बेरोजगारी के मुद्दे पर आक्रामक है। आने वाले हफ्तों में सरकार की प्रतिक्रिया और राहत उपायों की घोषणा — या उसका अभाव — राज्य की राजनीतिक दिशा तय कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनके पीछे एक असली कृषि संकट है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति और किसानों की दुर्दशा कोई नई बात नहीं — राज्य में हर कुछ वर्षों पर ऐसे संकट आते हैं और हर बार राहत के वादे अधूरे रह जाते हैं। असली सवाल यह है कि क्या महायुति सरकार दशहरे से पहले कोई ठोस और सत्यापन-योग्य राहत पैकेज घोषित करती है, या फिर यह संकट भी वादों और प्रेस कॉन्फ्रेंसों में दब जाता है। चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोप और SIR विवाद अलग से ध्यान माँगते हैं — यह एक ऐसा संवैधानिक सवाल है जिस पर व्यापक बहस जरूरी है।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में सूखे की क्या स्थिति है?
एमपीसीसी अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के अनुसार, महाराष्ट्र के अनेक हिस्सों में डेढ़ महीने से अधिक समय से वर्षा नहीं हुई है, जिससे खड़ी फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। सरकार ने अभी तक आधिकारिक रूप से सूखे की घोषणा नहीं की है।
कांग्रेस ने महाराष्ट्र सरकार से क्या माँगें रखी हैं?
कांग्रेस ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं: तत्काल सूखे की आधिकारिक घोषणा, किसानों के बैंक खातों में सीधे ₹50,000 प्रति हेक्टेयर जमा करना और सभी किसानों का कर्ज माफ करना। सपकाल ने यह भी माँग की कि दशहरे से पहले राहत पहुँचाई जाए।
कांग्रेस ने सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
एमपीसीसी अध्यक्ष सपकाल ने आरोप लगाया कि महायुति सरकार ने कुंभ मेले में सीसीटीवी पर ₹350 करोड़ खर्च किए, लेकिन किसानों के लिए राहत जारी नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि कैबिनेट में चर्चा होती है, पर कोई ठोस निर्णय नहीं होता और प्रभारी मंत्री प्रभावित इलाकों में नहीं गए।
चुनाव आयोग पर कांग्रेस ने क्या आरोप लगाए?
सपकाल ने भारत के चुनाव आयोग (ECI) पर सत्तारूढ़ भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया से नागरिकों के मताधिकार पर खतरा है और कांग्रेस इसका सड़कों पर विरोध करेगी।
कांग्रेस ने PM मोदी के जन्मदिन समारोह की आलोचना क्यों की?
सपकाल ने कहा कि जब किसान बर्बाद हो रहे हों, युवा बेरोजगार हों और महंगाई बढ़ रही हो, तब जन्मदिन उत्सव मनाना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि पहले सादगी की अपील करने वाले मोदी का दीये जलाने का आह्वान विरोधाभासी है।
राष्ट्र प्रेस
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