राजकोट में 108 टीम की मदद से महिला ने घर पर दिया तीन बच्चों को जन्म, तीनों लड़के सुरक्षित
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के राजकोट ज़िले में एक असाधारण घटना में, टंकारा तालुका के रोहिशाला गाँव की एक महिला ने 19 सितंबर 2026 की रात अपने घर पर ही तीन बच्चों को जन्म दिया — जिनमें से पहले बच्चे का जन्म एम्बुलेंस पहुँचने से पहले ही हो गया था। 108 आपातकालीन सेवा की टीम ने मौके पर पहुँचकर शेष दो बच्चों के प्रसव में सफलतापूर्वक सहायता की। तीनों नवजात लड़के हैं और माँ सहित सभी को सुरक्षित जनाना अस्पताल पहुँचाया गया।
घटनाक्रम की पूरी जानकारी
पडधरी 108 टीम को 19 सितंबर की रात 8:48 बजे प्रसव संबंधी आपातकालीन सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही ईएमटी जिग्नाशा लुहार और पायलट सुरेशभाई बिना किसी देरी के रोहिशाला गाँव के लिए रवाना हुए। जब एम्बुलेंस महिला के घर पहुँची, तब तक तीन बच्चों में से पहले बच्चे का जन्म हो चुका था।
शेष दो बच्चों का प्रसव अभी होना था। ऐसी असामान्य और जटिल स्थिति में लुहार ने अपने आपातकालीन चिकित्सा प्रशिक्षण का उपयोग करते हुए स्थिति का तत्काल आकलन किया और शेष दोनों बच्चों को सफलतापूर्वक जन्म दिलाने में सहायता की।
चिकित्सकीय मार्गदर्शन की अहम भूमिका
प्रसव के दौरान मरीज की स्वास्थ्य स्थिति और अन्य ज़रूरी जानकारी फोन पर ईआरसीपी डॉ. जोत्सना के साथ साझा की गई। डॉ. जोत्सना के दिशानिर्देशों के अनुसार टीम ने माँ और नवजात बच्चों को आवश्यक देखभाल दी और लगातार उनकी निगरानी करती रही। 108 टीम ने बताया कि ऐसी स्थिति में डॉक्टर का रियल-टाइम मार्गदर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुआ।
तीन बच्चों के प्रसव की चुनौती
108 सेवा के अनुसार, सामान्य प्रसव की तुलना में तीन शिशुओं का प्रसव कहीं अधिक जटिल और चुनौतीपूर्ण होता है, जिसके लिए अतिरिक्त सावधानी और सटीक प्रबंधन की ज़रूरत होती है। इस मामले में विशेष बात यह रही कि टीम के पहुँचने से पहले ही पहले शिशु का जन्म हो चुका था, जिससे स्थिति और भी नाज़ुक थी।
गौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आपातकालीन प्रसव की ऐसी घटनाएँ यह रेखांकित करती हैं कि 108 जैसी सेवाएँ दूरदराज़ के इलाकों में जीवनरक्षक की भूमिका निभाती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करने की ज़रूरत पर लगातार बहस होती रहती है।
माँ और नवजातों की सुरक्षित अस्पताल रवानगी
तीनों बच्चों के सफल प्रसव के बाद लुहार ने सुनिश्चित किया कि माँ और तीनों नवजातों को ज़रूरी प्राथमिक चिकित्सा और देखभाल मिले। इसके बाद उन्हें जनाना अस्पताल ले जाया गया, जहाँ अस्पताल की मेडिकल टीम को उन्हें सुरक्षित सौंपा गया। 108 टीम ने पायलट सुरेशभाई के सहयोग और डॉ. जोत्सना के चिकित्सकीय मार्गदर्शन की विशेष सराहना की।
फिलहाल माँ और तीनों नवजात लड़के आगे के उपचार और देखभाल के लिए अस्पताल में हैं और उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।