20 सितंबर 2026
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भारत 2028-29 तक बनेगा दुनिया का सबसे बड़ा रेशम उत्पादक: गिरिराज सिंह का बड़ा ऐलान

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भारत 2028-29 तक बनेगा दुनिया का सबसे बड़ा रेशम उत्पादक: गिरिराज सिंह का बड़ा ऐलान

सारांश

चीन में उत्पादन घटने और वैश्विक माँग बढ़ने के बीच भारत ने रेशम क्षेत्र में बड़ा दाँव खेला है। गिरिराज सिंह ने 2028-29 तक विश्व के सबसे बड़े रेशम उत्पादक बनने और किसानों की सालाना आय ₹10-12 लाख तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा — यह भारतीय कपड़ा उद्योग की दिशा बदलने वाली घोषणा हो सकती है।

मुख्य बातें

केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने 20 सितंबर 2026 को बेंगलुरु में 2028-29 तक भारत को विश्व का सबसे बड़ा रेशम उत्पादक बनाने का लक्ष्य घोषित किया।
भारत का रेशम उत्पादन 2014 के 26,000 मीट्रिक टन से बढ़कर 42,000 मीट्रिक टन हो गया है।
2030-31 तक उत्पादन 60,000 मीट्रिक टन तक बढ़ाने का दीर्घकालिक लक्ष्य भी निर्धारित।
सरकार रेशम किसानों की सालाना आय ₹10-12 लाख तक पहुँचाना चाहती है।
भारतीय कपड़ा बाज़ार को 300 अरब डॉलर तक विस्तारित करना प्रमुख प्राथमिकता।
सिल्क बोर्ड ने 28 वैज्ञानिकों को नियुक्ति पत्र दिए और कई संगठनों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए।

केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने 20 सितंबर 2026 को बेंगलुरु में घोषणा की कि भारत सरकार का लक्ष्य 2028-29 तक देश को विश्व का सबसे बड़ा रेशम उत्पादक बनाना है। उन्होंने बताया कि 2014 में जहाँ देश का रेशम उत्पादन 26,000 मीट्रिक टन था, वह आज बढ़कर 42,000 मीट्रिक टन हो चुका है।

मुख्य घटनाक्रम

मंत्री सिंह सेंट्रल सिल्क बोर्ड के 77वें स्थापना दिवस समारोह और रेशम उत्पादों व तकनीकों की प्रदर्शनी के उद्घाटन के अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने 2030-31 तक रेशम उत्पादन को 60,000 मीट्रिक टन तक पहुँचाने का दीर्घकालिक लक्ष्य भी तय किया है। यह कार्यक्रम रेशम उद्योग की नीतिगत दिशा और तकनीकी प्रगति पर केंद्रित रहा।

किसानों की आय और उत्पादन विस्तार

गिरिराज सिंह ने बताया कि शहतूत के पत्तों की पैदावार बढ़ाने और कोकून पालन के चक्रों में वृद्धि करके सरकार रेशम किसानों की सालाना आय 10-12 लाख रुपए तक पहुँचाना चाहती है। उन्होंने यह भी ज़ोर दिया कि वैज्ञानिकों के नवाचार, हाइब्रिड किस्में और आधुनिक मशीनरी सीधे किसानों तक पहुँचाई जानी चाहिए, ताकि उत्पादकता में वास्तविक सुधार हो।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने बताया कि रेशम उत्पादन में कर्नाटक देश में अग्रणी राज्य है। उन्होंने कहा कि सरकार इस क्षेत्र को मजबूत करने के लिए बुनियादी ढाँचे और औद्योगिक विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

वैश्विक बाज़ार में भारत की बढ़ती माँग

मंत्री ने कहा कि चीन में रेशम उत्पादन घटने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भारतीय रेशम की माँग में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक कपड़ा बाज़ार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। सरकार की प्राथमिकताओं में रेशम उत्पादन से बुनाई तक की पूरी वैल्यू चेन को सुदृढ़ करना, भारत के कपड़ा बाज़ार को 300 अरब डॉलर तक विस्तारित करना और बुनकरों व श्रमिकों के लिए न्यूनतम आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है।

तकनीक और आधुनिकीकरण की भूमिका

कपड़ा मंत्रालय की संयुक्त सचिव (रेशम) पद्मिनी सिंगला ने बताया कि अधिक पैदावार देने वाले रेशम के कीड़ों की हाइब्रिड किस्में और आधुनिक मशीनरी लाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता जाँच और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए AI, GIS और मशीन लर्निंग तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है। सरकार वैश्विक निर्यात मानकों के अनुरूप उत्पादन सुनिश्चित करने, आयात घटाने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए उच्च-घनत्व उत्पादन पद्धतियों को प्राथमिकता दे रही है।

गौरतलब है कि सब्सिडी और गुणवत्ता सुधार योजनाओं की मदद से अधिकाधिक उद्यमी MSME फ्रेमवर्क के अंतर्गत पंजीकरण करा रहे हैं, जो क्षेत्र के संस्थागतकरण का संकेत है।

समारोह में अहम फ़ैसले

स्थापना दिवस कार्यक्रम में सिल्क बोर्ड ने कई संगठनों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए, 28 वैज्ञानिकों को नियुक्ति पत्र वितरित किए और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों व हितधारकों को पुरस्कृत किया। साथ ही क्षेत्र से संबंधित प्रकाशन और पत्रिकाएँ भी जारी की गईं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये नीतिगत घोषणाएँ ज़मीनी स्तर पर किसानों की आय और निर्यात आँकड़ों में कितनी तेज़ी से परिलक्षित होती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 42,000 मीट्रिक टन से 60,000 मीट्रिक टन के लक्ष्य तक पहुँचने के लिए जिस तकनीकी और संस्थागत ढाँचे की ज़रूरत है, क्या वह वास्तव में ज़मीन पर उतर रहा है। चीन की प्रतिस्पर्धी बढ़त केवल मात्रा में नहीं, बल्कि गुणवत्ता और प्रसंस्करण में भी है — और AI व GIS के उपयोग के दावे तब तक अधूरे हैं जब तक छोटे किसानों तक पहुँच सुनिश्चित नहीं होती। किसानों की आय ₹10-12 लाख तक पहुँचाने का लक्ष्य प्रशंसनीय है, पर इसे मापने का कोई सत्यापन-योग्य तंत्र अभी सामने नहीं आया है।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत 2028-29 तक दुनिया का सबसे बड़ा रेशम उत्पादक कैसे बनेगा?
सरकार शहतूत की पैदावार बढ़ाने, कोकून पालन के चक्रों में वृद्धि करने, हाइब्रिड किस्मों और आधुनिक मशीनरी को किसानों तक पहुँचाने और AI व मशीन लर्निंग तकनीक के उपयोग के ज़रिए उत्पादन को 60,000 मीट्रिक टन तक ले जाने की योजना बना रही है। वर्तमान में भारत का उत्पादन 42,000 मीट्रिक टन है।
सेंट्रल सिल्क बोर्ड का 77वाँ स्थापना दिवस कहाँ मनाया गया?
सेंट्रल सिल्क बोर्ड का 77वाँ स्थापना दिवस समारोह 20 सितंबर 2026 को बेंगलुरु में आयोजित हुआ। इसमें रेशम उत्पादों और तकनीकों की प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया गया।
रेशम किसानों की आय कितनी बढ़ाने का लक्ष्य है?
सरकार का लक्ष्य रेशम किसानों की सालाना आय ₹10-12 लाख तक पहुँचाना है। यह शहतूत की पैदावार बढ़ाने और कोकून पालन के चक्रों में वृद्धि के ज़रिए हासिल करने की योजना है।
रेशम उत्पादन में कर्नाटक की क्या भूमिका है?
MSME राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे के अनुसार, रेशम उत्पादन में कर्नाटक पूरे देश में अग्रणी राज्य है। राज्य में बुनियादी ढाँचे और औद्योगिक विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
भारतीय रेशम की वैश्विक माँग क्यों बढ़ रही है?
केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह के अनुसार, चीन में रेशम उत्पादन में गिरावट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भारतीय रेशम की माँग बढ़ रही है। सरकार इस अवसर का लाभ उठाने के लिए निर्यात मानकों को वैश्विक स्तर पर लाने की कोशिश कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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