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रेशम उत्पादन 2030-31 तक 60,000 मीट्रिक टन करने का लक्ष्य: वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह

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रेशम उत्पादन 2030-31 तक 60,000 मीट्रिक टन करने का लक्ष्य: वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह

सारांश

चीन का रेशम उत्पादन घट रहा है और भारत इस अंतर को भरने की तैयारी में है। 2014 के 26,000 मीट्रिक टन से 42,000 मीट्रिक टन तक की यात्रा के बाद, वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने 2030-31 तक 60,000 मीट्रिक टन और 2028-29 तक विश्व में पहले स्थान का लक्ष्य रखा है।

मुख्य बातें

केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने 20 सितंबर 2026 को बेंगलुरु में रेशम उत्पादन 2030-31 तक 60,000 मीट्रिक टन करने का लक्ष्य घोषित किया।
देश का रेशम उत्पादन 2014 के 26,000 मीट्रिक टन से बढ़कर अब 42,000 मीट्रिक टन हो चुका है।
सरकार का लक्ष्य 2028-29 तक भारत को वैश्विक रेशम उत्पादन में पहले स्थान पर लाना है।
रेशम किसानों की वार्षिक आय ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹12 लाख करने की योजना है।
देश के वस्त्र बाज़ार को 300 बिलियन डॉलर तक ले जाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल।
कर्नाटक देश के रेशम उत्पादन में अग्रणी; MSME पंजीकरण और अनुदान के ज़रिए उद्यमियों को सहयोग।

केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने रविवार, 20 सितंबर 2026 को बेंगलुरु के यूएएस-जीकेवीके सभागार में आयोजित केंद्रीय रेशम बोर्ड के 77वें स्थापना दिवस समारोह में घोषणा की कि केंद्र सरकार देश के रेशम उत्पादन को 2030-31 तक 60,000 मीट्रिक टन तक पहुँचाने के लक्ष्य के साथ इस क्षेत्र के व्यापक विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही, 2028-29 तक भारत को वैश्विक रेशम उत्पादन में पहले स्थान पर लाने का संकल्प भी व्यक्त किया गया।

उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि

मंत्री सिंह ने बताया कि देश का रेशम उत्पादन 2014 में 26,000 मीट्रिक टन था, जो अब बढ़कर 42,000 मीट्रिक टन हो गया है। यह वृद्धि एक दशक में लगभग 62 प्रतिशत की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस गति को बनाए रखते हुए अगले चरण में उत्पादन को 60,000 मीट्रिक टन तक ले जाना सरकार की प्राथमिकता है।

गौरतलब है कि यह लक्ष्य ऐसे समय में रखा गया है जब चीन का रेशम उत्पादन घट रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भारतीय रेशम की माँग में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण निर्यात अवसर बनाता है।

किसानों की आय दोगुनी करने की योजना

सिंह ने रेखांकित किया कि शहतूत के पत्तों की पैदावार बढ़ाकर और रेशम के कीड़ों के पालन-पोषण के चक्रों में वृद्धि करके रेशम उत्पादक किसानों की वार्षिक आय को ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹12 लाख तक पहुँचाने का लक्ष्य है। उन्होंने वैज्ञानिकों के नए आविष्कारों, संकर किस्मों और आधुनिक मशीनरी को सीधे किसानों तक पहुँचाने पर भी ज़ोर दिया।

इसके अतिरिक्त, मंत्री ने जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर 'सर्वश्रेष्ठ रेशम किसान' पुरस्कार प्रतियोगिताओं के आयोजन का आह्वान किया, ताकि रेशम उत्पादकों में प्रतिस्पर्धी भावना और उत्कृष्टता को प्रोत्साहित किया जा सके।

सरकार की व्यापक प्राथमिकताएँ

गिरिराज सिंह ने बताया कि सरकार रेशम उत्पादन से लेकर कताई और बुनाई तक की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को मज़बूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। देश के वस्त्र बाज़ार को 300 बिलियन डॉलर तक ले जाना और बुनकरों एवं श्रमिक वर्ग के लिए न्यूनतम आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना भी सरकार के एजेंडे में शामिल है।

कर्नाटक की अग्रणी भूमिका और एमएसएमई को बढ़ावा

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) एवं श्रम और रोज़गार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने इस अवसर पर कहा कि कर्नाटक देश के कुल रेशम उत्पादन में अग्रणी स्थान रखता है। उन्होंने बताया कि सरकार इस क्षेत्र को और सशक्त करने के लिए बुनियादी ढाँचे के विकास और औद्योगिक प्रसार पर विशेष ध्यान दे रही है।

करंदलाजे ने कहा कि आधुनिक तकनीकों और उच्च उत्पादन विधियों को अपनाकर वैश्विक निर्यात मानकों के अनुरूप रेशम उत्पादन को प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आएगी। बड़ी संख्या में उद्यमी MSME ढाँचे के तहत पंजीकरण करा रहे हैं और सरकार उन्हें अनुदान व गुणवत्ता सुधार योजनाओं के माध्यम से सहयोग दे रही है।

आगे की राह

स्थानीय उत्पादकों को उपयुक्त बाज़ार पहुँच प्रदान करना और रेशम उत्पादन व वस्त्र उद्योग में रोज़गार के नए अवसर सृजित करना सरकार का मूल उद्देश्य बताया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन से घटते वैश्विक आपूर्ति के बीच यह क्षेत्र भारत के कृषि-आधारित निर्यात को नई ऊँचाई दे सकता है — बशर्ते प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और किसानों तक सहायता की पहुँच समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित हो।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 से 42,000 मीट्रिक टन की वृद्धि वाकई उत्साहजनक है, लेकिन 2030-31 तक 60,000 मीट्रिक टन का लक्ष्य अगले चार वर्षों में लगभग 43 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि की माँग करता है — और यह तब जब किसानों तक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की गति ऐतिहासिक रूप से धीमी रही है। चीन के उत्पादन में गिरावट एक वास्तविक अवसर है, लेकिन वैश्विक निर्यात मानकों को पूरा करने के लिए गुणवत्ता नियंत्रण और प्रसंस्करण बुनियादी ढाँचे में समानांतर निवेश ज़रूरी होगा। किसान-आय लक्ष्य और पुरस्कार प्रतियोगिताएँ प्रेरणादायक हैं, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि जिला स्तर तक आधुनिक मशीनरी और संकर किस्में वास्तव में कितनी जल्दी पहुँचती हैं।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केंद्र सरकार का रेशम उत्पादन लक्ष्य क्या है?
केंद्र सरकार ने 2030-31 तक देश का रेशम उत्पादन 60,000 मीट्रिक टन तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा, 2028-29 तक भारत को वैश्विक रेशम उत्पादन में पहले स्थान पर लाने का संकल्प भी लिया गया है।
अभी भारत कितना रेशम उत्पादन करता है?
वर्तमान में भारत का रेशम उत्पादन 42,000 मीट्रिक टन है, जो 2014 में 26,000 मीट्रिक टन था। एक दशक में यह वृद्धि लगभग 62 प्रतिशत रही है।
रेशम किसानों की आय कितनी बढ़ाई जाएगी?
वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह के अनुसार, शहतूत की पैदावार बढ़ाकर और कीड़ा-पालन के चक्र बढ़ाकर किसानों की वार्षिक आय ₹10 लाख से ₹12 लाख तक करने की योजना है।
कर्नाटक की रेशम उत्पादन में क्या भूमिका है?
कर्नाटक देश के कुल रेशम उत्पादन में अग्रणी स्थान रखता है। MSME और श्रम राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने बताया कि राज्य में बुनियादी ढाँचे के विकास और MSME पंजीकरण के ज़रिए इस क्षेत्र को और मज़बूत किया जा रहा है।
भारतीय रेशम के लिए अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में क्या अवसर हैं?
चीन का रेशम उत्पादन घट रहा है, जिससे वैश्विक बाज़ार में भारतीय रेशम की माँग बढ़ रही है। सरकार आधुनिक तकनीकों और वैश्विक निर्यात मानकों के अनुरूप उत्पादन को प्रोत्साहित कर आयात निर्भरता कम करने और निर्यात बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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