रेशम उत्पादन 2030-31 तक 60,000 मीट्रिक टन करने का लक्ष्य: वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने रविवार, 20 सितंबर 2026 को बेंगलुरु के यूएएस-जीकेवीके सभागार में आयोजित केंद्रीय रेशम बोर्ड के 77वें स्थापना दिवस समारोह में घोषणा की कि केंद्र सरकार देश के रेशम उत्पादन को 2030-31 तक 60,000 मीट्रिक टन तक पहुँचाने के लक्ष्य के साथ इस क्षेत्र के व्यापक विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही, 2028-29 तक भारत को वैश्विक रेशम उत्पादन में पहले स्थान पर लाने का संकल्प भी व्यक्त किया गया।
उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि
मंत्री सिंह ने बताया कि देश का रेशम उत्पादन 2014 में 26,000 मीट्रिक टन था, जो अब बढ़कर 42,000 मीट्रिक टन हो गया है। यह वृद्धि एक दशक में लगभग 62 प्रतिशत की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस गति को बनाए रखते हुए अगले चरण में उत्पादन को 60,000 मीट्रिक टन तक ले जाना सरकार की प्राथमिकता है।
गौरतलब है कि यह लक्ष्य ऐसे समय में रखा गया है जब चीन का रेशम उत्पादन घट रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भारतीय रेशम की माँग में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण निर्यात अवसर बनाता है।
किसानों की आय दोगुनी करने की योजना
सिंह ने रेखांकित किया कि शहतूत के पत्तों की पैदावार बढ़ाकर और रेशम के कीड़ों के पालन-पोषण के चक्रों में वृद्धि करके रेशम उत्पादक किसानों की वार्षिक आय को ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹12 लाख तक पहुँचाने का लक्ष्य है। उन्होंने वैज्ञानिकों के नए आविष्कारों, संकर किस्मों और आधुनिक मशीनरी को सीधे किसानों तक पहुँचाने पर भी ज़ोर दिया।
इसके अतिरिक्त, मंत्री ने जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर 'सर्वश्रेष्ठ रेशम किसान' पुरस्कार प्रतियोगिताओं के आयोजन का आह्वान किया, ताकि रेशम उत्पादकों में प्रतिस्पर्धी भावना और उत्कृष्टता को प्रोत्साहित किया जा सके।
सरकार की व्यापक प्राथमिकताएँ
गिरिराज सिंह ने बताया कि सरकार रेशम उत्पादन से लेकर कताई और बुनाई तक की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को मज़बूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। देश के वस्त्र बाज़ार को 300 बिलियन डॉलर तक ले जाना और बुनकरों एवं श्रमिक वर्ग के लिए न्यूनतम आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना भी सरकार के एजेंडे में शामिल है।
कर्नाटक की अग्रणी भूमिका और एमएसएमई को बढ़ावा
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) एवं श्रम और रोज़गार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने इस अवसर पर कहा कि कर्नाटक देश के कुल रेशम उत्पादन में अग्रणी स्थान रखता है। उन्होंने बताया कि सरकार इस क्षेत्र को और सशक्त करने के लिए बुनियादी ढाँचे के विकास और औद्योगिक प्रसार पर विशेष ध्यान दे रही है।
करंदलाजे ने कहा कि आधुनिक तकनीकों और उच्च उत्पादन विधियों को अपनाकर वैश्विक निर्यात मानकों के अनुरूप रेशम उत्पादन को प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आएगी। बड़ी संख्या में उद्यमी MSME ढाँचे के तहत पंजीकरण करा रहे हैं और सरकार उन्हें अनुदान व गुणवत्ता सुधार योजनाओं के माध्यम से सहयोग दे रही है।
आगे की राह
स्थानीय उत्पादकों को उपयुक्त बाज़ार पहुँच प्रदान करना और रेशम उत्पादन व वस्त्र उद्योग में रोज़गार के नए अवसर सृजित करना सरकार का मूल उद्देश्य बताया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन से घटते वैश्विक आपूर्ति के बीच यह क्षेत्र भारत के कृषि-आधारित निर्यात को नई ऊँचाई दे सकता है — बशर्ते प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और किसानों तक सहायता की पहुँच समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित हो।