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मिनरल रूल्स 2022: ₹4.30 लाख की पेनल्टी के खिलाफ भोपाल में ट्रांसपोर्ट यूनियन का धरना, चक्का जाम की चेतावनी

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मिनरल रूल्स 2022: ₹4.30 लाख की पेनल्टी के खिलाफ भोपाल में ट्रांसपोर्ट यूनियन का धरना, चक्का जाम की चेतावनी

सारांश

भोपाल में ट्रांसपोर्ट यूनियन मिनरल रूल्स 2022 की ₹4.30 लाख की पेनल्टी के खिलाफ धरने पर बैठी है। वकील शादाब मोहम्मद का तर्क है — चालान माइन का, बोझ ट्रांसपोर्टर का; यह मनमाना नियम हटाया जाए। माँग न मानी तो चक्का जाम।

मुख्य बातें

ट्रांसपोर्ट यूनियन ने 20 सितंबर 2026 को भोपाल में मिनरल रूल्स 2022 के तहत लगाई जा रही ₹4.30 लाख की पेनल्टी के विरोध में शांतिपूर्ण धरना दिया।
वकील शादाब मोहम्मद ने कहा कि चालान माइन के नाम पर कटता है, लेकिन भरना ट्रक मालिक को ही पड़ता है।
2022 से पहले ऐसी एकमुश्त पेनल्टी नहीं थी; पहले रॉयल्टी के रूप में 15 से 30 गुना तक जुर्माना लगता था।
कई अन्य राज्यों में इस तरह की निश्चित पेनल्टी का प्रावधान नहीं है।
यूनियन अध्यक्ष पवन सिंह ने चेतावनी दी — माँग न मानी तो चक्का जाम किया जाएगा।

भोपाल में ट्रांसपोर्ट अवेयरनेस सपोर्ट कमेटी के वकील शादाब मोहम्मद और ट्रांसपोर्ट यूनियन के अध्यक्ष पवन सिंह ने 20 सितंबर 2026 को मिनरल रूल्स 2022 के तहत डंपर मालिकों पर लगाई जा रही ₹4.30 लाख की पर्यावरणीय पेनल्टी के विरोध में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया। यूनियन ने प्रशासन से यह जुर्माना तत्काल हटाने की माँग की और चेतावनी दी कि माँग न मानी गई तो चक्का जाम किया जाएगा।

विवाद की जड़: कौन भरे चालान?

वकील शादाब मोहम्मद ने बताया कि खनन पट्टाधारक (माइन लीज मालिक) स्वयं परिवहन नहीं चलाते — वे इसे आउटसोर्स करते हैं। जब ट्रक मालिक खनिज सामग्री लेकर निर्धारित स्थान पर डंप करने जाते हैं, तो पुलिस रास्ते में रोककर चालान काट देती है।

उन्होंने कहा, 'चालान माइंस के नाम पर होता है, लेकिन भरना ट्रक मालिक को ही पड़ता है क्योंकि खनिज माल तो माइन का है, ट्रक उनका नहीं।' माइन मालिक चालान भरने नहीं आते, जबकि ट्रक मालिक की पूरी आजीविका उसी वाहन पर निर्भर है।

2022 से पहले नहीं था ऐसा जुर्माना

शादाब मोहम्मद के अनुसार, 2022 से पहले इस तरह की कोई निश्चित पेनल्टी नहीं थी — पहले रॉयल्टी के रूप में 15 गुना या 30 गुना तक जुर्माना लगता था जो उल्लंघन की मात्रा पर आधारित होता था। उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों में आज भी इस प्रकार की एकमुश्त पेनल्टी का प्रावधान नहीं है, इसलिए मध्य प्रदेश में ₹4 लाख से अधिक का सीधा जुर्माना मनमाना और असंगत है।

यह ऐसे समय में आया है जब छोटे ट्रांसपोर्टर पहले से ही ईंधन की ऊँची कीमतों और सड़क कर के बोझ से दबे हैं। गौरतलब है कि खनन परिवहन क्षेत्र में बड़ी संख्या में छोटे और मध्यम वाहन मालिक शामिल हैं जिनके पास कानूनी लड़ाई लड़ने के साधन सीमित हैं।

कानूनी रास्ते की सीमाएँ

वकील शादाब मोहम्मद ने स्वीकार किया कि इस नियम में कोई 'इंटेलिजिबल डिफरेंशिया' (तर्कसंगत वर्गीकरण) नहीं है जिसके आधार पर उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सके। उनका कहना है कि इस परिस्थिति में सरकार से सीधे बातचीत ही एकमात्र व्यावहारिक विकल्प है।

उन्होंने कहा, 'हमारी माँग है कि इन पेनल्टी को हटाया जाए या कम किया जाए, संबंधित समिति से बात की जाए और ट्रांसपोर्टरों की परेशानियाँ समझने के बाद ही कोई उचित दर तय की जाए।'

यूनियन की माँगें और चेतावनी

ट्रांसपोर्ट यूनियन के अध्यक्ष पवन सिंह ने प्रशासन से साफ कहा कि ₹4.30 लाख की अनावश्यक पेनल्टी तत्काल वापस ली जाए। उन्होंने बताया कि इसी माँग को लेकर यूनियन के सदस्य शांतिपूर्वक धरने पर बैठे हैं।

पवन सिंह ने आगाह किया कि यदि माँग नहीं मानी गई तो आने वाले समय में चक्का जाम किया जाएगा, जिससे खनन से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखला पर सीधा असर पड़ सकता है।

आगे क्या होगा

अभी तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि बातचीत जल्द नहीं हुई तो चक्का जाम की स्थिति में मध्य प्रदेश में खनिज परिवहन बाधित हो सकता है, जिसका असर निर्माण और अवसंरचना परियोजनाओं पर भी पड़ सकता है। यूनियन के अगले कदम पर सभी की नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जुर्माना ट्रांसपोर्टर भरे। ₹4.30 लाख की एकमुश्त पेनल्टी छोटे वाहन मालिकों के लिए विशेष रूप से कठोर है, क्योंकि उनकी पूरी आजीविका एक ट्रक पर टिकी होती है। गौरतलब है कि यही वर्ग न तो खनन लाइसेंस धारक है और न ही नीति-निर्माण में उसकी आवाज़ पर्याप्त रूप से सुनी जाती है। सरकार को चाहिए कि वह उल्लंघन की जिम्मेदारी और दंड दोनों को सही पक्ष — यानी माइन पट्टाधारक — पर केंद्रित करे, अन्यथा यह पेनल्टी ढाँचा मध्यस्थ परिवहनकर्ताओं को ही दंडित करता रहेगा।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मिनरल रूल्स 2022 के तहत ट्रांसपोर्टरों पर क्या पेनल्टी लगाई जा रही है?
मिनरल रूल्स 2022 के तहत डंपर/ट्रक मालिकों पर ₹4.30 लाख की एकमुश्त पर्यावरणीय पेनल्टी लगाई जा रही है। यह जुर्माना तब कटता है जब पुलिस खनिज सामग्री ले जा रहे ट्रक को रोककर चालान करती है।
ट्रांसपोर्ट यूनियन की मुख्य माँग क्या है?
ट्रांसपोर्ट यूनियन के अध्यक्ष पवन सिंह और वकील शादाब मोहम्मद की माँग है कि ₹4.30 लाख की पेनल्टी को या तो पूरी तरह हटाया जाए या कम किया जाए। साथ ही, नियम बनाने से पहले ट्रांसपोर्टरों से परामर्श किया जाए।
2022 से पहले खनन परिवहन पर कैसे जुर्माना लगता था?
2022 से पहले रॉयल्टी के रूप में उल्लंघन की मात्रा के आधार पर 15 गुना से 30 गुना तक पेनल्टी लगती थी, जो अपेक्षाकृत अनुपातिक थी। एकमुश्त ₹4 लाख-से-अधिक का निश्चित जुर्माना 2022 के नए नियमों से आया।
चालान माइन मालिक का, भरे ट्रक मालिक — यह क्यों होता है?
खनन पट्टाधारक परिवहन को आउटसोर्स करते हैं। जब ट्रक रोका जाता है तो चालान माइन के नाम पर कटता है, लेकिन माइन मालिक भरने नहीं आते। ट्रक मालिक की आजीविका उसी वाहन से जुड़ी होने के कारण अंततः उसे ही जुर्माना चुकाना पड़ता है।
अगर प्रशासन माँग नहीं माना तो यूनियन क्या करेगी?
यूनियन अध्यक्ष पवन सिंह ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि माँग न मानने पर चक्का जाम किया जाएगा। इससे मध्य प्रदेश में खनिज परिवहन बाधित हो सकता है और निर्माण व अवसंरचना परियोजनाओं पर असर पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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