13 जुलाई 2026
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सस्टेनेबल फाइबर में भारत की बड़ी छलांग: गिरिराज सिंह बोले — 7.8 मिलियन टन वेस्ट से बनेगा नया कपड़ा उद्योग

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सस्टेनेबल फाइबर में भारत की बड़ी छलांग: गिरिराज सिंह बोले — 7.8 मिलियन टन वेस्ट से बनेगा नया कपड़ा उद्योग

सारांश

गिरिराज सिंह का संदेश साफ है — भारत का कपड़ा क्षेत्र अब सिर्फ उत्पादन नहीं, सस्टेनेबिलिटी की दौड़ में है। 7.8 मिलियन टन वेस्ट, दोगुनी हुई प्रति व्यक्ति खपत और भारत टैक्स का वैश्विक विस्तार — तीनों मिलकर एक बड़े बदलाव की तस्वीर बना रहे हैं।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने 13 जुलाई को कहा कि भारत में 78 लाख टन (7.8 मिलियन टन) टेक्सटाइल वेस्ट है, जिसे वे कम आँकड़ा मानते हैं।
प्रति व्यक्ति कपड़ा उपभोग 2014 के 25 मीटर से बढ़कर अब 50 मीटर हो गया है।
सरकार कपड़ा कामगारों की न्यूनतम पारिश्रमिक ₹15,000 से ₹20,000 प्रतिमाह निर्धारित करने की योजना पर काम कर रही है।
भारत टैक्स प्रदर्शनी, जिसकी शुरुआत 2024 में हुई थी, अब जर्मनी जैसे देशों की तर्ज़ पर अंतरराष्ट्रीय विस्तार पाने जा रही है।
मंत्री ने सस्टेनेबल फैब्रिक को जलवायु परिवर्तन से जोड़ते हुए इसे उद्योग की अनिवार्य ज़रूरत बताया।

केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने सोमवार, 13 जुलाई को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वैश्विक स्तर पर सस्टेनेबल फाइबर की दिशा में तेज़ी से काम हो रहा है और भारत इस बदलाव में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि भारत में अभी 78 लाख टन (7.8 मिलियन टन) टेक्सटाइल वेस्ट का अनुमान है, जिसे वे वास्तविक आँकड़े से कम मानते हैं।

मुख्य घटनाक्रम

मंत्री ने रेखांकित किया कि 2014 में जहाँ भारत में प्रति व्यक्ति 25 मीटर कपड़े का उपयोग होता था, वहीं आज यह आँकड़ा बढ़कर 50 मीटर प्रति व्यक्ति हो गया है — यानी एक दशक में उपभोग दोगुना हो चुका है। गिरिराज सिंह के अनुसार, इसी बढ़ती खपत के साथ वेस्ट की मात्रा भी बढ़ी है और उद्यमी अब 7.8 मिलियन टन वेस्ट के इर्द-गिर्द व्यापारिक अवसर तलाश रहे हैं।

कामगारों की न्यूनतम मज़दूरी पर ज़ोर

केंद्रीय मंत्री ने श्रमिक कल्याण पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि सरकार कपड़ा क्षेत्र के कामगारों की न्यूनतम पारिश्रमिक ₹15,000 से ₹20,000 प्रतिमाह निर्धारित करने की दिशा में काम कर रही है। उनके शब्दों में, 'आप भी कमाओ और दूसरों को भी कमाने का मौका दो।' उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई है और इसे जल्द ही ज़मीन पर उतारा जाएगा।

भारत टैक्स: वैश्विक मंच पर नई पहचान

गिरिराज सिंह ने भारत टैक्स प्रदर्शनी का भी उल्लेख किया, जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 में की थी। उन्होंने कहा कि महज दो वर्षों में यह आयोजन टेक्सटाइल जगत के बेहतरीन वैश्विक इवेंट में तब्दील हो चुका है। मंत्री के अनुसार, भारत टैक्स अब जर्मनी जैसे देशों की तर्ज़ पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार पाने जा रहा है और विदेशी खरीदारों की भारतीय उत्पादों पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है।

जलवायु संकट और सस्टेनेबिलिटी का संदर्भ

मंत्री ने यह भी कहा कि बैंकॉक, अमेरिका और भारत जैसे क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा की घटनाएँ यह संकेत देती हैं कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए टेक्सटाइल उद्योग में सस्टेनेबल विकल्प अपनाना अब वैकल्पिक नहीं, बल्कि अनिवार्य हो गया है। उन्होंने सभी उद्यमियों और आम नागरिकों से आग्रह किया कि वे दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में आकर देखें कि सस्टेनेबल फैब्रिक किस तरह जीवनशैली को बदल सकता है।

आगे की राह

कपड़ा मंत्रालय की योजना है कि भारतीय टेक्सटाइल उत्पादों को वैश्विक बाज़ार में एक नई और विशिष्ट पहचान दिलाई जाए। वेस्ट-टू-फाइबर मॉडल, न्यूनतम मज़दूरी सुधार और भारत टैक्स के अंतरराष्ट्रीय विस्तार — ये तीनों मिलकर भारत के कपड़ा क्षेत्र को अगले दशक की दिशा देंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन कुछ अहम सवाल अनुत्तरित हैं। कामगारों की ₹15,000–₹20,000 की न्यूनतम मज़दूरी की 'रूपरेखा' कब और किस कानूनी ढाँचे के तहत लागू होगी, यह स्पष्ट नहीं किया गया। वेस्ट-टू-फाइबर मॉडल की सफलता के लिए संग्रह, छँटाई और प्रसंस्करण का बुनियादी ढाँचा चाहिए, जिसकी वर्तमान स्थिति पर कोई ठोस आँकड़ा सामने नहीं आया। भारत टैक्स का वैश्विक विस्तार उत्साहजनक है, परंतु असली कसौटी निर्यात के वास्तविक आँकड़ों में दिखेगी — न केवल प्रदर्शनी की भव्यता में।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गिरिराज सिंह ने सस्टेनेबल फाइबर पर क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने 13 जुलाई को कहा कि पूरी दुनिया में सस्टेनेबल फाइबर की दिशा में काम हो रहा है और भारत में 7.8 मिलियन टन टेक्सटाइल वेस्ट को इस उद्योग का आधार बनाया जा सकता है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन को इस बदलाव की प्रमुख वजह बताया।
भारत में टेक्सटाइल उपभोग कितना बढ़ा है?
मंत्री के अनुसार, 2014 में भारत में प्रति व्यक्ति 25 मीटर कपड़े का उपयोग होता था, जो अब बढ़कर 50 मीटर हो गया है — यानी एक दशक में उपभोग दोगुना हो गया है।
कपड़ा कामगारों की न्यूनतम मज़दूरी क्या होगी?
गिरिराज सिंह ने बताया कि सरकार कपड़ा क्षेत्र के कामगारों की न्यूनतम पारिश्रमिक ₹15,000 से ₹20,000 प्रतिमाह निर्धारित करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इसकी पूरी रूपरेखा तैयार है और इसे जल्द लागू किया जाएगा।
भारत टैक्स प्रदर्शनी क्या है और इसका विस्तार कहाँ होगा?
भारत टैक्स एक अंतरराष्ट्रीय टेक्सटाइल प्रदर्शनी है, जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 में की थी। मंत्री के अनुसार, यह आयोजन अब जर्मनी जैसे देशों की तर्ज़ पर अन्य देशों में भी विस्तार पाने जा रहा है।
सस्टेनेबल टेक्सटाइल का भारत के लिए क्या महत्व है?
बढ़ती खपत और जलवायु परिवर्तन के दबाव के बीच सस्टेनेबल टेक्सटाइल भारत के लिए आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों दृष्टियों से अहम है। 7.8 मिलियन टन वेस्ट को पुनर्चक्रित कर नया फाइबर बनाना न केवल प्रदूषण घटाएगा, बल्कि नए रोज़गार और निर्यात के अवसर भी खोलेगा।
राष्ट्र प्रेस
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