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टेक्सटाइल निर्यात 2030: गिरिराज सिंह बोले — जिला व राज्य स्तर की योजनाएँ अब ज़मीन पर उतारने का वक्त

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टेक्सटाइल निर्यात 2030: गिरिराज सिंह बोले — जिला व राज्य स्तर की योजनाएँ अब ज़मीन पर उतारने का वक्त

सारांश

टेक्सटाइल समिट 2026 के समापन पर वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने साफ कहा — योजनाएँ बनाने का दौर खत्म, अब ज़मीन पर उतारने का वक्त है। 2030 तक 100 अरब डॉलर निर्यात के लक्ष्य के साथ FTA, वैल्यू एडिशन और सस्टेनेबिलिटी पर दांव लगाया जा रहा है।

मुख्य बातें

केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने 24 जून 2026 को टेक्सटाइल समिट 2026 के समापन सत्र में जिला व राज्य स्तर की टेक्सटाइल योजनाओं को तत्काल लागू करने का आह्वान किया।
भारत का लक्ष्य 2030 तक 100 अरब डॉलर का टेक्सटाइल निर्यात हासिल करना है।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने जिला स्तर पर FTA जागरूकता की कमी को निर्यात विस्तार में बड़ी बाधा बताया।
टेक्सटाइल सचिव नीलम शमी राव ने घोषणा की कि समिट के सुझावों को एक 'नेशनल टेक्सटाइल एक्सपोर्ट रोडमैप' में शामिल किया जाएगा।
समिट में राज्य सरकारों, उद्योग संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए; वैल्यू एडिशन, इनोवेशन और सस्टेनेबिलिटी पर विशेष जोर दिया गया।

केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने 24 जून 2026 को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि जिला और राज्य स्तर की टेक्सटाइल योजनाओं को अब केवल कागज़ों पर नहीं, बल्कि सक्रिय सोच के साथ ज़मीन पर उतारने का समय आ गया है। टेक्सटाइल समिट 2026 के समापन सत्र में उन्होंने 2030 तक 100 अरब डॉलर के टेक्सटाइल निर्यात लक्ष्य को हासिल करने के लिए वैल्यू एडिशन, सस्टेनेबिलिटी और मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के प्रभावी उपयोग को रणनीति की धुरी बताया।

समिट का स्वरूप और भागीदारी

वस्त्र मंत्रालय द्वारा 23 और 24 जून 2026 को आयोजित इस दो-दिवसीय समिट में राज्य सरकारों, उद्योग संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधि एक मंच पर आए। चर्चा का केंद्र था — टेक्सटाइल क्षेत्र का दीर्घकालिक विकास रोडमैप और निर्यात विस्तार की व्यावहारिक रणनीतियाँ।

सिंह ने समापन सत्र में कहा कि सेक्टर को सही प्रोडक्ट-मार्केट मिक्स पर ध्यान केंद्रित करना होगा और साथ ही पर्यावरणीय व सस्टेनेबिलिटी मानकों का पालन भी सुनिश्चित करना होगा, क्योंकि वैश्विक खरीदार अब इन मानकों को अनिवार्य शर्त मानते हैं।

FTA का लाभ और जिला स्तर पर जागरूकता

एक विशेष सत्र में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने टेक्सटाइल उद्योग से आग्रह किया कि हाल ही में संपन्न हुए मुक्त व्यापार समझौतों से मिलने वाले अवसरों का तत्काल और अधिकतम लाभ उठाया जाए। उन्होंने जिला स्तर पर FTA संबंधी जानकारी की कमी को एक बड़ी बाधा बताया और इसे दूर करने की ज़रूरत पर बल दिया, ताकि निर्यातक वास्तविक लाभार्थी बन सकें।

गौरतलब है कि भारत ने हाल के वर्षों में कई महत्वपूर्ण FTA संपन्न किए हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर उनका लाभ अभी तक सीमित रहा है — विशेषकर छोटे और मझोले निर्यातकों के बीच।

नेशनल टेक्सटाइल एक्सपोर्ट रोडमैप

टेक्सटाइल सचिव नीलम शमी राव ने बताया कि समिट में हुई विचार-विमर्श को ठोस कार्ययोजना में बदला जाएगा। राज्यों, जिलों, उद्योग प्रतिनिधियों और निर्यात संवर्धन परिषदों से प्राप्त सुझावों को एक व्यापक 'नेशनल टेक्सटाइल एक्सपोर्ट रोडमैप' में समाहित किया जाएगा।

राव के अनुसार, यह क्षेत्र अब उच्च मूल्य वाले सेगमेंट, इनोवेशन, गुणवत्ता और सस्टेनेबिलिटी को प्राथमिकता देगा। साथ ही संस्थागत तालमेल को मज़बूत कर वैश्विक टेक्सटाइल व्यापार में भारत की उपस्थिति को और सुदृढ़ किया जाएगा।

आम जनता और उद्योग पर असर

टेक्सटाइल क्षेत्र भारत में कृषि के बाद सबसे अधिक रोज़गार देने वाला उद्योग है। जिला स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से बुनकरों, कारीगरों और छोटे उद्यमियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि FTA का लाभ सही तरीके से ज़मीन तक पहुँचे, तो ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोज़गार के नए अवसर खुल सकते हैं।

आगे की राह

समिट के निष्कर्षों के आधार पर तैयार होने वाला नेशनल टेक्सटाइल एक्सपोर्ट रोडमैप आने वाले महीनों में सार्वजनिक किए जाने की उम्मीद है। उद्योग जगत की नज़र अब इस बात पर है कि क्या यह रोडमैप जिला स्तर तक पहुँचने वाली ठोस क्रियान्वयन योजना के साथ आएगा, या यह एक और नीतिगत दस्तावेज़ बनकर रह जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

और हर बार इसके बाद क्रियान्वयन की असली परीक्षा आती है। टेक्सटाइल क्षेत्र में 2030 तक 100 अरब डॉलर का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, लेकिन यह ध्यान देने वाली बात है कि भारत की वैश्विक टेक्सटाइल निर्यात में हिस्सेदारी वर्षों से लगभग 4-5% पर स्थिर है, जबकि बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देश तेज़ी से आगे बढ़े हैं। जिला स्तर पर FTA जागरूकता की कमी को समस्या तो माना गया है, लेकिन इसे दूर करने की ठोस समयसीमा और तंत्र का अभाव चिंताजनक है। रोडमैप की असली कसौटी यह होगी कि क्या वह बुनकरों और छोटे निर्यातकों तक पहुँचता है — या केवल बड़े उद्योग घरानों के लिए नीतिगत सुविधा बनकर रह जाता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टेक्सटाइल समिट 2026 क्या था और इसमें क्या हुआ?
टेक्सटाइल समिट 2026 वस्त्र मंत्रालय द्वारा 23 और 24 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित दो-दिवसीय सम्मेलन था, जिसमें राज्य सरकारों, उद्योग संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें 2030 तक 100 अरब डॉलर के टेक्सटाइल निर्यात लक्ष्य की रणनीतियों पर चर्चा हुई।
गिरिराज सिंह ने टेक्सटाइल क्षेत्र के लिए क्या संदेश दिया?
केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि जिला और राज्य स्तर की टेक्सटाइल योजनाओं को सक्रिय सोच के साथ ज़मीन पर उतारने का समय आ गया है। उन्होंने वैल्यू एडिशन, सस्टेनेबिलिटी, विशेष उत्पादों और FTA के प्रभावी उपयोग को निर्यात लक्ष्य की कुंजी बताया।
नेशनल टेक्सटाइल एक्सपोर्ट रोडमैप क्या होगा?
यह एक व्यापक नीति दस्तावेज़ होगा जिसमें राज्यों, जिलों, उद्योग प्रतिनिधियों और निर्यात संवर्धन परिषदों के सुझावों को शामिल किया जाएगा। टेक्सटाइल सचिव नीलम शमी राव के अनुसार, यह रोडमैप उच्च मूल्य सेगमेंट, इनोवेशन, गुणवत्ता और सस्टेनेबिलिटी को प्राथमिकता देगा।
FTA का टेक्सटाइल निर्यात से क्या संबंध है?
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि हाल ही में संपन्न मुक्त व्यापार समझौते (FTA) भारतीय टेक्सटाइल निर्यातकों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दे सकते हैं। हालाँकि जिला स्तर पर FTA संबंधी जानकारी की कमी एक बड़ी बाधा है, जिसे दूर किए बिना छोटे निर्यातक इनका लाभ नहीं उठा सकते।
भारत का 2030 तक 100 अरब डॉलर टेक्सटाइल निर्यात लक्ष्य कितना व्यावहारिक है?
यह लक्ष्य महत्वाकांक्षी है और इसे हासिल करने के लिए वैल्यू एडिशन, FTA का लाभ और जिला स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन की ज़रूरत होगी। आलोचकों का कहना है कि वैश्विक टेक्सटाइल बाज़ार में बांग्लादेश और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले भारत को ठोस और समयबद्ध कदम उठाने होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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