22 सितंबर 2026
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महाराष्ट्र सूखा संकट: कांग्रेस ने की केंद्र से तत्काल मदद की माँग, 'जानवरों को भी नहीं मिलेगा पानी'

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महाराष्ट्र सूखा संकट: कांग्रेस ने की केंद्र से तत्काल मदद की माँग, 'जानवरों को भी नहीं मिलेगा पानी'

सारांश

महाराष्ट्र में सूखे का संकट इस बार सिर्फ फसलों तक सीमित नहीं — AICC सचिव रामकृष्ण ओझा की चेतावनी है कि जल्द पशुओं के लिए भी पानी नहीं बचेगा। कांग्रेस सांसद PM मोदी से मिलने की तैयारी में हैं, और महाराष्ट्र सरकार के मंत्री ने भी सकारात्मक संकेत दिया है।

मुख्य बातें

AICC राष्ट्रीय सचिव रामकृष्ण ओझा ने 22 सितंबर 2026 को नागपुर में महाराष्ट्र के सूखे पर गंभीर चिंता जताई।
ओझा ने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में पशुओं के लिए भी पेयजल उपलब्ध नहीं रहेगा और चारे की भारी कमी है।
कांग्रेस सांसद जल्द प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर किसानों के लिए तत्काल केंद्रीय सहायता की माँग करेंगे।
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि PM मोदी से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने की पूरी उम्मीद है।
मनमोहन सिंह के कार्यकाल की ऋण माफी का उल्लेख करते हुए नई बड़ी ऋण माफी की माँग दोहराई।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) के अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के राष्ट्रीय सचिव रामकृष्ण ओझा ने 22 सितंबर 2026 को नागपुर में महाराष्ट्र में गहराते सूखे संकट पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से किसानों के लिए तत्काल आर्थिक सहायता की माँग की। ओझा ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में पशुओं के लिए भी पेयजल उपलब्ध नहीं रह सकता। यह स्थिति उस वक्त और चिंताजनक हो जाती है जब महाराष्ट्र के कई जिलों में खरीफ फसलें पहले से ही संकट में हैं।

सूखे की स्थिति और किसानों पर असर

ओझा ने कहा, 'अभी महाराष्ट्र में सूखे जैसे हालात हैं और सूखे की वजह से स्थिति बहुत खराब हो गई है। चारे की कमी है, किसान अपनी फसलों को लेकर बहुत परेशान हैं। मुझे लगता है कि आने वाले दिनों में जानवरों को भी पीने के लिए पानी नहीं मिलेगा। यह एक बहुत गंभीर समस्या है।' उनके अनुसार, फसलों की बर्बादी और चारे की कमी मिलकर ग्रामीण महाराष्ट्र के सामने दोहरी मार बन चुकी हैं।

किसान ऋण माफी और आत्महत्या का मुद्दा

ओझा ने यह भी याद दिलाया कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में किसानों की ऋण माफी की गई थी, लेकिन उसके बाद कोई बड़ी राहत नहीं मिली। उन्होंने कहा कि पुराने कर्ज के बोझ तले दबे किसान आज भी आत्महत्या करने को मजबूर हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह तत्काल प्रभाव से बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता जारी करे।

कांग्रेस सांसदों की PM मोदी से मुलाकात की योजना

ओझा ने बताया कि महाराष्ट्र में कांग्रेस के सर्वाधिक सांसद हैं और वे सभी किसानों की समस्याओं को लेकर चिंतित हैं। शीघ्र ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर इस संकट की वास्तविकता से अवगत कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह लाखों लोगों का सवाल है और इसमें किसी भी तरह का राजनीतिकरण उचित नहीं है। राज्य सरकार को गाँव-गाँव तक पहुँचकर किसानों को आर्थिक मदद देनी चाहिए। ओझा ने यह भी सुझाया कि जन्मदिन के उपलक्ष्य में दीप प्रज्ज्वलन पर खर्च होने वाली राशि के बजाय वे संसाधन सीधे किसानों की सहायता पर लगाए जाएँ।

महाराष्ट्र सरकार की प्रतिक्रिया

महाराष्ट्र सरकार के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कांग्रेस सांसदों की प्रधानमंत्री से मुलाकात की योजना पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री से मिलना चाहिए और उन्हें हमारी स्थिति की असलियत बतानी चाहिए। असलियत बताने में कोई दिक्कत नहीं है और केंद्र सरकार मदद भी करती है, क्योंकि केंद्र सरकार ने सूखे के समय पहले भी मदद दी है। इसलिए निश्चित रूप से, जब सभी सांसद उनसे मिलेंगे, तो प्रधानमंत्री मोदी से सकारात्मक प्रतिक्रिया जरूर मिलेगी।' यह बयान महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच इस मुद्दे पर दुर्लभ सहमति का संकेत देता है।

आगे क्या होगा

कांग्रेस सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही प्रधानमंत्री मोदी से मिलकर महाराष्ट्र की सूखे की स्थिति और किसान राहत के लिए केंद्रीय सहायता की माँग रखेगा। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में किसान आत्महत्याओं का सिलसिला वर्षों से जारी है और प्रत्येक सूखे के मौसम में यह संकट और गहरा जाता है। केंद्र और राज्य सरकार दोनों पर अब राहत उपायों को जमीन पर उतारने का दबाव बढ़ता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और हर बार राहत के वादे ज़मीन पर अधूरे ही रहे हैं। कांग्रेस की माँग राजनीतिक रूप से स्वाभाविक है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इस बार केंद्र और राज्य दोनों सरकारें राहत राशि को सत्यापन-योग्य वितरण तंत्र से जोड़ेंगी। बावनकुले का सकारात्मक बयान दुर्लभ द्विपक्षीय सहमति का संकेत है, परंतु 'सकारात्मक प्रतिक्रिया की उम्मीद' और 'धरातल पर राहत' के बीच की खाई पहले भी चौड़ी रही है। जब तक ऋण माफी और आपदा राहत के लिए स्पष्ट समयसीमा और जवाबदेही तय नहीं होती, यह बहस अगले सूखे तक स्थगित होने का जोखिम उठाती है।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में सूखे की मौजूदा स्थिति क्या है?
कांग्रेस नेता रामकृष्ण ओझा के अनुसार, महाराष्ट्र में इस समय सूखे जैसे हालात हैं — चारे की गंभीर कमी है, किसान फसलों को लेकर परेशान हैं और आने वाले दिनों में पशुओं के लिए भी पेयजल का संकट गहरा सकता है। यह स्थिति विशेष रूप से ग्रामीण और कृषि-निर्भर इलाकों को प्रभावित कर रही है।
कांग्रेस ने केंद्र सरकार से क्या माँग की है?
AICC राष्ट्रीय सचिव रामकृष्ण ओझा ने केंद्र सरकार से तत्काल बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता जारी करने और किसानों की ऋण माफी की माँग की है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार को गाँव-गाँव उतरकर किसानों तक आर्थिक मदद पहुँचानी चाहिए।
क्या महाराष्ट्र सरकार ने कांग्रेस की माँग पर कोई प्रतिक्रिया दी?
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कांग्रेस सांसदों की PM मोदी से मुलाकात की योजना का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पहले भी सूखे में मदद की है और सभी सांसदों के मिलने पर प्रधानमंत्री से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने की उम्मीद है।
PM मोदी से कांग्रेस सांसदों की मुलाकात कब होगी?
ओझा के अनुसार, महाराष्ट्र के कांग्रेस सांसद शीघ्र ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेंगे और सूखे की वास्तविक स्थिति से अवगत कराएँगे। मुलाकात की सटीक तारीख की अभी घोषणा नहीं हुई है।
महाराष्ट्र में किसान ऋण माफी की पृष्ठभूमि क्या है?
ओझा के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल के बाद कोई बड़ी केंद्रीय ऋण माफी नहीं हुई है। पुराने कर्ज के बोझ के कारण किसान आज भी आत्महत्या करने को मजबूर हैं, जिससे राज्य में कृषि संकट की जड़ें और गहरी होती जा रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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