रवीना टंडन ने PM मोदी की कला-संस्कृति पहल को सराहा, बोलीं — 'भारत प्रतिभा से भरा, वैश्विक पहचान मिलनी चाहिए'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री रवीना टंडन ने 18 अक्टूबर 2026 को मुंबई की जहांगीर आर्ट गैलरी में एक आर्ट एग्जिबिशन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारतीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रयासों की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारत की समृद्ध कलात्मक विरासत को दुनियाभर में अधिक पहचान और सम्मान मिलना चाहिए।
जहांगीर आर्ट गैलरी में क्या हुआ
रवीना टंडन अपनी मित्र और कलाकार शिवाली भोजबल की पेंटिंग्स की प्रदर्शनी देखने जहांगीर आर्ट गैलरी, मुंबई पहुँची थीं। इस अवसर पर उन्होंने भारत की कला, हस्तशिल्प, संगीत और साहित्य की परंपराओं पर विस्तार से अपने विचार साझा किए। एग्जिबिशन के दौरान रवीना ने शिवाली की रचनात्मकता और हर पेंटिंग की अनूठी विजुअल अपील की भी भरपूर प्रशंसा की।
भारतीय कला पर रवीना का नज़रिया
रवीना ने कहा, 'हमारा देश, जिसे हम भारतवर्ष कहते हैं, दुनिया भर में अपनी कला, हस्तशिल्प, संगीत, साहित्य और विभिन्न शैक्षणिक क्षेत्रों के लिए जाना जाता रहा है — चाहे विज्ञान हो, ज्योतिष हो या कोई और विधा।' उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि भारत प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बल्कि ज़रूरत है इन कला रूपों को आगे लाने और उनके बारे में जागरूकता बढ़ाने की।
उन्होंने कहा, 'ऐसा नहीं है कि हमारे भारत में प्रतिभा की कमी है। हमारा देश प्रतिभा से भरा हुआ है। लेकिन हाँ, कला के इन रूपों को आगे लाने और इनके बारे में जागरूकता बढ़ाने की ज़रूरत है।'
PM मोदी की पहल पर प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारतीय कला और संस्कृति को वैश्विक मंच पर बढ़ावा देने की पहलों पर रवीना ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'अगर हमारे माननीय प्रधानमंत्री इस दिशा में पहल कर रहे हैं, तो मुझे लगता है कि यह बहुत अच्छी बात है। हमारे देश में जिस तरह की कला पहले भी थी और आज भी मौजूद है, उसे दुनिया भर में पहचान मिलनी चाहिए और उसे और ज़्यादा सम्मान मिलना चाहिए।' यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार सांस्कृतिक कूटनीति और 'सॉफ्ट पावर' के ज़रिये अपनी वैश्विक उपस्थिति को मज़बूत करने के प्रयास तेज कर रही है।
शिवाली भोजबल की कला को सराहा
रवीना ने अपनी दोस्त शिवाली भोजबल के बारे में कहा, 'मैं उन्हें कई सालों से जानती हूँ, लेकिन एक दोस्त और आर्टिस्ट के तौर पर उनकी क्रिएटिविटी देखकर मैं खुद भी हैरान हूँ। वह मल्टीटास्कर हैं और उनकी कला का यह एक अलग पहलू है।' उन्होंने यह भी बताया कि प्रदर्शनी की हर पेंटिंग की अपनी अलग प्रेरणा और विजुअल अपील है, जो उसे बाकी पेंटिंग्स से विशिष्ट बनाती है।
आगे की राह
गौरतलब है कि भारत में समकालीन और पारंपरिक कला को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच इस तरह की प्रदर्शनियाँ नई पीढ़ी को सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का महत्त्वपूर्ण ज़रिया बन रही हैं। रवीना जैसी著名 हस्तियों का इन आयोजनों में सक्रिय भागीदारी इस सांस्कृतिक पुनरुत्थान को जन-जन तक पहुँचाने में सहायक साबित हो सकती है।