3 अगस्त 2026
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पंकज त्रिपाठी ने हथकरघा उद्यम लॉन्च किया, बोले — 'यह सिर्फ कपड़ा नहीं, हजारों साल की विरासत है'

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पंकज त्रिपाठी ने हथकरघा उद्यम लॉन्च किया, बोले — 'यह सिर्फ कपड़ा नहीं, हजारों साल की विरासत है'

सारांश

पंकज त्रिपाठी के लिए चंदेरी और बनारस की शूटिंग यात्राएँ महज़ काम नहीं थीं — वे एक बदलाव की शुरुआत थीं। अब उन्होंने स्टाइलिस्ट विनीत चौहान के साथ मिलकर एक हथकरघा उद्यम लॉन्च किया है, जो कारीगरों को पहचान और बाज़ार दोनों दिलाने का वादा करता है।

मुख्य बातें

पंकज त्रिपाठी ने स्टाइलिस्ट विनीत चौहान के सहयोग से एक नए हथकरघा उद्यम की शुरुआत की है।
उद्यम का लक्ष्य भारतीय बुनकर समुदायों को सशक्त करना और हस्तनिर्मित वस्त्रों की कहानियाँ व्यापक दर्शकों तक पहुँचाना है।
चंदेरी और बनारस की शूटिंग यात्राओं ने त्रिपाठी को हथकरघा परंपरा से जोड़ा और इस पहल की प्रेरणा बनीं।
अभिनेता के अनुसार, भारत की हथकरघा परंपरा हजारों साल पुरानी है और यह देश की सबसे बड़ी सांस्कृतिक धरोहरों में से एक है।
कारीगरों को आर्थिक दबाव और मशीन-निर्मित उत्पादों की प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है — यह उद्यम उनके लिए नए अवसर बनाने की कोशिश है।

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने 17 जून 2026 को मुंबई में अपने एक नए हथकरघा उद्यम की शुरुआत की घोषणा की, जिसका उद्देश्य भारत की सदियों पुरानी बुनाई परंपरा को पुनर्जीवित करना और स्थानीय कारीगरों को एक सशक्त मंच देना है। अभिनेता ने बताया कि शूटिंग के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों की यात्राओं ने उन्हें हथकरघा की समृद्ध विरासत से परिचित कराया और यही अनुभव इस पहल की नींव बना।

यात्राओं ने जगाई जागरूकता

त्रिपाठी ने बताया कि चंदेरी में शूटिंग के दौरान उन्होंने देखा कि वहाँ की हर महिला हथकरघे से बनी साड़ी पहने हुई थी। उन्होंने कहा, 'यह मुझे काफी रोचक लगा था, क्योंकि यह सिर्फ जीविका का माध्यम नहीं था, बल्कि यह जीवन जीने का तरीका था और एक ऐसी परंपरा जो पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है।' इसी तरह बनारस की यात्राओं में उन्होंने कारीगरों को पूरी तरह हस्तनिर्मित वस्त्र पहने देखा, जिसे उन्होंने 'किसी जादू से कम नहीं' बताया।

अभिनेता ने कहा कि एक ऐसी दुनिया में जहाँ मशीनों का वर्चस्व है, हाथ से बने कपड़ों की माँग का बना रहना उन्हें असीम प्रसन्नता देता है। उनके अनुसार, भारत को छोड़कर विश्व में इस तरह की जीवंत हस्तशिल्प परंपरा शायद ही कहीं और बची हो।

उद्यम की अवधारणा और उद्देश्य

यह हथकरघा उद्यम त्रिपाठी ने स्टाइलिस्ट विनीत चौहान के सहयोग से शुरू किया है। दोनों ने मिलकर एक ऐसे मंच की परिकल्पना की है जो न केवल हथकरघा उत्पादों को प्रदर्शित करेगा, बल्कि उनके पीछे की कहानियों, कारीगरों की मेहनत और सांस्कृतिक संदर्भ को भी व्यापक दर्शकों तक पहुँचाएगा।

अभिनेता ने कहा, 'हमारा सपना है कि हम भारत के विभिन्न हिस्सों के कारीगर समुदायों के साथ मिलकर काम करें और उनके असाधारण काम को व्यापक दर्शकों तक पहुँचाएं।' उनके अनुसार, खादी और हथकरघा उत्पादों के साथ वर्षों के व्यक्तिगत जुड़ाव ने इस विश्वास को और मजबूत किया।

हथकरघा — सिर्फ कपड़ा नहीं, संस्कृति की अभिव्यक्ति

त्रिपाठी के मुताबिक हथकरघा का संबंध केवल वस्त्रों तक सीमित नहीं है — इसका ताल्लुक कहानियों, संवाद, संस्कृति, धीरज और मानवीय ज्ञान से भी है। उन्होंने कहा कि हर एक बुनाई अपने क्षेत्र की पहचान को अपने अंदर समेटे रखती है, हर आकृति में इतिहास समाहित होता है और हर वस्त्र में किसी कारीगर की मेहनत झलकती है।

अभिनेता ने यह भी कहा कि भारत की हथकरघा परंपरा हजारों साल पुरानी है और यह देश की सबसे बड़ी सांस्कृतिक धरोहरों में से एक है। उनके अनुसार, जितना अधिक वे इस क्षेत्र में खोज करते हैं, उतना ही इसकी विविधता और गहराई सामने आती है।

कारीगरों की चुनौतियाँ और आगे की राह

त्रिपाठी ने स्वीकार किया कि आज बुनाई से जुड़े अनेक कारीगर गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं — आर्थिक दबाव, बाज़ार तक पहुँच की कमी और मशीन-निर्मित उत्पादों से प्रतिस्पर्धा इनमें प्रमुख हैं। इसके बावजूद उन्होंने इस बात की सराहना की कि अनेक लोग इस अनूठी परंपरा को जीवित रखने की कोशिश में लगे हैं।

अभिनेता ने कहा कि यदि वे हथकरघे को लेकर लोगों में जागरूकता फैला सकें और कारीगरों के लिए नए अवसर सृजित कर सकें, तो उन्हें इससे गहरी संतुष्टि मिलेगी। यह उद्यम उसी दिशा में उठाया गया पहला ठोस कदम है, और आने वाले समय में भारत के विभिन्न बुनकर समुदायों के साथ सहयोग का विस्तार किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह उद्यम कारीगरों की आय और बाज़ार पहुँच में मापनीय सुधार ला पाएगा। भारत में हस्तशिल्प क्षेत्र दशकों से 'जागरूकता अभियानों' का विषय रहा है, फिर भी बुनकरों की औसत आय चिंताजनक रूप से कम बनी हुई है। सेलिब्रिटी-समर्थित उद्यम तभी टिकाऊ बदलाव लाते हैं जब वे आपूर्ति श्रृंखला में सीधे हस्तक्षेप करें — न कि केवल 'स्टोरीटेलिंग प्लेटफॉर्म' बनकर रह जाएँ। यह देखना होगा कि यह मंच कारीगरों को उचित मूल्य और नियमित आय सुनिश्चित करता है या नहीं।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंकज त्रिपाठी का हथकरघा उद्यम क्या है?
यह एक ऐसा मंच है जिसे पंकज त्रिपाठी ने स्टाइलिस्ट विनीत चौहान के सहयोग से शुरू किया है। इसका उद्देश्य भारत के विभिन्न बुनकर समुदायों के साथ मिलकर काम करना, हथकरघा उत्पादों को प्रदर्शित करना और कारीगरों की कहानियों को व्यापक दर्शकों तक पहुँचाना है।
पंकज त्रिपाठी को हथकरघा में रुचि कैसे हुई?
शूटिंग के दौरान चंदेरी और बनारस जैसी जगहों की यात्राओं में उन्होंने स्थानीय महिलाओं और कारीगरों को हथकरघे से बने वस्त्र पहने देखा। यह अनुभव उनके लिए गहरी प्रेरणा बना और उन्होंने महसूस किया कि यह परंपरा केवल जीविका नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है।
इस उद्यम से कारीगरों को क्या फायदा होगा?
उद्यम का लक्ष्य कारीगरों को वह पहचान और समर्थन दिलाना है जिसके वे हकदार हैं। यह मंच उनके उत्पादों को बड़े बाज़ार तक पहुँचाने और उनके काम के पीछे की सांस्कृतिक कहानियों को उपभोक्ताओं तक लाने का प्रयास करेगा।
भारत में हथकरघा उद्योग को किन चुनौतियों का सामना है?
बुनाई से जुड़े कारीगर आर्थिक दबाव, मशीन-निर्मित उत्पादों की प्रतिस्पर्धा और बाज़ार तक सीमित पहुँच जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं। त्रिपाठी के अनुसार, इसके बावजूद अनेक लोग इस अनूठी परंपरा को जीवित रखने की कोशिश में लगे हैं।
हथकरघा परंपरा भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
पंकज त्रिपाठी के अनुसार, भारत की हथकरघा परंपरा हजारों साल पुरानी है और देश की सबसे बड़ी सांस्कृतिक धरोहरों में से एक है। हर बुनाई में क्षेत्रीय पहचान, इतिहास और कारीगर की मेहनत समाहित होती है — यह सिर्फ वस्त्र नहीं, बल्कि संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति है।
राष्ट्र प्रेस
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