हथकरघा क्षेत्र को मजबूत करेगी IIT-NIFT साझेदारी, बुनकरों के सशक्तिकरण पर डॉ. एम. बीना का जोर
सारांश
मुख्य बातें
वस्त्र मंत्रालय की विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना ने 2 अगस्त को स्पष्ट किया कि IIT और NIFT जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ संस्थागत साझेदारी से ऐसे तकनीकी समाधान तैयार किए जा सकते हैं, जो बुनकरों की शारीरिक मेहनत को कम करें, पारंपरिक बुनाई में वैज्ञानिक परिशुद्धता लाएँ और उनकी आजीविका को बेहतर बनाएँ। उन्होंने यह बात नई दिल्ली स्थित IIT दिल्ली के फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (FITT) में आयोजित 'हैंडलूम हैकाथॉन 2.0' को संबोधित करते हुए कही।
हैकाथॉन में क्या हुआ
वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से आयोजित इस हैकाथॉन में देशभर से 2,500 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए। देशभर से चुनी गई शीर्ष 100 टीमों के 280 प्रतिभागियों ने भारत के हथकरघा क्षेत्र के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित समाधान विकसित करने पर काम किया। यह आयोजन युवा नवप्रवर्तकों को इस पारंपरिक उद्योग की चुनौतियों से सीधे जोड़ने का एक व्यावहारिक मंच बना।
डॉ. बीना का विज़न
डॉ. बीना ने अपने संबोधन में भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत और आधुनिक तकनीक के बीच पूरक संबंध को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, 'हथकरघा हमारी समृद्ध विरासत का प्रतीक है, जबकि प्रौद्योगिकी भविष्य का प्रतिनिधित्व करती है। हैंडलूम हैकाथॉन के माध्यम से हम इन दोनों क्षेत्रों को जोड़कर बुनकर समुदाय के उत्थान का प्रयास कर रहे हैं।' उन्होंने करघा संचालन, डिज़ाइन विकास और आधुनिक विपणन — तीनों क्षेत्रों में नवाचार की आवश्यकता पर भी बल दिया।
डॉ. बीना ने यह भी कहा कि हथकरघा स्वाभाविक रूप से टिकाऊ विकास और परिपत्र अर्थव्यवस्था (सर्कुलैरिटी) को बढ़ावा देता है — एक ऐसा पहलू जो वैश्विक स्तर पर टेक्सटाइल उद्योग में तेज़ी से प्रासंगिक होता जा रहा है।
IIT दिल्ली में बनेगा उत्कृष्टता केंद्र
IIT दिल्ली के टेक्सटाइल एवं फाइबर इंजीनियरिंग विभाग की प्रमुख डॉ. दीप्ति गुप्ता ने बताया कि संस्थान में स्थापित होने वाला 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर हथकरघा टेक्नोलॉजी' हथकरघा और तकनीक के एकीकरण को और सुदृढ़ करेगा। उनके अनुसार, इससे हस्तनिर्मित वस्त्रों की विशिष्टता को बनाए रखते हुए अधिक मानकीकरण और उत्पादकता सुनिश्चित की जा सकेगी। यह केंद्र वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से अगले सप्ताह उद्घाटित किए जाने का प्रस्ताव है।
वस्त्र मंत्रालय की प्रतिबद्धता
इस हैकाथॉन के ज़रिए वस्त्र मंत्रालय ने हथकरघा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए नवाचार, सहयोगात्मक अनुसंधान और तकनीक-आधारित हस्तक्षेपों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। यह पहल उत्पादकता, स्थिरता और बाज़ार प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार के साथ-साथ देश की समृद्ध हथकरघा विरासत के संरक्षण का लक्ष्य रखती है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब हथकरघा क्षेत्र पर पावरलूम और आयातित कपड़ों का दबाव लगातार बढ़ रहा है।