सेमीकॉन इंडिया 2026: PM मोदी से मिले IIT-NIT के छात्र, चिप डिज़ाइन से पेसमेकर तक हुई गहरी चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 75वें जन्मदिन — 17 सितंबर 2026 — पर सेमीकॉन इंडिया 2026 के मंच पर देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के शोध-छात्रों और प्रोफेसरों से विशेष मुलाकात की। इस दौरान छात्रों ने अपने द्वारा डिज़ाइन की गई चिप्स को मोमेंटो के रूप में पीएम को भेंट कीं और सिस्टम डिज़ाइनिंग से टेपआउट तक की पूरी यात्रा पर संवाद किया। यह भेंट 'चिप्स टू स्टार्ट-अप' (C2S) कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित हुई।
किसने क्या बनाया — मुख्य परियोजनाएँ
एनआईटी मेघालय से पीएचडी शोधार्थी पुबाली पोद्दार (मूलतः गुवाहाटी, असम) ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को अपनी टीम द्वारा डिज़ाइन की गई चिप भेंट की। पीएम मोदी ने सिस्टम डिज़ाइनिंग से टेपआउट तक की प्रक्रिया, इस दौरान आई चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से बातचीत की।
आईआईटी इंदौर की पीएचडी छात्रा आकांक्षा जैन ने पीएम को अपने प्रोजेक्ट की जानकारी दी, जिसमें वायु मेडिकल एप्लीकेशन, एग्रीकल्चर एप्लीकेशन और सिक्योरिटी एप्लीकेशन पर केंद्रित चिप शामिल थी। उन्होंने बताया कि पीएम ने स्पष्ट संदेश दिया: 'जो भी हमें करना है, वो रियल वर्ल्ड एप्लीकेशन में दिखना चाहिए।'
एनआईटी कालीकट (केरल) के पीएचडी शोधार्थी रंजीत ने ऑटोमोटिव इंडस्ट्री के लिए एक विशेष चिप विकसित की है। उन्होंने बताया कि उनकी टीम खास तौर पर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर के लिए भारत में ही चिप निर्माण की दिशा में काम कर रही है, क्योंकि अभी अधिकतर चिप्स आयात की जाती हैं।
स्वदेशी पेसमेकर और डिफेंस एप्लीकेशन
आईआईटी जम्मू के पीएचडी छात्र संयम भारद्वाज ने पीएम को बताया कि वे इम्प्लांटेबल कार्डियक पेसमेकर के लिए एक सेंसिंग ब्लॉक चिप पर काम कर रहे हैं। यह C2S कार्यक्रम के तहत उनकी सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना है।
डॉ. प्रियंका शर्मा ने बताया कि वे स्वदेशी पेसमेकर डिज़ाइन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी से मिलने का अनुभव अत्यंत प्रेरणादायक रहा — 'ऐसा लगा ही नहीं कि वे हमारी फील्ड से नहीं हैं।' पीएम ने सुझाव दिया कि मेडिकल क्षेत्र में काम करने वाले शोधार्थी डिफेंस एप्लीकेशन पर भी ध्यान दें।
सुरक्षा और ऊर्जा प्रबंधन में नवाचार
एमआईटी कैंपस की द्वितीय वर्ष की छात्रा प्रियदर्शिनी ने 'चिप-इन-सेट' कार्यक्रम के तहत म्यूचुअल ऑथेंटिकेशन पर आधारित एक परियोजना प्रस्तुत की। यह सिस्टम RFID कार्ड और रीडर के बीच सुरक्षित संचार सुनिश्चित करता है और इसका उपयोग डिफेंस जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में किया जा सकता है।
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश के विजय प्रताप यादव हिमाचल प्रदेश में पावर मैनेजमेंट सर्किट पर काम कर रहे हैं। उनकी चिप ऊर्जा की बचत करती है और पावर सप्लाई से जुड़ी समस्याओं को कम करती है।
शिक्षण संस्थानों की भूमिका
मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर बोनाश्वरी ने बताया कि उनके संस्थान ने C2S कार्यक्रम के तहत पाँच चिप्स विकसित की हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों में लागू होंगी। यह पहल भारतीय विश्वविद्यालयों और उद्योग जगत के बीच सेतु बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।
आगे की राह
गौरतलब है कि सेमीकॉन इंडिया 2026 का यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब भारत सरकार देश में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम खड़ा करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। C2S जैसे कार्यक्रम उस व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं जो छात्रों को शुरुआत से ही चिप डिज़ाइन में दक्ष बनाने पर केंद्रित है। पीएम मोदी की इस व्यक्तिगत बातचीत ने शोधार्थियों को यह संकेत दिया कि उनके काम की पहचान सर्वोच्च स्तर पर हो रही है, और रियल-वर्ल्ड एप्लीकेशन अब सरकार की प्राथमिकता है।