जीआई एंड बियॉन्ड 2.0 समिट: 5 अगस्त को नई दिल्ली में 100+ जीआई-टैग हथकरघा उत्पादों का होगा प्रदर्शन
सारांश
मुख्य बातें
वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार ने 5 अगस्त 2025 को नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में 'जीआई एंड बियॉन्ड 2.0 समिट' के आयोजन की घोषणा की है। इस शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत के भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग प्राप्त हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों को घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में नई पहचान दिलाना है। यह आयोजन विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय और हथकरघा निर्यात संवर्धन परिषद (एचईपीसी) के संयुक्त तत्वावधान में होगा।
समिट की प्रमुख विशेषताएँ
इस सम्मेलन की सबसे बड़ी खासियत देशभर से लाए गए 100 से अधिक जीआई-पंजीकृत हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों की प्रदर्शनी होगी। भारत की विविध बुनाई परंपराओं को दर्शाने वाली विषयगत प्रदर्शनियाँ और हथकरघा बुनाई व हस्तशिल्प के लाइव प्रदर्शन भी कार्यक्रम का हिस्सा होंगे। उद्घाटन सत्र में पंजीकृत मालिकों और नए अधिकृत उपयोगकर्ताओं को जीआई प्रमाणपत्र भी वितरित किए जाएंगे।
डिजिटल हैंडलूम एटलस का शुभारंभ
समिट के दौरान डिजिटल हैंडलूम एटलस — 'एक मंच, अनंत बाज़ार' का लोकार्पण किया जाएगा। यह एक व्यापक डिजिटल मंच है, जिसे भारत के हथकरघा उत्पादों — जिनमें जीआई उत्पाद भी शामिल हैं — को प्रदर्शित करने और देशभर के कारीगरों को वैश्विक बाज़ारों से सीधे जोड़ने के लिए तैयार किया गया है। इसके अलावा, एचईपीसी के हीरक जयंती लोगो का भी इस अवसर पर अनावरण होगा।
किन हितधारकों की होगी भागीदारी
वस्त्र मंत्रालय के अनुसार, इस शिखर सम्मेलन में लगभग 10 देशों के विदेशी खरीदार, भारतभर के निर्यातक, बहुराष्ट्रीय निगम (एमएनसी), जीआई उत्पादों के पंजीकृत मालिक, केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारी, प्रमुख कपड़ा ब्रांड, खुदरा श्रृंखलाएँ, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, शिक्षाविद और उद्योग विशेषज्ञ एक साथ मंच साझा करेंगे। यह एकत्रीकरण जीआई इकोसिस्टम में बहु-स्तरीय सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख गणमान्य
समिट का उद्घाटन विदेश एवं वस्त्र राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा मुख्य अतिथि के रूप में करेंगी। वस्त्र सचिव नीलम शमी राव विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी। इनके अलावा विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना (आईएएस), विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) श्रीमती अमृत राज और पेटेंट, डिजाइन एवं ट्रेडमार्क नियंत्रक (सीजीपीडीटीएम) प्रोफेसर (डॉ.) उन्नत पी. पंडित भी मंच पर उपस्थित रहेंगे।
क्यों महत्वपूर्ण है यह आयोजन
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार अपने पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ने पर विशेष ज़ोर दे रही है। जीआई टैग न केवल उत्पाद की प्रामाणिकता की गारंटी देता है, बल्कि कारीगरों को उनकी विरासत के लिए उचित मूल्य और बाज़ार तक पहुँच भी सुनिश्चित करता है। गौरतलब है कि भारत के पास दुनिया के सर्वाधिक जीआई-पंजीकृत उत्पादों में से एक है, और इस तरह के मंच उन्हें निर्यात योग्य ब्रांड के रूप में स्थापित करने में सहायक हैं।