वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस वडोदरा: जीआई टैग उत्पादों को मिलेगा वैश्विक मंच, हस्तशिल्प विरासत की होगी नुमाइश
सारांश
मुख्य बातें
सेंट्रल गुजरात की वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (वीजीआरसी) जून के अंतिम सप्ताह में वडोदरा में आयोजित होगी, जहाँ औद्योगिक निवेश के साथ-साथ क्षेत्र के भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त हस्तशिल्प उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित किए जाने की संभावना है। यह आयोजन पारंपरिक कारीगरों और स्थानीय उद्यमियों को वैश्विक खरीदारों एवं निवेशकों से सीधे जोड़ने का माध्यम बनेगा।
जीआई टैग उत्पाद: क्षेत्र की पहचान
सेंट्रल गुजरात की सांस्कृतिक विरासत में कई ऐसे उत्पाद शामिल हैं जिन्हें जीआई टैग प्राप्त हो चुका है या जिनकी आवेदन प्रक्रिया जारी है। जीआई टैग किसी उत्पाद की विशिष्ट पहचान, गुणवत्ता और उसके भौगोलिक मूल को आधिकारिक मान्यता देता है — जो घरेलू और निर्यात बाज़ार दोनों में उसकी विश्वसनीयता बढ़ाता है।
अहमदाबाद के जामालपुर क्षेत्र में छीपा समुदाय द्वारा सदियों से संरक्षित हस्त-मुद्रित वस्त्र कला 'सोदागरी ब्लॉक प्रिंट' को वर्ष 2024 में जीआई टैग मिला। पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही यह परंपरागत कला अपनी बारीक नक्काशी और प्राकृतिक रंगों के उपयोग के लिए जानी जाती है।
अहमदाबाद और खेड़ा जिलों की प्रसिद्ध वस्त्र कला 'माता नी पछेड़ी' को वर्ष 2023 में जीआई टैग प्राप्त हुआ। देविपूजक समुदाय द्वारा संरक्षित इस कला में कपड़े पर देवी-देवताओं के चित्र उकेरे जाते हैं, जो धार्मिक अनुष्ठानों में भी उपयोग होती है।
आदिवासी और ऐतिहासिक शिल्प परंपराएँ
राठवा, भील और भिलाला जनजातियों की अनुष्ठानिक भित्ति कला 'पिथोरा पेंटिंग' को वर्ष 2021 में जीआई टैग मिला। यह कला मुख्यतः छोटाउदेपुर और पंचमहल जिलों में प्रचलित है और अपने जीवंत रंगों एवं प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति के लिए विशिष्ट पहचान रखती है।
गांधीनगर जिले के पेथापुर गाँव में लगभग 300 वर्षों से चली आ रही 'पेथापुर प्रिंटिंग ब्लॉक्स' हस्तकला को वर्ष 2018 में उसकी विशिष्ट हस्त-नक्काशी तकनीक के लिए जीआई टैग प्राप्त हुआ। आणंद जिले के खंभात (पूर्व में कैम्बे) में तैयार होने वाले रत्न 'अगेट्स ऑफ कैम्बे' को वर्ष 2008 में जीआई टैग मिला — इस शिल्पकला का इतिहास हड़प्पा सभ्यता तक जुड़ा माना जाता है।
वडोदरा जिले के सांखेड़ा कस्बे में खारड़ी-सुथार समुदाय द्वारा निर्मित 'सांखेड़ा फर्नीचर' को भी वर्ष 2008 में जीआई टैग प्राप्त हुआ। सागौन की लकड़ी से बने इस फर्नीचर को पारंपरिक रूप से मैरून और सुनहरे रंगों से सजाया जाता है। इसके अलावा, दाहोद बीड वर्क और खंभात काइट जैसे उत्पाद — जिन्होंने जीआई टैग के लिए आवेदन किया है — भी वीजीआरसी में प्रदर्शित किए जाने की संभावना है।
वीजीआरसी का ढाँचा और प्रमुख गतिविधियाँ
इन रीजनल कॉन्फ्रेंस में एमओयू आदान-प्रदान के अतिरिक्त वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम, रिवर्स बायर-सेलर मीट, व्यापार प्रदर्शनियाँ और सेक्टर-विशिष्ट पवेलियन आयोजित किए जाते हैं। एमएसएमई के लिए क्षेत्रीय पुरस्कार, बी2बी एवं बी2जी नेटवर्किंग सत्र, उद्यमी मेला और वैश्विक प्रवासी समुदाय के साथ अंतरराष्ट्रीय साझेदारी समझौते भी इस आयोजन के प्रमुख आकर्षण रहते हैं।
गौरतलब है कि वीजीआरसी के पूर्व संस्करण क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का प्रभावी मंच साबित हुए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब 'वोकल फॉर लोकल' अभियान के तहत पारंपरिक उत्पादों को निर्यात बाज़ार में स्थापित करने के प्रयास तेज़ हुए हैं।
विकसित भारत विजन से जुड़ाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047 विजन' के अनुरूप इन पारंपरिक उत्पादों को 'वोकल फॉर लोकल' अभियान के ज़रिये प्रोत्साहित किया जा रहा है। आगामी वीजीआरसी सेंट्रल गुजरात के जीआई टैग उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुँचाने और पारंपरिक कारीगरों की आजीविका को मज़बूत करने का अवसर प्रदान करेगी।
आगे की राह
वडोदरा में होने वाली यह कॉन्फ्रेंस स्थानीय उद्यमियों को वैश्विक निवेशकों से जोड़ने और सेंट्रल गुजरात की औद्योगिक एवं सांस्कृतिक संभावनाओं को विश्व समुदाय के समक्ष रखने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगी। कारीगर समुदायों के लिए यह आयोजन न केवल प्रदर्शनी का मंच है, बल्कि दीर्घकालिक व्यापारिक संपर्क स्थापित करने का द्वार भी है।