सछ्वान के शिदे गांव में 'सौर ऊर्जा + मुर्गी पालन' मॉडल से बदल रही ग्रामीणों की किस्मत
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण-पश्चिमी चीन के सछ्वान प्रांत स्थित ल्यांगशान यी जातीय स्वायत्त प्रिफेक्चर की शिदे काउंटी में एक अभिनव 'फोटोवोल्टिक प्लस मुर्गी पालन' मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहा है। समुद्र तल से लगभग 2,600 मीटर की ऊंचाई पर बसी यह पर्वतीय काउंटी अब 'एक जमीन, दोहरा उपयोग' के सिद्धांत पर आधारित एक मिश्रित कृषि-ऊर्जा मॉडल की मिसाल बन रही है।
भौगोलिक परिस्थितियाँ और मॉडल की आधारशिला
शिदे काउंटी पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित है, जहाँ दिन-रात के तापमान में उल्लेखनीय अंतर रहता है। इन्हीं परिस्थितियों ने 'फोटोवोल्टिक प्लस मुर्गी पालन' की अवधारणा को जन्म दिया। गर्मियों के दौरान सौर पैनलों के नीचे का तापमान आसपास के खुले क्षेत्र की तुलना में लगभग 15 डिग्री सेल्सियस तक कम रहता है, जिससे मुर्गियों को लू लगने और तापीय तनाव से बचाव मिलता है।
सर्दियों में ये पैनल तेज पर्वतीय हवाओं से सुरक्षा देते हैं और पाले के असर को कम करते हैं। इसके अतिरिक्त, पैनलों से उत्पन्न छाया और नियंत्रित प्रकाश के कारण मुर्गियों में आपस में चोंच मारने की आदत घटती है, और बारिश-हवा से सुरक्षा मिलने से बीमारियों का खतरा भी कम हो जाता है।
स्थानीय नस्ल और उद्यमिता की भूमिका
इस मॉडल की सफलता में शिदे यानची मुर्गियों की स्थानीय नस्ल की अहम भूमिका है। भौगोलिक संकेत वाली इस नस्ल का मांस बेहद कोमल माना जाता है और इसमें कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है। इस विशेषता को पहचानते हुए तीन साल पहले दक्षिण चीन के फूच्येन प्रांत के व्यापारी काओ छीफू ने शिदे में 'यानची' मुर्गी पालन उद्योग की नींव रखी।
काओ छीफू के अनुसार, पिछले दो वर्षों में पालन का दायरा काफी बढ़ा है और बड़ी संख्या में स्थानीय किसान इससे जुड़ चुके हैं। हालाँकि, उन्होंने स्वीकार किया कि हाल के समय में 'यानची' मुर्गियों की कीमतें अधिक रहने के कारण बिक्री अपेक्षित स्तर पर नहीं पहुँच पाई है। इस चुनौती से निपटने के लिए अब वे उत्पाद श्रृंखला में विविधता लाने और देशी मुर्गों-मुर्गियों के मिश्रित पालन की संभावनाओं का मूल्यांकन कर रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम: दोहरे लाभ का कृषि चक्र
इस मॉडल का मूल सिद्धांत है — 'एक ही जमीन, दोहरा उपयोग और पूरक लाभ'। सौर पैनलों से बिजली उत्पादन जारी रहता है, वहीं उसी भूमि पर मुर्गी पालन से अतिरिक्त आय होती है। प्राकृतिक रूप से मुर्गियाँ पैनलों के नीचे उगने वाली घास और कीड़े-मकोड़े चुगती हैं, जिससे खरपतवार हटाने और कीटनाशकों पर होने वाला खर्च कम होता है।
साथ ही, खुले वातावरण में पाली गई इन उच्च-गुणवत्ता की मुर्गियों को बाज़ार में बेहतर दाम मिलते हैं। मुर्गियों की बीट से मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ती है और उनका मिट्टी खोदना सौर पैनल के स्टैंड व केबलों पर घास के प्रभाव को कम करता है — इस तरह एक स्व-पोषित कृषि चक्र का निर्माण होता है।
संस्थागत ढाँचा: 'कंपनी + ग्राम पंचायत + किसान' मॉडल
स्थानीय प्रशासन ने इस योजना को व्यवस्थित रूप देने के लिए त्रिस्तरीय साझेदारी मॉडल अपनाया है। इसके तहत कंपनी 50 दिन के स्वस्थ चूजे उपलब्ध कराती है, किसान उनका पालन-पोषण करते हैं, और बाद में कंपनी एकीकृत रूप से खरीद-बिक्री सुनिश्चित करती है। इसके अतिरिक्त, सरकार मुर्गी पालन बीमा पर सब्सिडी और निर्यात प्रोत्साहन भी प्रदान करती है।
यह मॉडल ग्रामीण किसानों को बाज़ार जोखिम से बचाते हुए उन्हें एक सुनिश्चित आय का माध्यम देता है। गौरतलब है कि ऐसे मॉडल चीन की उस व्यापक ग्रामीण पुनरुद्धार नीति का हिस्सा हैं, जिसके तहत नवीकरणीय ऊर्जा और कृषि को एकीकृत करके दूरस्थ क्षेत्रों में आर्थिक विकास को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
आगे की राह
बिक्री संबंधी चुनौतियों के बावजूद, शिदे का यह मॉडल उन दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करता है, जहाँ परंपरागत खेती सीमित विकल्प प्रदान करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, उत्पाद विविधीकरण और बिक्री के नए डिजिटल माध्यमों के ज़रिये इस मॉडल की व्यावसायिक सफलता को और मजबूत किया जा सकता है।