सौर ऊर्जा कृषि पंप योजना: गढ़चिरौली के किसान अशोक कराडे को साल में दो फसल, ₹3.5 लाख तक की उपज
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले की कोरची तहसील के प्रगतिशील किसान अशोक कराडे की खेती-किसानी की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है — और इसकी वजह है केंद्र सरकार की 'मागेल त्याला सौर ऊर्जा कृषि पंप योजना'। इस योजना के तहत 3 एचपी का सौर पंप, सोलर पैनल और बोर का पूरा सेटअप मिलने के बाद कराडे अब साल में दो फसलें ले रहे हैं और ₹3.5 लाख तक की उपज हासिल कर रहे हैं।
पहले की स्थिति: बारिश पर निर्भरता और बिजली की अनिश्चितता
कराडे के अनुसार, सौर पंप मिलने से पहले उनकी खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर थी। कोरची तहसील में बिजली की अनियमित आपूर्ति एक पुरानी समस्या रही है — खेत में विद्युत कनेक्शन होने के बावजूद बिजली कब आएगी, इसका कोई भरोसा नहीं था। इस कारण समय पर सिंचाई करना लगभग असंभव हो जाता था और साल में केवल एक बार धान की फसल ही ले पाते थे।
यह ऐसे समय में आया है जब विदर्भ और नक्सल-प्रभावित गढ़चिरौली क्षेत्र के किसान दशकों से सिंचाई सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में वर्षा-आधारित खेती का अनुपात राज्य के अन्य जिलों की तुलना में कहीं अधिक है।
योजना का लाभ और बदलाव की कहानी
कराडे ने बताया कि 'मागेल त्याला सौर ऊर्जा योजना' के तहत आवेदन प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल रही। आवेदन के समय आवश्यक दस्तावेज़ जमा करने के साथ उन्हें करीब ₹11,000 का अंशदान देना पड़ा। इसके बाद संबंधित विभाग ने भूमि का सर्वे किया और कुछ समय बाद सोलर पैनल स्थापित कर दिया गया।
अब वे अपने आठ एकड़ के खेत में से पाँच एकड़ में धान की खेती करते हैं और शेष भूमि में फलों का बगीचा विकसित किया है। बगीचे में छह प्रकार के आम के पेड़ सहित विभिन्न फलदार पेड़ लगाए गए हैं। धान की फसल के बाद जो भूमि खाली रहती थी, उसका अब उत्पादक उपयोग हो रहा है।
आर्थिक असर: सीमित आय से ₹3.5 लाख की उपज तक
कराडे के अनुसार, सौर पंप मिलने से पहले खेती से होने वाली आमदनी काफी सीमित थी। अब वे लगभग ₹3.5 लाख तक की फसल उपज लेने में सक्षम हो रहे हैं। इसके अलावा, सौर ऊर्जा पर निर्भरता के कारण बिजली का बिल भी समाप्त हो गया है, जो अतिरिक्त बचत का स्रोत बन गया है।
गौरतलब है कि यह केवल एक किसान की सफलता की कहानी नहीं है — यह उस बड़े नीतिगत सवाल का जवाब भी है कि क्या सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई समाधान वास्तव में छोटे और मध्यम किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य में योगदान दे सकते हैं।
किसान की अपील और आगे की राह
कराडे ने कोरची तहसील के अन्य किसानों से अपील की है कि वे इस योजना की पात्रता और उपलब्धता की जानकारी लेकर लाभ उठाएं और खेती को सिंचाई के मामले में अधिक आत्मनिर्भर बनाएं। उनका कहना है कि सोलर पैनल लगने के बाद से अब तक किसी प्रकार की कोई तकनीकी कठिनाई नहीं आई है और सिंचाई के लिए न तो मौसम पर और न ही बिजली की आपूर्ति पर निर्भर रहना पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना का विस्तार गढ़चिरौली जैसे दूरदराज़ और वंचित जिलों में बड़े पैमाने पर हो, तो कृषि उत्पादकता और किसानों की आय पर उल्लेखनीय सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।