20 अगस्त 2026
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वंदे मातरम विवाद पर पद्म श्री डॉ. माया टंडन: 'गीत को बांटने का कोई औचित्य नहीं'

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वंदे मातरम विवाद पर पद्म श्री डॉ. माया टंडन: 'गीत को बांटने का कोई औचित्य नहीं'

सारांश

पद्म श्री डॉ. माया टंडन ने वंदे मातरम विवाद पर दो टूक कहा — गीत को टुकड़ों में बाँटने की बहस बेमानी है। आज़ादी के दौर से चली आ रही इस गीत की भावना को अक्षुण्ण रखना हर भारतीय की ज़िम्मेदारी है।

मुख्य बातें

माया टंडन ने 20 अगस्त 2026 को जयपुर में वंदे मातरम विवाद पर प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम को आधा या पूरा बाँटने की बहस का कोई औचित्य नहीं — इसे जैसा है, वैसे ही अपनाना चाहिए।
कथित तौर पर दक्षिण भारत के कुछ हलकों और कांग्रेस की ओर से गीत के कुछ अंशों पर अलग राय सामने आई है।
टंडन ने स्पष्ट किया कि गीत का अपमान किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने नागरिकों से अपील की कि राष्ट्रीय प्रतीकों पर एकजुट भाव रखें और अनावश्यक विवाद से बचें।

पद्म श्री से सम्मानित著名 शास्त्रीय गायिका डॉ. माया टंडन ने 20 अगस्त 2026 को जयपुर में वंदे मातरम गीत को लेकर देशभर में छिड़े विवाद पर अपनी स्पष्ट राय रखी। उन्होंने कहा कि इस राष्ट्रीय गीत को आधे या पूरे हिस्सों में बाँटकर देखने की बहस का कोई औचित्य नहीं है — इसे जिस स्वरूप में स्वीकार किया गया है, उसी रूप में सम्मान के साथ अपनाया जाना चाहिए।

डॉ. टंडन का स्पष्ट संदेश

डॉ. माया टंडन ने कहा कि वंदे मातरम के प्रति उनके मन में बचपन से गहरी श्रद्धा रही है। उनके अनुसार, जब से उन्होंने होश संभाला है, तब से इस गीत के प्रति लोगों में भावनात्मक जुड़ाव और सम्मान देखा है। उन्होंने कहा, 'भारत देश हमारा है और वंदे मातरम जिस सम्मान के साथ गाया जाता है, उसके प्रति मेरे मन में भी गहरी श्रद्धा है।'

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि देशवासियों को स्वतंत्रता संग्राम के दौर से चली आ रही इस गीत की भावना को अक्षुण्ण रखना चाहिए।

बहस पर सीधी प्रतिक्रिया

गीत के अलग-अलग हिस्सों को लेकर चल रही चर्चा पर डॉ. टंडन ने कहा कि इसे आधा-पूरा बाँटने का कोई सेंस नहीं है — इसको जैसा है, वैसा ही अपनाना चाहिए। उनका मत है कि राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े प्रतीकों के प्रति नागरिकों को एकजुट भाव रखना चाहिए, न कि विभाजनकारी बहस में उलझना।

विवाद की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि हाल के हफ्तों में वंदे मातरम को लेकर कई तरफ से प्रतिक्रियाएँ आई हैं। कथित तौर पर दक्षिण भारत के कुछ हलकों से गीत के विशेष अंशों को लेकर अलग राय सामने आई है, जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) की ओर से भी इस मुद्दे पर विरोध की आवाज़ें उठी हैं। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब राष्ट्रीय प्रतीकों और सांस्कृतिक पहचान को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ हो रही है।

सम्मान और जवाबदेही

डॉ. टंडन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो लोग भारतीय हैं, उन्हें अपने देश का सम्मान करना चाहिए और राष्ट्रीय भावना से जुड़े विषयों पर अनावश्यक विवाद से बचना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर कोई इस गीत का अपमान करता है, तो उसे किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता।

आगे क्या

डॉ. माया टंडन की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब वंदे मातरम को लेकर सार्वजनिक विमर्श में कई स्वर उभर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों पर आम सहमति बनाना लोकतांत्रिक संवाद का हिस्सा है, परंतु इस संवाद की सीमाएँ सम्मान और संवैधानिक मूल्यों के भीतर रहनी चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

भाषाई और क्षेत्रीय पहचान की राजनीति से जुड़ा रहा है। परंतु इस बार दक्षिण भारतीय आपत्तियों और कांग्रेस के विरोध का एक साथ उभरना संकेत देता है कि यह बहस केवल सांस्कृतिक नहीं, बल्कि चुनावी भी है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस ऐतिहासिक संदर्भ को नज़रअंदाज़ करती है कि संविधान सभा ने स्वयं इस गीत की स्थिति पर गहन विचार-विमर्श किया था।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वंदे मातरम को लेकर अभी क्या विवाद चल रहा है?
वंदे मातरम के कुछ अंशों को गाए जाने या न गाए जाने को लेकर देश में बहस छिड़ी है। कथित तौर पर दक्षिण भारत के कुछ हलकों और कांग्रेस की ओर से गीत के विशेष हिस्सों पर अलग राय सामने आई है।
डॉ. माया टंडन कौन हैं और उन्होंने क्या कहा?
डॉ. माया टंडन पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित著名 शख्सियत हैं। उन्होंने 20 अगस्त 2026 को जयपुर में कहा कि वंदे मातरम को आधा-पूरा बाँटने का कोई औचित्य नहीं है और इसे जिस रूप में स्वीकार किया गया है, उसी रूप में सम्मान देना चाहिए।
क्या वंदे मातरम भारत का राष्ट्रगान है?
नहीं, वंदे मातरम भारत का राष्ट्रीय गीत है, जबकि 'जन गण मन' राष्ट्रगान है। संविधान सभा ने दोनों को अलग-अलग दर्जा दिया था और वंदे मातरम की स्थिति पर उस समय भी विस्तृत चर्चा हुई थी।
कांग्रेस ने वंदे मातरम पर क्या रुख अपनाया है?
रिपोर्टों के अनुसार, कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर विरोध की आवाज़ें उठी हैं, हालाँकि पार्टी का आधिकारिक विस्तृत बयान स्रोत में उपलब्ध नहीं है। डॉ. टंडन ने इस विरोध को अनावश्यक विवाद बताया।
डॉ. टंडन ने गीत के अपमान पर क्या कहा?
डॉ. माया टंडन ने स्पष्ट कहा कि अगर कोई वंदे मातरम का अपमान करता है, तो उसे किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने नागरिकों से राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति एकजुट भाव रखने की अपील की।
राष्ट्र प्रेस
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