वंदे मातरम पर राजनीति बंद हो, हर राज्य इसे दिल से अपनाए: BJP सांसद अशोक मित्तल
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद अशोक मित्तल ने 22 अगस्त को विपक्षी दलों से राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को राजनीतिक विवाद से दूर रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह गीत देश की एकता और स्वतंत्रता संग्राम की पहचान है, और इस पर राजनीति करना सर्वथा अनुचित है।
वंदे मातरम विवाद पर मित्तल का रुख
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में वंदे मातरम को लेकर हुए हंगामे की पृष्ठभूमि में मित्तल ने कहा, 'जब भारत सरकार और देश की संसद ने इसे कानून का दर्जा दिया है और इसके अपमान पर सजा का प्रावधान है, तो दूसरी पार्टियाँ इसके साथ अन्याय क्यों कर रही हैं?' उन्होंने आगे कहा कि यह वह राष्ट्रीय गीत है जिसने स्वतंत्रता सेनानियों को शब्द दिए और कश्मीर से कन्याकुमारी तथा कच्छ से कोहिमा तक पूरे देश को एकजुट किया। उनके अनुसार, सभी राज्य सरकारों को इस गीत को दिल से अपनाना चाहिए और वंदे मातरम को पूरा गाना चाहिए।
मेक इन इंडिया पर BJP सांसद का पक्ष
मेक इन इंडिया नीति पर अपनी राय रखते हुए मित्तल ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के लाइसेंस राज में एक निश्चित सीमा से अधिक उत्पादन करने पर罚 दंड का प्रावधान था, जिसके कारण जीडीपी में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो सकी। उन्होंने कहा, 'मौजूदा सरकार में जितना ज़्यादा उत्पादन बढ़ाते हैं, उतने ही अधिक प्रोत्साहन मिलते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उद्योग मंत्री उत्पादकों को सम्मानित करते हैं, जो देश के लिए सकारात्मक संकेत है।
पंजाब चुनाव और कांग्रेस की तैयारी पर प्रतिक्रिया
पंजाब में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) द्वारा आगामी चुनाव घोषणा पत्र में जेन-ज़ी से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने की योजना पर मित्तल ने कहा, 'कांग्रेस की 70 साल सरकार रही, तब उन्हें याद नहीं आया कि युवाओं को शिक्षा और रोज़गार देना चाहिए।' हालाँकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि सभी पार्टियाँ युवाओं के बारे में सोच रही हैं, तो यह अच्छी बात है।
जाति आधारित आरक्षण प्रदर्शन पर टिप्पणी
जंतर-मंतर और राजघाट पर जाति आधारित आरक्षण को लेकर हुए प्रदर्शनों पर मित्तल ने कहा कि शांतिपूर्वक प्रदर्शन करना सभी का अधिकार है, लेकिन हर आंदोलन को कानून और नियमों के दायरे में रहकर किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई होगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में आरक्षण को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ हो रही है।