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भारतीय वायुसेना के 42 स्कूलों में साइबर सुरक्षा कवच, 261 शिक्षकों को मिला विशेष प्रशिक्षण

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भारतीय वायुसेना के 42 स्कूलों में साइबर सुरक्षा कवच, 261 शिक्षकों को मिला विशेष प्रशिक्षण

सारांश

भारतीय वायुसेना ने बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के लिए देशभर के 42 स्कूलों को 'स्क्रॉलकंट्रोल' कार्यक्रम से जोड़ा और 261 शिक्षकों को साइबर खतरों से निपटने का प्रशिक्षण दिया। अब स्कूल स्तर पर ही साइबर अपराध की पहली प्रतिक्रिया संभव होगी — यह पहल शिक्षा और डिजिटल सुरक्षा के अनूठे संगम की मिसाल है।

मुख्य बातें

भारतीय वायुसेना ने देशभर के 42 स्कूलों को 'स्क्रॉलकंट्रोल' बाल डिजिटल सुरक्षा कार्यक्रम से जोड़ा।
261 शिक्षकों को साइबर अपराध, ऑनलाइन शोषण और डिजिटल धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
स्कूलों में साइबर क्लब स्थापित होंगे; मानक पूरे करने वाले स्कूलों को 'साइबर सुरक्षित स्कूल' का दर्जा मिलेगा।
प्रभावित बच्चों और परिवारों के लिए २४ घंटे साइबर कानून विशेषज्ञ, मनोवैज्ञानिक और डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञों की सेवा उपलब्ध होगी।
यह पहल वायुसेना शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सोसायटी और आईएसएसी फाउंडेशन के सहयोग से राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता माह में शुरू की गई।
सीबीएसई ने सभी संबद्ध स्कूलों को मासिक 'साइबर जागरूकता दिवस' मनाने का निर्देश दिया है।

भारतीय वायुसेना ने देशभर के 42 वायुसेना स्कूलों को 'स्क्रॉलकंट्रोल' बाल डिजिटल सुरक्षा कार्यक्रम से जोड़कर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस पहल के तहत 261 शिक्षकों को साइबर अपराध, ऑनलाइन शोषण और डिजिटल धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता माह के दौरान शुरू की गई यह पहल वायुसेना शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सोसायटी ने आईएसएसी फाउंडेशन के सहयोग से लागू की है।

कार्यक्रम में क्या शामिल है

इस कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित शिक्षक अब स्कूल स्तर पर ही साइबर खतरे की पहली प्रतिक्रिया देने में सक्षम होंगे। किसी घटना की जानकारी मिलने पर ये शिक्षक समय रहते आवश्यक कदम उठा सकेंगे और प्रभावित छात्रों को तत्काल सहायता प्रदान कर सकेंगे। इसके अलावा वायुसेना स्कूलों में साइबर क्लब भी स्थापित किए जाएंगे, जहाँ विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा का प्रशिक्षण और प्रमाणन दिया जाएगा।

शिक्षकों, कर्मचारियों और अभिभावकों के लिए नियमित जागरूकता सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। परिवारों को बच्चों की आयु के अनुरूप डिजिटल सामग्री की उपयुक्तता समझने में मदद के लिए एक अलग मंच भी उपलब्ध कराया जाएगा।

बच्चों को किन खतरों से सुरक्षा

तेज़ गति के नेटवर्क और स्मार्टफोन की सर्वसुलभता के कारण आज स्कूली बच्चे सोशल मीडिया और इंटरनेट से निरंतर जुड़े रहते हैं। हालाँकि इंटरनेट पर मौजूद हर सामग्री बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं होती। कार्यक्रम विशेष रूप से ऑनलाइन शोषण, अनुचित संपर्क, एआई के दुरुपयोग, ऑनलाइन गेमिंग के खतरों और आर्थिक धोखाधड़ी जैसी चुनौतियों से बच्चों को बचाने पर केंद्रित है।

साइबर सुरक्षित स्कूल की पहचान

कार्यक्रम के तहत निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले स्कूलों को आधिकारिक रूप से 'साइबर सुरक्षित स्कूल' का दर्जा दिया जाएगा। यह मान्यता स्कूलों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित करने का अवसर देगी। गौरतलब है कि सीबीएसई ने भी अपने संबद्ध स्कूलों को हर महीने 'साइबर जागरूकता दिवस' मनाने और साइबर सुरक्षा से जुड़ी अच्छी आदतों को बढ़ावा देने का निर्देश दिया है — वायुसेना स्कूलों की यह पहल उसी व्यापक दिशा में एक ठोस कदम है।

२४ घंटे सहायता और विशेषज्ञ सेवा

साइबर अपराध से प्रभावित बच्चों और उनके परिवारों के लिए २४ घंटे सहायता की व्यवस्था की गई है। इस सेवा में साइबर कानून विशेषज्ञ, मनोवैज्ञानिक और डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञ शामिल होंगे, जो पीड़ितों को उनकी ज़रूरत के अनुसार सहायता प्रदान करेंगे। प्रशिक्षण और प्रमाणन प्राप्त शिक्षकों को राष्ट्रीय सुरक्षा डेटाबेस में भी शामिल किया जाएगा।

यह पहल न केवल वायुसेना परिवारों के बच्चों को, बल्कि भविष्य में देश के व्यापक डिजिटल सुरक्षा ढाँचे को मज़बूत करने की नींव रख सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि ये शिक्षक वास्तविक घटनाओं में कितनी सक्रियता से हस्तक्षेप कर पाते हैं। सीबीएसई के निर्देशों और इस पहल के बीच तालमेल एक अच्छा संकेत है, लेकिन यह कार्यक्रम अभी 42 स्कूलों तक सीमित है — देश में हज़ारों सरकारी और निजी स्कूल अभी भी इस सुरक्षा कवच से बाहर हैं। इस मॉडल को व्यापक बनाने के लिए नीतिगत इच्छाशक्ति और संसाधनों की ज़रूरत होगी।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय वायुसेना का 'स्क्रॉलकंट्रोल' बाल डिजिटल सुरक्षा कार्यक्रम क्या है?
यह एक विशेष साइबर सुरक्षा कार्यक्रम है जिसे भारतीय वायुसेना ने देशभर के 42 स्कूलों में लागू किया है। इसके तहत 261 शिक्षकों को ऑनलाइन शोषण, साइबर अपराध और डिजिटल धोखाधड़ी से बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
इस कार्यक्रम से बच्चों को कौन-से साइबर खतरों से सुरक्षा मिलेगी?
यह कार्यक्रम ऑनलाइन शोषण, अनुचित संपर्क, एआई के दुरुपयोग, ऑनलाइन गेमिंग के खतरों और आर्थिक धोखाधड़ी जैसे खतरों से बच्चों को बचाने पर केंद्रित है। इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग की जागरूकता भी इसका अहम हिस्सा है।
'साइबर सुरक्षित स्कूल' का दर्जा किसे मिलेगा?
कार्यक्रम के तहत निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले वायुसेना स्कूलों को आधिकारिक रूप से 'साइबर सुरक्षित स्कूल' के रूप में मान्यता दी जाएगी। यह मान्यता स्कूल के डिजिटल सुरक्षा ढाँचे की पुष्टि करेगी।
साइबर अपराध के शिकार बच्चों को किस तरह की सहायता मिलेगी?
प्रभावित बच्चों और उनके परिवारों को 24 घंटे सहायता उपलब्ध होगी जिसमें साइबर कानून विशेषज्ञ, मनोवैज्ञानिक और डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह सेवा आवश्यकता के अनुसार पीड़ितों को व्यक्तिगत सहायता प्रदान करेगी।
यह पहल किसने और कब शुरू की?
यह पहल वायुसेना शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सोसायटी ने आईएसएसी फाउंडेशन के सहयोग से राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता माह के दौरान शुरू की। इसका उद्देश्य वायुसेना स्कूलों में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और स्कूल स्तर पर मज़बूत सुरक्षा व्यवस्था तैयार करना है।
राष्ट्र प्रेस
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