एसटी हसन का केशव प्रसाद मौर्य पर पलटवार: 'इंडिया गठबंधन की रैली में उमड़ी भीड़ BJP को दिख नहीं रही'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन ने 2 नवंबर 2026 को मुरादाबाद में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की उस टिप्पणी पर तीखा पलटवार किया, जिसमें मौर्य ने इंडिया गठबंधन की हालिया रैली को कमज़ोर बताया था। हसन ने दावा किया कि रैली में इतनी भीड़ थी कि मैदान में पैर रखने की जगह नहीं थी और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) जनता के बदलते मिज़ाज को भाँपकर घबराहट में ऐसी बातें कर रही है।
रैली की भीड़ पर विवाद
हसन ने कहा कि केशव प्रसाद मौर्य का रैली को 'फ्लॉप' बताना स्वाभाविक है, क्योंकि विपक्ष की जनसभाओं में उमड़ती भीड़ सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। उन्होंने तर्क दिया कि विपक्ष का मकसद जनता तक एक स्पष्ट संदेश पहुँचाना था और वह लक्ष्य पूरा हो गया। हसन के अनुसार रैली की सफलता के बाद ही सत्ताधारी पक्ष को महसूस हो रहा है कि जनता उसे नकार रही है, इसीलिए इस प्रकार की टिप्पणियाँ की जा रही हैं।
मतदाता सूची विवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के उस आरोप पर भी हसन ने अपनी प्रतिक्रिया दी, जिसमें मतदाता सूची से एक करोड़ हिंदू मतदाताओं के नाम हटाए जाने की बात कही गई थी। हसन ने कहा कि यादव तथ्यों के आधार पर बोलते हैं और उनकी बातों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सूची से केवल हिंदुओं के नाम नहीं, बल्कि मुसलमानों, विपक्षी दलों के समर्थकों और पीडीए से जुड़े लोगों के नाम भी काटे गए हैं। इस मुद्दे को लेकर आंदोलन जारी है। हसन ने चेताया कि यदि मतदान से पहले ही जीत-हार तय हो जाए, तो चुनाव कराने का औचित्य क्या रह जाता है — यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए एक गंभीर प्रश्न है।
यूपी के हिंदू-मुस्लिम सौहार्द पर बयान
उत्तर प्रदेश के मुसलमानों की तुलना फिलिस्तीनियों से किए जाने पर मौलाना जरजिस की आलोचना करते हुए हसन ने इस तुलना को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में हिंदू और मुसलमान सदियों से आपसी प्रेम और भाईचारे के साथ रहते आए हैं। कभी-कभी मतभेद हो सकते हैं, किंतु संकट के वक्त दोनों समुदाय एक-दूसरे के साथ खड़े होते हैं। हसन ने कहा कि प्रदेश में फिलिस्तीन जैसे हालात बनने की कल्पना करना भी गलत और भ्रामक है।
राम जन्मभूमि और राम मंदिर पर स्पष्टीकरण
भगवान राम के जन्मस्थान को लेकर पूर्व में दिए गए अपने बयानों पर सफाई देते हुए हसन ने कहा कि भगवान राम का जन्म भारत में हुआ था और हिंदू-मुसलमान दोनों उनका सम्मान करते हैं। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले का उल्लेख किया, जिसके तहत विवादित स्थल पर मंदिर निर्माण और मस्जिद के लिए अलग भूमि देने का निर्णय हुआ था। इसके साथ ही हसन ने राम मंदिर में कथित चोरी की घटना और उस मामले में पुलिस की कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल उठाए। आगे की राजनीतिक हलचल उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।