अरुणाचल के नंपोंग में शहीद हवलदार जंगखोकाई कुकी को आईटीबीपी ने दी श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने 2 नवंबर 2026 को 21 असम राइफल्स के हवलदार जंगखोकाई कुकी को श्रद्धांजलि अर्पित की, जो अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग जिले में उग्रवादियों के घात-हमले में शहीद हुए थे। 29 सितंबर को नंपोंग में भारत-म्यांमार सीमा के निकट गश्त के दौरान किए गए इस हमले में 42 वर्षीय हवलदार कुकी ने सर्वोच्च बलिदान दिया, जबकि चार अन्य जवान घायल हो गए।
श्रद्धांजलि और आईटीबीपी का संदेश
आईटीबीपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हवलदार कुकी को याद करते हुए लिखा, '21 असम राइफल्स के हवलदार जंगखोकाई कुकी को श्रद्धांजलि, जिन्होंने नंपोंग (अरुणाचल प्रदेश) में उग्रवादी हमले के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका साहस और बलिदान सदैव याद रखा जाएगा।' बल ने उनकी कर्तव्यनिष्ठा और शौर्य को राष्ट्र की अमूल्य धरोहर बताया।
हमले का घटनाक्रम
29 सितंबर को चांगलांग जिले में नंपोंग सर्किल के नंपोंग नाले के समीप संदिग्ध उग्रवादियों ने 21 असम राइफल्स की गश्ती टीम पर घात लगाकर अचानक गोलियाँ बरसाईं। अधिकारियों के अनुसार, यह घटना उस क्षेत्र में हुई जहाँ सीमा पर फेंसिंग का कार्य चल रहा है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, अचानक हुई गोलीबारी में हवलदार जंगखोकाई कुकी ने मौके पर ही वीरगति प्राप्त की।
घायल चार जवानों को तत्काल नज़दीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। कुछ रिपोर्टों में NSCN-K-YA (एनएससीएन-के-वाईए) से जुड़े उग्रवादियों की संलिप्तता की आशंका जताई गई है, हालाँकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया
घटना के तत्काल बाद सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र में व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया और अतिरिक्त जवानों को मौके पर रवाना किया गया। हमलावरों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए सघन अभियान जारी है। यह क्षेत्र भारत-म्यांमार सीमा की संवेदनशीलता के कारण सुरक्षा दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
व्यापक परिप्रेक्ष्य
गौरतलब है कि अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग और तिरप जिले वर्षों से उग्रवादी गतिविधियों के लिहाज़ से संवेदनशील रहे हैं। भारत-म्यांमार सीमा पर फेंसिंग परियोजना के चलते इस क्षेत्र में सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ी है, जिससे उग्रवादी समूहों के साथ टकराव की आशंका भी बनी रहती है। हवलदार कुकी का बलिदान इसी संवेदनशील पट्टी की सुरक्षा में जान की बाज़ी लगाने की कड़ी में एक और दुखद अध्याय है।
सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, म्यांमार में चल रही राजनीतिक उथल-पुथल के बाद से पूर्वोत्तर सीमावर्ती क्षेत्रों में उग्रवादी घुसपैठ की घटनाएँ बढ़ी हैं। तलाशी अभियान का नतीजा और हमलावरों की पहचान आगे की कार्रवाई की दिशा तय करेगी।