मणिपुर: जिरीबाम में संदिग्ध नागा उग्रवादियों ने दो कुकी महिलाओं की गोली मारकर हत्या की
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के जिरीबाम जिले के लेइसंगफाई में मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को संदिग्ध नागा सशस्त्र समूह के सदस्यों ने कुकी समुदाय की दो महिलाओं की गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस के अनुसार, दोनों महिलाएं अपने खेत में जलाने के लिए लकड़ियाँ इकट्ठा कर रही थीं, तभी हथियारबंद लोगों ने उन पर गोलीबारी की, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
मृतकों की पहचान
मृतकों की पहचान 60 वर्षीया चोंगा सिथलौ और 28 वर्षीया एनजी. किमनेओ सिंगसन के रूप में हुई है। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, सिंगसन ने हाल ही में अपना नर्सिंग कोर्स पूरा किया था और खेती-बाड़ी में अपने माता-पिता की मदद करने के लिए घर लौटी थीं। यह घटना तब और भी मार्मिक हो जाती है जब पता चलता है कि वे सामान्य दैनिक कार्यों में लगी थीं।
कुकी संगठनों का आरोप और विरोध का तरीका
कुकी समुदाय के संगठनों ने इस हमले के लिए एनएससीएन-आईएम और जेडयूएफ-के को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि यह घटना जिरीबाम, तामेंगलोंग और नोनी जिलों में कुकी नागरिकों पर हो रहे हमलों और हत्याओं की एक लंबी श्रृंखला का हिस्सा है।
समुदाय की मुख्य संस्था कुकी-जो काउंसिल (केजेडसी) ने एक असाधारण आदेश जारी किया है, जिसमें समुदाय वाले जिलों के सभी नागरिक समाज संगठनों से कहा गया कि अगले आदेश तक नागा हथियारबंद समूहों द्वारा मारे गए किसी भी कुकी-जो व्यक्ति को दफनाया न जाए। काउंसिल के अनुसार, ऐसे हर पीड़ित के शव को नज़दीकी कोल्ड-स्टोरेज सुविधा में सुरक्षित रखा जाएगा।
काउंसिल ने अपने बयान में कहा, 'यह फैसला कुकी-जो नागरिकों की लगातार हो रही हत्याओं और इन हमलों के लिए न्याय व जवाबदेही सुनिश्चित न कर पाने के खिलाफ विरोध और प्रतिरोध का एक सोच-समझकर लिया गया सामूहिक कदम है।' संगठन का कहना है कि वे लोगों की मौतों को महज अलग-थलग घटनाएं मानकर भुला देने की इजाजत नहीं दे सकते।
तीन दिनों में छह हत्याओं का दावा
एक अन्य प्रमुख आदिवासी संगठन कुकी इनपी मणिपुर (केआईएम) ने दावा किया कि मंगलवार समेत पिछले तीन दिनों में छह निर्दोष कुकी ग्रामीणों की हत्या की गई है। केआईएम ने एनएससीएन-आईएम और जेडयूएफ (कामसन) द्वारा निर्दोष कुकी ग्रामीणों पर किए गए 'बिना उकसावे वाले हमले' की कड़ी निंदा की।
गौरतलब है कि यह हिंसा ऐसे समय में सामने आ रही है जब मणिपुर में मैतेई-कुकी संघर्ष की पृष्ठभूमि में पहले से ही जातीय तनाव बरकरार है। अब कुकी-नागा आयाम के उभरने से स्थिति और अधिक जटिल हो गई है।
सरकार से जवाबदेही की माँग
केआईएम ने केंद्र और राज्य सरकारों पर कड़े सवाल उठाते हुए पूछा, 'केंद्र और राज्य सरकारें कहाँ हैं? निर्दोष कुकी-जो नागरिकों पर बार-बार हो रहे हमलों के बावजूद अधिकारी कब तक चुप रहेंगे?' संगठन ने कहा कि सरकार कुकी-जो लोगों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों से अनजान होने का नाटक नहीं कर सकती।
केआईएम ने केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की कि वे हमलों को रोकने, बेगुनाह नागरिकों की रक्षा करने, खतरे वाले गाँवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और हत्याओं के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा दिलाने के लिए तुरंत और कड़े कदम उठाएं। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि वह नहीं चाहता कि सशस्त्र समूहों की हरकतों से कुकी और नागा समुदायों के बीच आपसी संबंध और खराब हों, लेकिन बेगुनाह नागरिकों को लगातार निशाना बनाए जाने से हालात खतरनाक मोड़ पर पहुँच रहे हैं।
दोनों मृत महिलाओं के परिजनों ने भी तय किया है कि जब तक न्याय नहीं मिलता, तब तक शव नहीं लिए जाएंगे — यह पीड़ा और प्रतिरोध का एक साथ आया दुखद प्रतीक है।