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पाकिस्तान में पोलियो उन्मूलन को झटका: खैबर पख्तूनख्वा में 2026 का आठवाँ मामला दर्ज

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पाकिस्तान में पोलियो उन्मूलन को झटका: खैबर पख्तूनख्वा में 2026 का आठवाँ मामला दर्ज

सारांश

कई दौर के टीकाकरण और 4.5 करोड़ से अधिक बच्चों तक पहुँच के बावजूद, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में 2026 का आठवाँ पोलियो मामला सामने आया है। 13 महीने की एक बच्ची इस वायरस की चपेट में आई — यह संकेत है कि वायरस अब भी ज़मीन पर सक्रिय है।

मुख्य बातें

खैबर पख्तूनख्वा के तहसील बारा में 13 महीने की बच्ची में पोलियो की पुष्टि; यह 2026 का आठवाँ राष्ट्रीय मामला।
इस वर्ष के कुल 8 मामलों में से 6 खैबर पख्तूनख्वा से और 2 सिंध से हैं।
पेशावर ब्लॉक में पर्यावरणीय निगरानी में अब भी पोलियो वायरस के सक्रिय संकेत मिल रहे हैं।
2026 में अब तक 4 बड़े अभियानों में 4.5 करोड़ से अधिक बच्चों को टीका लगाया जा चुका है।
2 से 8 नवंबर 2026 के बीच 97 ज़िलों में 2.4 करोड़ बच्चों को पोलियो खुराक देने का अभियान चलेगा।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान दुनिया के अंतिम दो देश हैं जहाँ पोलियो का सामुदायिक प्रसार जारी है।

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में 2 नवंबर 2026 को पोलियो का एक नया मामला सामने आया है — यह इस वर्ष देश में दर्ज आठवाँ पोलियो केस है। तहसील बारा के यूनियन काउंसिल जनबाज-बी की 13 महीने की एक बच्ची में वायरस की पुष्टि हुई है, जो यह संकेत देती है कि कई दौर के टीकाकरण अभियानों के बावजूद बच्चों तक वैक्सीन की पहुँच में अब भी गंभीर कमियाँ बनी हुई हैं।

मामले का विवरण

रिपोर्टों के अनुसार, यह खैबर ज़िले से इस साल सामने आया दूसरा पोलियो मामला है, जबकि पूरे खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में यह छठा मामला है। इस वर्ष अब तक सामने आए कुल आठ मामलों में से छह अकेले खैबर पख्तूनख्वा से हैं — इनमें चार प्रांत के दक्षिणी क्षेत्रों से जुड़े हैं — जबकि दो मामले सिंध प्रांत से रिपोर्ट हुए हैं।

पर्यावरणीय निगरानी में भी वायरस के संकेत

अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि पेशावर ब्लॉक — जिसमें खैबर और पेशावर ज़िले शामिल हैं — में पर्यावरणीय निगरानी के दौरान अब भी पोलियो वायरस के सक्रिय संकेत मिल रहे हैं। इसका अर्थ है कि वायरस भूमिगत स्तर पर फैलता रहा है, भले ही नैदानिक मामलों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही हो। यह ऐसे समय में आया है जब विश्व स्वास्थ्य समुदाय पाकिस्तान पर पोलियो-मुक्त देशों में फैलाव रोकने का दबाव बढ़ा रहा है।

टीकाकरण अभियानों की स्थिति

पाकिस्तान पोलियो उन्मूलन पहल (PEI) ने नए मामले की जाँच शुरू कर दी है और वायरस के आगे प्रसार को रोकने के लिए रणनीति तैयार की जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, 2026 में अब तक पाकिस्तान चार बड़े पोलियो टीकाकरण अभियान चला चुका है, जिनके तहत 4.5 करोड़ से अधिक बच्चों को कई बार पोलियो वैक्सीन दी गई है। सितंबर में चलाए गए एक उप-राष्ट्रीय अभियान में लगभग 2.93 करोड़ बच्चों तक पहुँच बनाई गई थी।

अगला टीकाकरण अभियान 2 से 8 नवंबर 2026 के बीच चलाया जाएगा, जिसके तहत 97 ज़िलों में करीब 2.4 करोड़ बच्चों को पोलियो की खुराक देने का लक्ष्य है — इसमें खैबर ज़िला भी शामिल है। अभियान में मौखिक और इंजेक्शन वाली दोनों प्रकार की वैक्सीन दी जाएगी।

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

गौरतलब है कि 1990 के दशक की शुरुआत में पाकिस्तान में अनुमानित 20,000 पोलियो मामले सामने आते थे। 2025 में यह संख्या घटकर केवल 31 रह गई थी — जो दशकों की मेहनत का परिणाम है। फिर भी, वायरस का पूर्ण उन्मूलन अब तक संभव नहीं हो पाया है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान दुनिया के वे दो अंतिम देश हैं जहाँ पोलियो वायरस का सामुदायिक प्रसार पूरी तरह बंद नहीं हुआ है।

पोलियो का खतरा और बचाव

पोलियो एक अत्यंत संक्रामक वायरल बीमारी है जिसका कोई इलाज नहीं है। यह मुख्यतः पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों को प्रभावित करती है और जीवनभर के लिए लकवे (पैरालिसिस) का कारण बन सकती है; गंभीर मामलों में यह मृत्यु का कारण भी बन सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, टीकाकरण इससे बचाव का एकमात्र प्रभावी तरीका है। आने वाले हफ्तों में PEI की रणनीति और खैबर ब्लॉक में पर्यावरणीय निगरानी के नतीजे यह तय करेंगे कि वायरस पर काबू पाना कितना करीब है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 मामलों से 2025 में 31 तक का सफर उल्लेखनीय है, लेकिन आठवाँ मामला यह बताता है कि खैबर पख्तूनख्वा में टीकाकरण की 'पहुँच' और 'प्रभावी सुरक्षा' के बीच अंतर अभी पाटा नहीं गया। पर्यावरणीय निगरानी में वायरस के लगातार संकेत मिलना सबसे चिंताजनक पहलू है — यह संकेत है कि प्रकोप की नहीं, बल्कि चुप्पे प्रसार की समस्या है, जो नैदानिक आँकड़ों से कहीं बड़ी हो सकती है। जब तक सुरक्षा की खाइयाँ — भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक — नहीं भरतीं, नए मामले आते रहेंगे और वैश्विक पोलियो मुक्ति का सपना अधूरा रहेगा।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान में 2026 का आठवाँ पोलियो मामला कहाँ और किसमें सामने आया?
यह मामला खैबर पख्तूनख्वा के तहसील बारा, यूनियन काउंसिल जनबाज-बी में 13 महीने की एक बच्ची में पाया गया। यह खैबर ज़िले से इस साल का दूसरा और पूरे प्रांत से छठा पोलियो मामला है।
2026 में पाकिस्तान में कुल कितने पोलियो मामले आए हैं और वे किन प्रांतों से हैं?
2026 में अब तक पाकिस्तान में कुल 8 पोलियो मामले दर्ज हुए हैं — इनमें से 6 खैबर पख्तूनख्वा से (जिनमें 4 दक्षिणी क्षेत्रों से) और 2 सिंध प्रांत से हैं।
पाकिस्तान पोलियो उन्मूलन के लिए क्या कदम उठा रहा है?
पाकिस्तान पोलियो उन्मूलन पहल (PEI) ने नए मामले की जाँच शुरू की है। 2026 में अब तक 4 बड़े अभियानों के तहत 4.5 करोड़ से अधिक बच्चों को टीका लगाया जा चुका है। अगला अभियान 2 से 8 नवंबर 2026 के बीच 97 ज़िलों में लगभग 2.4 करोड़ बच्चों को खुराक देने के लक्ष्य के साथ चलाया जाएगा।
पोलियो क्या है और यह बच्चों के लिए क्यों खतरनाक है?
पोलियो एक अत्यंत संक्रामक वायरल बीमारी है जिसका कोई इलाज नहीं है। यह बच्चों में जीवनभर के लिए लकवे का कारण बन सकती है और गंभीर मामलों में मृत्यु भी हो सकती है। टीकाकरण इससे बचाव का एकमात्र प्रभावी तरीका है।
पाकिस्तान में पोलियो अभी तक खत्म क्यों नहीं हुआ?
बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियानों के बावजूद, खैबर पख्तूनख्वा जैसे उच्च-जोखिम वाले क्षेत्रों में वैक्सीन की पहुँच में अभी भी कमियाँ हैं। पेशावर ब्लॉक में पर्यावरणीय निगरानी में अब भी वायरस के सक्रिय संकेत मिल रहे हैं। पाकिस्तान और अफगानिस्तान दुनिया के अंतिम दो देश हैं जहाँ पोलियो वायरस का सामुदायिक प्रसार पूरी तरह बंद नहीं हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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