कराची में पोलियोवायरस के 5 नए मामले, पाकिस्तान में इस साल कुल 3 बच्चे प्रभावित
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के कराची शहर में पोलियोवायरस एक बार फिर गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बनकर उभरा है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 7 मई 2026 को कराची के सीवेज और अन्य स्थानों से लिए गए 5 नमूनों में पोलियोवायरस की पुष्टि हुई है, जिससे स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता और गहरी हो गई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब आमतौर पर इस मौसम में वायरस का प्रसार कम रहता है।
मुख्य घटनाक्रम
सिंध इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ एंड नियोनेटोलॉजी (SICHN) में आयोजित एक परामर्श बैठक में स्वास्थ्य विशेषज्ञ शहरयार मेमन ने बताया कि कराची में वायरस की मौजूदगी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि संक्रमण अब भी सक्रिय रूप से फैल रहा है। उन्होंने कहा कि कम संक्रमण वाले मौसम में भी वायरस का इस तरह सक्रिय रहना बेहद चिंताजनक है और इसके लिए तत्काल सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है।
इस बैठक में यूनिसेफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन, पाकिस्तान पीडियाट्रिक एसोसिएशन और पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन सहित कई प्रमुख संस्थाओं के विशेषज्ञ शामिल हुए। WHO के प्रतिनिधि जॉर्ज ने कहा कि अफ्रीका में सफल साबित हुई रणनीतियों को अब पाकिस्तान में भी लागू किया जा रहा है, ताकि वायरस के प्रसार को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।
खैबर पख्तूनख्वा में भी नए मामले
पिछले सप्ताह खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से पोलियो के 2 नए मामले सामने आए — एक बन्नू से और दूसरा नॉर्थ वजीरिस्तान से। इस साल अब तक पाकिस्तान में पोलियो के कुल 3 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन मामलों की पुष्टि राष्ट्रीय पोलियो निगरानी नेटवर्क और WHO से मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला द्वारा की गई है। गौरतलब है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान दुनिया के वे केवल दो देश हैं जहाँ अब भी पोलियो के मामले सामने आते हैं।
सुरक्षा चुनौतियाँ और टीकाकरण में बाधाएँ
पोलियो उन्मूलन अभियान के सामने सुरक्षा चुनौतियाँ भी लगातार बनी हुई हैं। हाल ही में खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में टीकाकरण टीमों पर हमले हुए, जिनमें पुलिसकर्मी मारे गए और कुछ स्वास्थ्यकर्मियों का अपहरण भी किया गया। इन हमलों ने टीकाकरण कर्मियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वैक्सीन से इनकार: कराची में 31 हजार परिवार
टीके को लेकर फैली गलत जानकारी और अभिभावकों द्वारा वैक्सीन से इनकार भी एक बड़ी बाधा बनी हुई है। केवल कराची में ही लगभग 31,000 परिवारों ने पोलियो ड्रॉप्स देने से मना कर दिया है, जो पूरे देश के कुल इनकार मामलों का करीब 58 प्रतिशत है। यह आँकड़ा दर्शाता है कि वायरस के विरुद्ध लड़ाई में सामाजिक जागरूकता और विश्वास निर्माण उतना ही ज़रूरी है जितना चिकित्सीय हस्तक्षेप।
आगे क्या
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पाकिस्तान में पोलियोवायरस की मौजूदगी बनी रहेगी, तब तक वैश्विक स्तर पर पोलियो उन्मूलन का लक्ष्य अधूरा रहेगा। आने वाले हफ्तों में सिंध सहित अन्य प्रभावित प्रांतों में गहन टीकाकरण अभियान चलाए जाने की उम्मीद है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय संगठनों की सक्रिय भागीदारी रहेगी।