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पोलियो पर काबू नहीं: 100 मिलियन डॉलर की मदद के बाद भी पाकिस्तान के सभी प्रांतों में फैला वायरस

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पोलियो पर काबू नहीं: 100 मिलियन डॉलर की मदद के बाद भी पाकिस्तान के सभी प्रांतों में फैला वायरस

सारांश

पाकिस्तान में 100 मिलियन डॉलर की अंतरराष्ट्रीय मदद के बावजूद पोलियो वायरस बेकाबू है। WHO ने चेतावनी दी है कि WPV-1 अब पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा सहित सभी प्रमुख प्रांतों में फैल चुका है। भ्रष्टाचार, राजनीतिक उदासीनता और गलत सूचनाएं इस संकट की जड़ में हैं।

मुख्य बातें

100 मिलियन डॉलर से अधिक की अंतरराष्ट्रीय सहायता के बावजूद पाकिस्तान पोलियो उन्मूलन में विफल रहा है।
WHO ने चेतावनी दी है कि WPV-1 अब पाकिस्तान के सभी प्रमुख प्रांतों — पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा — में फैल चुका है।
गिलगित-बाल्टिस्तान में आठ साल बाद पहली बार पोलियो का मामला दर्ज हुआ है।
पिछले दो वर्षों में पाकिस्तान में WPV-1 के 100 से अधिक सक्रिय मामले सामने आए हैं।
विशेषज्ञ भ्रष्टाचार, चरमपंथी प्रचार, राजनीतिक उदासीनता और कमजोर स्वास्थ्य ढांचे को इस संकट का मुख्य कारण मानते हैं।
विडंबना यह है कि तालिबान शासित अफगानिस्तान में पोलियो के मामले घट रहे हैं जबकि पाकिस्तान में बढ़ रहे हैं।

पाकिस्तान में पोलियो वायरस (WPV-1) तेजी से पूरे देश में पैर पसार रहा है और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि यह वायरस अब देश के सभी प्रमुख प्रांतों तक पहुंच चुका है। चिंताजनक बात यह है कि 2023 से अब तक 100 मिलियन डॉलर से अधिक की अंतरराष्ट्रीय सहायता मिलने के बाद भी पाकिस्तान पोलियो उन्मूलन में पूरी तरह विफल रहा है। एथेंस स्थित जियोपॉलिटिको की रिपोर्ट के अनुसार, भ्रष्टाचार, प्रशासनिक लापरवाही और टीकाकरण के प्रति जनता की हिचकिचाहट इस संकट की मुख्य वजहें हैं।

दुनिया में सिर्फ दो देशों में जिंदा है वाइल्ड पोलियो वायरस

वर्तमान में पूरी दुनिया में केवल पाकिस्तान और अफगानिस्तान ही दो ऐसे देश हैं जहां वाइल्ड पोलियो वायरस टाइप-1 (WPV-1) अभी भी सक्रिय है। विडंबना यह है कि अफगानिस्तान में तालिबान शासन के दौरान पोलियो के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है, जबकि पाकिस्तान में पिछले दो वर्षों में WPV-1 के 100 से अधिक सक्रिय मामले दर्ज किए गए हैं। यह तुलना पाकिस्तानी प्रशासन की विफलता को और अधिक उजागर करती है।

WHO की पोलियो IHR इमरजेंसी कमेटी ने बताया कि 2025 तक भी यह वायरस फैलता जा रहा है, जिसमें लाहौर और देश के केंद्रीय जिले भी शामिल हैं। गिलगित-बाल्टिस्तान में आठ साल बाद पहली बार WPV-1 का मामला सामने आना इस संकट की गहराई को दर्शाता है।

कौन-कौन से प्रांत हैं वायरस की चपेट में

2023 के मध्य से ही मामलों में वृद्धि देखी जाने लगी थी। खैबर पख्तूनख्वा, सिंध और बलूचिस्तान में स्थिति सबसे गंभीर रही। अब यह वायरस अपेक्षाकृत विकसित माने जाने वाले पंजाब प्रांत तक भी पहुंच गया है, जो यह बताता है कि संक्रमण की रोकथाम में पाकिस्तान की स्वास्थ्य प्रणाली पूरी तरह चरमरा गई है।

स्वास्थ्य प्रणाली की संरचनात्मक कमजोरियां

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की स्वास्थ्य प्रणाली की संरचनात्मक खामियां इस बीमारी को जड़ से खत्म करने में सबसे बड़ी बाधा हैं। पाकिस्तान के विकास सलाहकार नवाब अली खट्टक ने माना कि लॉजिस्टिक बाधाएं, सुरक्षा खतरे, गलत सूचनाओं का प्रसार और भ्रष्टाचार पोलियो के पुनः फैलाव के प्रमुख कारण हैं।

मुख्य चुनौतियों में शामिल हैं — दूरदराज के इलाकों में चिकित्सा टीमों के लिए परिवहन का अभाव, अपर्याप्त प्रशिक्षण, टीकों की कमी, खराब समन्वय और जवाबदेही, राजनीतिक हस्तक्षेप और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का असमान वितरण जो मुख्यतः अभिजात वर्ग तक सीमित है।

चरमपंथी प्रचार और सरकारी उदासीनता

पाकिस्तान स्थित शिक्षाविद असदुल्लाह चन्ना ने इस संकट की एक और परत उजागर की। उनके अनुसार, सरकार चरमपंथी विचारधाराओं का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने में नाकाम रही, जिससे वर्षों तक फैली गलत जानकारी ने जनता में टीकों के प्रति अविश्वास और इनकार की भावना को बढ़ावा दिया।

चन्ना का तर्क है कि लगातार सरकारें इस कट्टरपंथी प्रचार का मुकाबला करने में असफल रही हैं। मौजूदा नेतृत्व सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं की बजाय राजनीतिक और न्यायिक गतिविधियों में अधिक व्यस्त है, जो इस संकट को और गहरा कर रहा है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की बढ़ती चिंता

पाकिस्तान से सीमापार संक्रमण के फैलाव की आशंका ने वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों को चिंतित कर दिया है। 100 मिलियन डॉलर से अधिक की अंतरराष्ट्रीय सहायता के बावजूद परिणाम शून्य रहना यह सवाल उठाता है कि यह धनराशि कहां और कैसे खर्च हुई। आलोचकों का कहना है कि इस विफलता की जवाबदेही तय किए बिना और अधिक वित्तीय सहायता देना व्यर्थ साबित होगा।

यदि पाकिस्तान जल्द ठोस कदम नहीं उठाता, तो आने वाले महीनों में WHO की ओर से और कड़े प्रतिबंध और अंतरराष्ट्रीय दबाव देखने को मिल सकता है, जिसका असर पाकिस्तान की वैश्विक यात्रा नीतियों पर भी पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह एक राज्य की संस्थागत बर्बादी का प्रमाण है। जिस देश में 100 मिलियन डॉलर की वैश्विक सहायता धूल में मिल जाए और वायरस और फैले, वहां जवाबदेही का पूरी तरह अभाव है। विडंबना देखिए — तालिबान शासित अफगानिस्तान में पोलियो के मामले घटे, जबकि लोकतांत्रिक पाकिस्तान में बढ़े। यह सिर्फ भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि राजनीतिक प्राथमिकताओं के पूरी तरह भटक जाने का संकेत है — जहां सत्ता का खेल बच्चों की जान से ज्यादा अहम हो गया है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान में पोलियो क्यों नहीं खत्म हो रहा?
पाकिस्तान में भ्रष्टाचार, प्रशासनिक कमजोरियां, टीकों के प्रति जनता की हिचकिचाहट और चरमपंथी प्रचार पोलियो उन्मूलन में सबसे बड़ी बाधाएं हैं। 100 मिलियन डॉलर से अधिक की अंतरराष्ट्रीय सहायता के बावजूद सरकार इन समस्याओं से निपटने में विफल रही है।
WHO ने पाकिस्तान के पोलियो को लेकर क्या चेतावनी दी है?
WHO की पोलियो IHR इमरजेंसी कमेटी ने चेतावनी दी है कि WPV-1 अब पाकिस्तान के सभी बड़े प्रांतों में फैल चुका है, जिसमें लाहौर और केंद्रीय जिले शामिल हैं। 2025 तक भी यह प्रसार जारी है।
दुनिया में अभी कहां-कहां पोलियो बाकी है?
वर्तमान में केवल पाकिस्तान और अफगानिस्तान में वाइल्ड पोलियो वायरस टाइप-1 (WPV-1) सक्रिय है। अफगानिस्तान में मामले घट रहे हैं जबकि पाकिस्तान में पिछले दो वर्षों में 100 से अधिक मामले सामने आए हैं।
पाकिस्तान को पोलियो के लिए कितनी अंतरराष्ट्रीय मदद मिली है?
2023 से अब तक पाकिस्तान को पोलियो उन्मूलन के लिए 100 मिलियन डॉलर से अधिक की अंतरराष्ट्रीय सहायता मिल चुकी है। इसके बावजूद वायरस पर नियंत्रण नहीं हो पाया है।
गिलगित-बाल्टिस्तान में पोलियो का मामला क्यों चिंताजनक है?
गिलगित-बाल्टिस्तान में आठ साल बाद पहली बार WPV-1 का मामला सामने आया है, जो दर्शाता है कि वायरस उन इलाकों में भी पहुंच रहा है जो पहले सुरक्षित माने जाते थे। यह संकट की गहराई और फैलाव की गंभीरता को रेखांकित करता है।
राष्ट्र प्रेस
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