23 जुलाई 2026
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दिल्ली LG टीएस संधू ने लॉन्च की 'नेशनल मॉडल स्कूल सेफ्टी टूलकिट', साइबर व मानसिक सुरक्षा पर दिया जोर

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दिल्ली LG टीएस संधू ने लॉन्च की 'नेशनल मॉडल स्कूल सेफ्टी टूलकिट', साइबर व मानसिक सुरक्षा पर दिया जोर

सारांश

दिल्ली के उपराज्यपाल टीएस संधू ने 'सेफ स्कूल्स लीडरशिप 2026' सम्मेलन में 'नेशनल मॉडल स्कूल सेफ्टी टूलकिट' लॉन्च की और साफ़ कहा — स्कूल सुरक्षा अब सिर्फ दीवारों और गेटों तक नहीं, साइबर खतरों और मानसिक स्वास्थ्य तक फैली है।

मुख्य बातें

दिल्ली के उपराज्यपाल टीएस संधू ने 23 जुलाई 2026 को पीएचडी हाउस, नई दिल्ली में 'सेफ स्कूल्स लीडरशिप 2026' राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया।
'नेशनल मॉडल स्कूल सेफ्टी टूलकिट' का विमोचन किया गया, जो स्कूलों में सुरक्षा संस्कृति को संस्थागत बनाने की पहल है।
संधू ने स्कूल सुरक्षा के दायरे में साइबर सुरक्षा , मानसिक स्वास्थ्य और आपदा-तैयारी को शामिल करने पर बल दिया।
नियमित सुरक्षा ऑडिट , मॉक ड्रिल , डेटा-आधारित जोखिम आकलन और स्कूल-सरकार-समुदाय समन्वय की आवश्यकता रेखांकित की गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शिक्षा-दर्शन को उद्धृत करते हुए कहा गया कि सुरक्षित माहौल के बिना सीखने की प्रक्रिया अधूरी है।

दिल्ली के उपराज्यपाल टीएस संधू ने 23 जुलाई 2026 को पीएचडी हाउस, नई दिल्ली में आयोजित 'सेफ स्कूल्स लीडरशिप 2026' राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए स्कूलों में सुरक्षा के प्रति एक व्यापक और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर उन्होंने 'नेशनल मॉडल स्कूल सेफ्टी टूलकिट' का भी विमोचन किया।

सुरक्षा का बदलता दायरा

उपराज्यपाल संधू ने रेखांकित किया कि आज के दौर में स्कूल सुरक्षा का अर्थ केवल भौतिक बुनियादी ढाँचे तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने कहा कि इसमें साइबर सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और आपदा-तैयारी जैसे आयाम भी अनिवार्य रूप से शामिल हो गए हैं। उनके अनुसार शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य ऐसा परिवेश निर्मित करना है जहाँ युवा मन निर्भीक होकर सीख सकें, विकसित हो सकें और अपनी क्षमताओं को पहचान सकें — और यह प्रक्रिया सुरक्षा की बुनियादी भावना के अभाव में संभव नहीं है।

नेशनल मॉडल स्कूल सेफ्टी टूलकिट का विमोचन

सम्मेलन के दौरान संधू ने 'नेशनल मॉडल स्कूल सेफ्टी टूलकिट' लॉन्च की और इसे स्कूलों में बचाव एवं तैयारी की संस्कृति को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने स्कूल नेतृत्वकर्ताओं से आग्रह किया कि वे सुरक्षा को महज़ अनुपालन की औपचारिकता न मानें, बल्कि इसे संस्थागत नेतृत्व का अभिन्न अंग समझें।

स्कूल नेताओं के लिए सुझाव

उपराज्यपाल ने स्कूल प्रमुखों को सुझाव दिया कि वे नियमित सुरक्षा ऑडिट, आपातकालीन तैयारी योजनाएँ, समय-समय पर मॉक ड्रिल, प्रशिक्षित स्टाफ और स्कूलों, सरकारी एजेंसियों तथा स्थानीय समुदायों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, अर्ली वार्निंग सिस्टम और डेटा-आधारित जोखिम आकलन के माध्यम से तकनीक की भूमिका तेज़ी से बढ़ रही है।

प्रधानमंत्री के विचारों का संदर्भ

संधू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस कथन का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने कहा था कि 'शिक्षा केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने का एक सशक्त माध्यम है।' उपराज्यपाल ने कहा कि इस सोच को साकार करने के लिए हर बच्चे को सुरक्षित और अनुकूल वातावरण में सीखने का अवसर मिलना अनिवार्य है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि तकनीकी समाधानों के साथ-साथ मानवीय तैयारी और प्रतिबद्ध नेतृत्व का होना उतना ही ज़रूरी है।

सम्मेलन से अपेक्षाएँ

उपराज्यपाल ने आशा व्यक्त की कि यह राष्ट्रीय सम्मेलन सभी हितधारकों की उस साझा प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करेगा जिसके तहत प्रत्येक स्कूल को ऐसा स्थान बनाया जाए जहाँ बच्चे भय-मुक्त होकर सीखें, आत्मविश्वास से भरें और भविष्य की चुनौतियों व अवसरों के लिए तैयार हों। यह सम्मेलन स्कूल सुरक्षा के राष्ट्रीय एजेंडे को नई दिशा देने का अवसर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की है — दिल्ली के सरकारी स्कूलों में बुनियादी भौतिक सुरक्षा मानक अभी भी असमान हैं, ऐसे में साइबर और मानसिक सुरक्षा की बात तब तक अधूरी रहेगी जब तक बुनियाद मज़बूत न हो। 'नेशनल मॉडल स्कूल सेफ्टी टूलकिट' एक उपयोगी ढाँचा हो सकती है, बशर्ते इसे केवल कागज़ी दस्तावेज़ न बनाया जाए। सम्मेलन में घोषित सिद्धांतों को ज़मीन पर उतारने के लिए बजट आवंटन, समयबद्ध लक्ष्य और स्वतंत्र जवाबदेही तंत्र की आवश्यकता है — जिसका उल्लेख अभी तक सामने नहीं आया है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'नेशनल मॉडल स्कूल सेफ्टी टूलकिट' क्या है?
यह एक राष्ट्रीय दिशानिर्देश ढाँचा है जिसे दिल्ली के उपराज्यपाल टीएस संधू ने 23 जुलाई 2026 को 'सेफ स्कूल्स लीडरशिप 2026' सम्मेलन में लॉन्च किया। इसका उद्देश्य स्कूलों में सुरक्षा ऑडिट, आपातकालीन तैयारी और जोखिम आकलन की संस्कृति को संस्थागत बनाना है।
'सेफ स्कूल्स लीडरशिप 2026' सम्मेलन कहाँ और कब आयोजित हुआ?
यह राष्ट्रीय सम्मेलन 23 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के पीएचडी हाउस में आयोजित किया गया। इसमें दिल्ली के उपराज्यपाल टीएस संधू मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।
LG टीएस संधू के अनुसार आधुनिक स्कूल सुरक्षा में क्या-क्या शामिल है?
संधू के अनुसार स्कूल सुरक्षा अब केवल भौतिक बुनियादी ढाँचे तक सीमित नहीं है — इसमें साइबर सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और आपदा-तैयारी भी अनिवार्य रूप से शामिल हैं। उन्होंने डिजिटल मॉनिटरिंग, अर्ली वार्निंग सिस्टम और डेटा-आधारित जोखिम आकलन को भी ज़रूरी बताया।
स्कूल नेतृत्वकर्ताओं को LG ने क्या सुझाव दिए?
उपराज्यपाल संधू ने स्कूल प्रमुखों से कहा कि वे नियमित सुरक्षा ऑडिट, मॉक ड्रिल, आपातकालीन योजनाएँ और प्रशिक्षित स्टाफ सुनिश्चित करें। साथ ही स्कूलों, सरकारी एजेंसियों और स्थानीय समुदायों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी बल दिया।
इस सम्मेलन का महत्त्व क्या है?
यह सम्मेलन स्कूल सुरक्षा के राष्ट्रीय एजेंडे को नई दिशा देने का प्रयास है, जिसमें पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर साइबर और मानसिक सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई। 'नेशनल मॉडल स्कूल सेफ्टी टूलकिट' का लॉन्च इस दिशा में एक ठोस नीतिगत कदम माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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