किरोड़ीमल कॉलेज में एलजी टीएस संधू ने किया इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन, छात्रों से बोले — विकसित भारत की नींव आप रखेंगे
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली के उपराज्यपाल टीएस संधू ने 3 अगस्त 2026 को किरोड़ीमल कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के फ्रेशर्स ओरिएंटेशन प्रोग्राम 2026 को संबोधित किया और कॉलेज के नवस्थापित इनक्यूबेशन सेंटर का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने छात्रों से बौद्धिक जिज्ञासा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और स्वतंत्र चिंतन को अपने जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया।
संधू का संबोधन: जिज्ञासा और स्वतंत्र सोच पर जोर
उपराज्यपाल संधू ने नए छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में प्रवेश केवल एक डिग्री की शुरुआत नहीं, बल्कि बौद्धिक खोज, व्यक्तिगत विकास और दायरे बढ़ाने की यात्रा की शुरुआत है। उन्होंने छात्रों से सेवा, ईमानदारी और उत्कृष्टता के मूल्यों को आत्मसात करने पर विशेष बल दिया।
संधू ने कहा, "मैं दिल्ली विश्वविद्यालय की देन हूं।" उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन दोनों दिल्ली विश्वविद्यालय से पूरी की और कभी विदेश में पढ़ाई का अवसर नहीं लिया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि विदेश में देश की सेवा के दौरान जो भी योगदान उन्होंने दिया, उसकी नींव इसी विश्वविद्यालय में रखी गई थी।
इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन: नवाचार को मिलेगा मंच
कार्यक्रम के दौरान एलजी संधू ने किरोड़ी मल कॉलेज इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन किया, जो छात्रों को स्टार्टअप और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर देगा। इस मौके पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस कथन का उल्लेख किया कि "भारत के विश्वविद्यालय परिसर ऐसे जीवंत केंद्र बन रहे हैं जहां युवा शक्ति नए आविष्कारों को आगे बढ़ा रही है।"
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत 2047 तक विकसित भारत बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, देश के विश्वविद्यालयों को अनुसंधान, नवाचार और उद्यमशीलता को निरंतर प्रोत्साहन देते रहना होगा। गौरतलब है कि किरोड़ीमल कॉलेज सात दशकों से अधिक समय से दिल्ली विश्वविद्यालय के अग्रणी संस्थानों में गिना जाता रहा है।
समावेशिता की दिशा में कदम: साइंस ब्लॉक में लिफ्ट का उद्घाटन
उपराज्यपाल ने इनक्यूबेशन सेंटर के अलावा साइंस ब्लॉक की लिफ्ट का भी उद्घाटन किया। उन्होंने इसे दिव्यांग और वरिष्ठ छात्रों सहित सभी के लिए सुलभता और समावेशिता के प्रति कॉलेज की प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया। यह कदम उच्च शिक्षण संस्थानों में बुनियादी ढाँचागत समानता की दिशा में एक व्यावहारिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
छात्रों के लिए संदेश: भरोसा रखें, भविष्य आपके हाथ में है
संधू ने अपने संबोधन के अंत में छात्रों से आग्रह किया कि वे खुद पर, भारत की संस्थाओं पर और अपनी क्षमताओं पर दृढ़ विश्वास रखें। उन्होंने कहा कि भविष्य को आकार देना उनके हाथ में है और सीखने की आजीवन भावना ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी होगी। यह ऐसे समय में आया है जब देश में उच्च शिक्षा में नवाचार और उद्यमशीलता को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में स्थापित किया जा रहा है।