डिजिटल युग में बदलाव के सूत्रधार बनें छात्र — दिल्ली LG टीएस संधू का खालसा कॉलेज में आह्वान
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली के उपराज्यपाल टीएस संधू ने 24 अप्रैल को खालसा कॉलेज के वार्षिक दिवस पर छात्रों को डिजिटल युग में बदलाव का सूत्रधार बनने का आह्वान किया।
- उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी सार्थक प्रभाव की अपार क्षमता देती है, लेकिन नवाचार मजबूत नैतिक मूल्यों से निर्देशित होना चाहिए।
- एक दिन पूर्व SRCC के 100वें वार्षिक दिवस पर भी संधू ने चरित्र, रचनात्मकता और आलोचनात्मक सोच को शिक्षा का आधार बताया।
- उन्होंने डिजिटल वित्त, उद्यमिता, डेटा विश्लेषण और वैश्विक व्यापार को भविष्य के प्रमुख अवसर क्षेत्र बताया।
- प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत और विकसित दिल्ली के विजन से युवाओं को जोड़ने का आग्रह किया गया।
- संस्थान की ताकत उसके समर्पित संकाय में निहित है — यह बात उन्होंने दोनों समारोहों में दोहराई।
खालसा कॉलेज में उपराज्यपाल का ऐतिहासिक संबोधन
नई दिल्ली, 24 अप्रैल — दिल्ली के उपराज्यपाल टीएस संधू ने शुक्रवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज के वार्षिक दिवस एवं पुरस्कार वितरण समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि तीव्र डिजिटल परिवर्तन के युग में उन्हें केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि बदलाव का सच्चा सूत्रधार बनना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि नवाचार तभी सार्थक होता है जब वह मजबूत नैतिक मूल्यों की नींव पर खड़ा हो।
सूचना प्रौद्योगिकी और नैतिक मूल्यों का संगम
उपराज्यपाल संधू ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी आज युवाओं को सार्थक प्रभाव पैदा करने की अपार क्षमता प्रदान करती है। लेकिन उन्होंने चेताया कि यदि नवाचार को नैतिक दिशा नहीं मिली, तो वह समाज के लिए हानिकारक भी हो सकता है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए अपने संदेश में कहा कि कोई भी संस्थान मात्र शिक्षा का स्थान नहीं होता — वह मूल्यों, अनुशासन और छात्रों की आकांक्षाओं का जीवंत प्रतिबिंब होता है। गुरु तेग बहादुर जी की सेवा, साहस, दृढ़ता और करुणा की विरासत से प्रेरित यह संस्थान केवल बुद्धि नहीं, बल्कि चरित्र का भी निर्माण करता है।
SRCC के शताब्दी समारोह में भी दिया संदेश
एक दिन पूर्व, गुरुवार को उपराज्यपाल संधू ने श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के 100वें वार्षिक दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा को केवल अकादमिक विषयों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे चरित्र, रचनात्मकता और आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा दें।
उन्होंने कहा कि डिजिटल वित्त, उद्यमिता, डेटा विश्लेषण और वैश्विक व्यापार जैसे क्षेत्रों में नए अवसर तेजी से उभर रहे हैं। इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए अकादमिक ज्ञान, व्यावहारिक अनुभव और नैतिक मूल्यों का त्रिकोणीय संयोजन अनिवार्य है।
विकसित भारत के विजन से जुड़ाव
उपराज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत और विकसित दिल्ली के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी को दृढ़ विश्वास और स्पष्ट उद्देश्य के साथ इस राष्ट्रीय लक्ष्य में योगदान देना होगा। उन्होंने संस्थान के नेतृत्व, संकाय और सभी पुरस्कार विजेताओं को हार्दिक बधाई दी।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि किसी भी संस्थान की असली ताकत उसके समर्पित संकाय में निहित होती है, जो अकादमिक मानकों को बनाए रखने में मूलभूत भूमिका निभाता है।
व्यापक संदर्भ और शिक्षा नीति का परिदृश्य
गौरतलब है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के लागू होने के बाद से भारत में उच्च शिक्षा में कौशल विकास, डिजिटल साक्षरता और मूल्य आधारित शिक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उपराज्यपाल संधू का यह संबोधन उसी राष्ट्रीय दिशा को प्रतिध्वनित करता है।
दिल्ली विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले दर्जनों कॉलेजों में वार्षिक दिवस समारोहों की श्रृंखला जारी है, और उपराज्यपाल का इन आयोजनों में सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि प्रशासन शिक्षा क्षेत्र में सीधे संवाद को प्राथमिकता दे रहा है। आने वाले सत्र में DU की नई शैक्षणिक नीतियों और NEP के क्रियान्वयन पर और अधिक स्पष्टता सामने आने की उम्मीद है।