इराकी ड्रोन हमला: कुवैत की उत्तरी सीमा पर दो चौकियां निशाने पर, सामान का नुकसान
सारांश
Key Takeaways
- 24 अप्रैल, शुक्रवार को इराक से आए दो फाइबर-ऑप्टिक नियंत्रित विस्फोटक ड्रोन ने कुवैत की उत्तरी सीमा की दो सैन्य चौकियों पर हमला किया।
- कुवैत रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि हमले में कोई जनहानि नहीं हुई, केवल संपत्ति को नुकसान पहुंचा।
- इराकी सशस्त्र गुट 'सराया औलिया अल-दम' ने अप्रैल की शुरुआत में कुवैत, जॉर्डन और सीरिया में हमलों की जिम्मेदारी ली थी।
- 10 अप्रैल को 24 घंटों में सात दुश्मन ड्रोन कुवैती हवाई क्षेत्र में घुसे थे, जिन्हें सेना ने मार गिराया था।
- कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट का एयरस्पेस 28 फरवरी से बंद था, जो अब चरणबद्ध तरीके से पुनः खोला जा रहा है।
- फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन तकनीक का उपयोग खाड़ी देशों की रक्षा प्रणालियों के लिए एक नई और गंभीर चुनौती बन रही है।
कुवैत, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। इराक से उड़ाए गए फाइबर-ऑप्टिक वायर नियंत्रित विस्फोटक ड्रोन ने शुक्रवार, 24 अप्रैल की सुबह कुवैत की उत्तरी जमीनी सीमा पर स्थित दो सैन्य चौकियों को निशाना बनाया। कुवैत रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि इस हमले में केवल संपत्ति को क्षति पहुंची और कोई सैनिक या नागरिक हताहत नहीं हुआ।
हमले का पूरा घटनाक्रम
कुवैत रक्षा मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि दो ड्रोन, जो फाइबर-ऑप्टिक तार के जरिए नियंत्रित किए जा रहे थे, इराक की दिशा से आए और उत्तरी सीमा के दो केंद्रों पर हमला किया। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि हमले में केवल भौतिक संपत्ति का नुकसान हुआ, किसी की जान नहीं गई।
मंत्रालय के अनुसार, हमले की सूचना मिलते ही संबंधित सुरक्षा अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई की और स्थिति को नियंत्रण में ले लिया। इस घटना को क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है।
फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन तकनीक — एक नई खतरनाक रणनीति
विशेषज्ञों के अनुसार, फाइबर-ऑप्टिक वायर से नियंत्रित ड्रोन पारंपरिक रेडियो-फ्रीक्वेंसी जैमिंग सिस्टम से बचने में सक्षम होते हैं, क्योंकि ये वायरलेस सिग्नल पर निर्भर नहीं करते। यह तकनीक मध्य-पूर्व के सशस्त्र गुटों में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इसका उपयोग पहले यमन और इराक में हूती और अन्य ईरान समर्थित गुटों द्वारा किया जा चुका है।
यह घटना इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है कि कुवैत की सीमा पर इस प्रकार की तकनीक का पहला दर्ज उपयोग माना जा रहा है, जो खाड़ी देशों की रक्षा प्रणालियों के लिए एक नई चुनौती प्रस्तुत करता है।
कुवैत एयरपोर्ट की स्थिति और पुनः संचालन
इस हमले से एक दिन पहले, गुरुवार को कुवैत नागरिक उड्डयन महानिदेशक शेख हमूद मुबारक हमूद अल-सबह ने घोषणा की थी कि कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट का हवाई क्षेत्र पुनः खोल दिया गया है। यह एयरस्पेस 28 फरवरी से क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं के चलते बंद किया गया था।
पब्लिक अथॉरिटी ऑफ सिविल एविएशन ने बताया कि एयरपोर्ट के टर्मिनल चार और पांच रविवार से चुनिंदा गंतव्यों के लिए फिर से परिचालन शुरू करेंगे। शेख हमूद ने बताया कि यह निर्णय स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर लिया गया है ताकि उड़ानें पूरी सुरक्षा के साथ पुनः शुरू हो सकें।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ईरान और उससे संबद्ध सशस्त्र गुटों के हमलों से एयरपोर्ट की कुछ संरचनाओं को नुकसान पहुंचा था। जांच पूरी हो चुकी है और मरम्मत कार्य प्रगति पर है। परिचालन को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाएगा।
पूर्व हमले और जिम्मेदार गुट
अप्रैल की शुरुआत में इराक के सशस्त्र गुट 'सराया औलिया अल-दम' ने कुवैत, जॉर्डन और सीरिया में हुए हमलों की जिम्मेदारी ली थी। यह गुट ईरान समर्थित माना जाता है और क्षेत्र में अमेरिकी एवं पश्चिमी हितों के विरुद्ध सक्रिय है।
10 अप्रैल को कुवैती सेना ने बताया था कि 24 घंटों के भीतर सात दुश्मन ड्रोन कुवैती हवाई क्षेत्र में प्रवेश कर गए थे, जिन्हें सेना ने मार गिराया। सेना के प्रवक्ता ने तब कहा था कि नेशनल गार्ड की कई महत्वपूर्ण स्थापनाओं को निशाना बनाया गया, जिसमें कुछ जवान घायल हुए और उनका इलाज जारी था।
क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य और आगे की राह
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब खाड़ी क्षेत्र में ईरान समर्थित गुटों की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। कुवैत, जो परंपरागत रूप से तटस्थ विदेश नीति अपनाता है, अब सीधे इन हमलों की चपेट में आ रहा है — यह एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक बदलाव का संकेत है।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी सैन्य उपस्थिति और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) की नीतियों के विरोध में ये हमले किए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में कुवैत की ओर से कूटनीतिक और सैन्य प्रतिक्रिया, तथा अरब लीग और GCC स्तर पर इस मुद्दे को उठाए जाने की संभावना है।