नेपाल में बालेंद्र शाह सरकार के खिलाफ भड़का आक्रोश, छात्र राजनीति पर रोक और कस्टम ड्यूटी से जनता बेहाल
सारांश
Key Takeaways
- 22 अप्रैल 2026 को नेपाल के गृह मंत्री सुदान गुरुंग ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में इस्तीफा दिया।
- श्रमिक मंत्री कुमार शाह को अनुशासनहीनता के कारण पद से हटाया गया — सरकार गठन के बाद से अब तक 2 मंत्री जा चुके हैं।
- बालेंद्र शाह सरकार ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्र राजनीति पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया, जिसके विरोध में हजारों युवा सड़कों पर उतरे।
- भारत-नेपाल सीमा पर 100 रुपए से अधिक के सामान पर कस्टम ड्यूटी लागू की गई, जिससे सीमावर्ती जनता की जेब पर सीधा बोझ पड़ा।
- नेपाल का कुल आयात लगभग 65 प्रतिशत भारत से होता है, इसलिए यह फैसला व्यापक आर्थिक असर डाल सकता है।
- सितंबर 2025 के जेन-जी आंदोलन की उपज बालेंद्र शाह सरकार अब उसी युवा वर्ग के विरोध का सामना कर रही है।
काठमांडू, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। नेपाल में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के नेतृत्व में बालेंद्र शाह की नई सरकार बनते ही देश में राजनीतिक उथल-पुथल शुरू हो गई है। केपी ओली सरकार के पतन के बाद जेन-जी आंदोलन की बदौलत सत्ता में आई इस सरकार के खिलाफ छात्र राजनीति पर प्रतिबंध, भारत-नेपाल सीमा पर कस्टम ड्यूटी और दो मंत्रियों के इस्तीफे ने जनता में गहरा असंतोष पैदा कर दिया है।
मंत्रियों के इस्तीफे से हिली सरकार की साख
22 अप्रैल 2026 को नेपाल के नवनियुक्त गृह मंत्री सुदान गुरुंग ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के चलते अपने पद से इस्तीफा दे दिया। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के निर्देश पर उन्हें पद छोड़ना पड़ा, जिसके बाद पार्टी के भीतर भी नाराजगी की लहर दौड़ गई।
इसके अलावा, श्रमिक मंत्री कुमार शाह को अनुशासनहीनता के आरोप में पद से हटाया गया। सरकार गठन के महज कुछ हफ्तों के भीतर दो मंत्रियों का जाना नई सरकार की स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। गौरतलब है कि नेपाल में पिछले एक दशक में सरकारें औसतन एक वर्ष से भी कम समय तक टिकी हैं — यह पैटर्न बालेंद्र शाह सरकार के लिए भी चेतावनी है।
छात्र राजनीति पर रोक से युवाओं में उबाल
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने शपथ लेने के तुरंत बाद विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्र राजनीति पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी। इस फैसले ने उन्हीं युवाओं को नाराज कर दिया, जिन्होंने सितंबर 2025 में केपी ओली के खिलाफ सड़कों पर उतरकर बालेंद्र शाह को सत्ता दिलाई थी।
छात्र नेताओं ने आरोप लगाया है कि सरकार संवाद की जगह दमन का रास्ता अपना रही है। हजारों युवा इस फैसले के विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं और स्टूडेंट रिप्रजेंटेशन की बहाली की मांग कर रहे हैं। विडंबना यह है कि जो सरकार खुद छात्र आंदोलन की उपज है, वही आज छात्र राजनीति को कुचलने पर उतारू है।
भारत-नेपाल सीमा पर कस्टम ड्यूटी से सीमावर्ती जनता परेशान
बालेंद्र शाह सरकार ने नेपाल-भारत सीमा पर 100 रुपए से अधिक मूल्य के सामान पर कस्टम ड्यूटी लगाने का फैसला किया है। हाल ही में सामने आई तस्वीरों में सीमा पार करने वाले आम नागरिकों के सामान की कड़ी जांच होती दिखी।
नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लाखों लोग अपनी राशन, दवाइयां, कपड़े और घरेलू सामान के लिए भारतीय बाजार पर निर्भर हैं। इस कस्टम ड्यूटी ने उनकी जेब पर सीधा बोझ डाला है। द संडे गार्डियन के अनुसार, यह विवाद केवल एक नीतिगत फैसले तक सीमित नहीं है — बल्कि आर्थिक कुप्रबंधन, गवर्नेंस की विफलता और भ्रष्टाचार के आरोपों ने मिलकर जनाक्रोश को और भड़काया है।
तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो भारत के साथ खुली सीमा नेपाल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है। नेपाल के कुल आयात का लगभग 65 प्रतिशत भारत से आता है। ऐसे में यह कदम आम जनता की क्रय शक्ति को सीधे प्रभावित करेगा।
जेन-जी आंदोलन की विरासत और बालेंद्र शाह की परीक्षा
सितंबर 2025 में नेपाल के युवाओं ने सोशल मीडिया पर प्रतिबंध, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और महंगाई के खिलाफ केपी ओली सरकार को उखाड़ फेंका था। इस आंदोलन ने 35 वर्षीय बालेंद्र शाह को देश का नया चेहरा बनाया।
लेकिन अब वही युवा वर्ग सवाल पूछ रहा है कि जो नेता भ्रष्टाचार और जनसमस्याओं के नाम पर सत्ता में आया, वह खुद उन्हीं रास्तों पर क्यों चल रहा है? मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में मंत्री का इस्तीफा इस आशंका को और पुख्ता करता है।
आगे क्या होगा?
नेपाल की राजनीतिक अस्थिरता का इतिहास बताता है कि जनाक्रोश जब सड़कों पर उतरता है, तो सरकारें टिकना मुश्किल हो जाता है। बालेंद्र शाह सरकार के सामने अब तीन बड़ी चुनौतियां हैं — छात्र आंदोलन को शांत करना, कस्टम ड्यूटी पर पुनर्विचार और सरकार की विश्वसनीयता को पुनर्स्थापित करना। अगर सरकार इन मुद्दों का समाधान शीघ्र नहीं करती, तो सितंबर 2025 का इतिहास दोबारा दोहराए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।