दिल्ली एलजी टीएस संधू का आह्वान: 'वेस्ट-टू-वेल्थ' मॉडल से बदलेगी राजधानी की कचरा प्रबंधन व्यवस्था
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली के उपराज्यपाल टीएस संधू ने मंगलवार, 1 सितंबर को राष्ट्रीय राजधानी में कचरा प्रबंधन की दिशा बदलने का स्पष्ट आह्वान किया — 'वेस्ट-टू-लैंडफिल' की पुरानी पद्धति को छोड़कर 'वेस्ट-टू-वेल्थ' मॉडल अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 13,000 मीट्रिक टन म्युनिसिपल ठोस कचरा उत्पन्न होता है, जिसके लिए आधुनिक, टिकाऊ और व्यावहारिक समाधान अब अनिवार्य हो गए हैं।
वर्कशॉप का आयोजन और उद्देश्य
म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ दिल्ली (MCD) और आईआईटी दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में 'म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट: सर्कुलैरिटी की ओर एक मल्टी-लेवल/मल्टी-स्टेकहोल्डर रणनीति' विषय पर एक दिवसीय ब्रेनस्टॉर्मिंग वर्कशॉप का आयोजन किया गया। एलजी संधू ने इस वर्कशॉप का उद्घाटन करते हुए कहा कि ठोस कचरे का वैज्ञानिक और टिकाऊ प्रबंधन केवल स्वच्छता का प्रश्न नहीं है — यह नागरिकों के स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और जीवन की गुणवत्ता से सीधे जुड़ा मुद्दा है। गौरतलब है कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के क्षेत्र में MCD और किसी प्रमुख शैक्षणिक संस्थान के बीच यह अपनी तरह का पहला संस्थागत सहयोग है, जो एलजी के पूर्व निर्देशों के अनुपालन में आयोजित किया गया।
इंदौर मॉडल से सीख
उपराज्यपाल ने इंदौर का उदाहरण देते हुए कहा कि अनुशासित और निरंतर म्युनिसिपल प्रयासों से किस स्तर की सफलता हासिल की जा सकती है, यह शहर उसका सबसे सटीक घरेलू उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इंदौर के सफल कचरा प्रबंधन मॉडल का गहराई से अध्ययन किया जाना चाहिए और उसे दिल्ली की परिस्थितियों — राष्ट्रीय राजधानी के विशाल आकार, अधिक जनसंख्या घनत्व और स्थानीय भौगोलिक वास्तविकताओं — के अनुरूप ढालकर लागू किया जाए। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली के लैंडफिल स्थल पहले से ही क्षमता से अधिक भरे हुए हैं और शहर के पर्यावरण पर इसका गंभीर असर पड़ रहा है।
सामूहिक भागीदारी पर जोर
एलजी संधू ने स्पष्ट किया कि कचरे के प्रभावी प्रबंधन के लिए सरकारी तंत्र अकेला पर्याप्त नहीं है — इसके लिए सामूहिक जिम्मेदारी और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे कचरे को स्रोत पर ही अलग करें और 'वेस्ट-टू-वेल्थ' की अवधारणा को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएँ।
वर्कशॉप में कौन-कौन रहे मौजूद
इस अवसर पर दिल्ली की मेयर प्रवेश वाही, इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव, MCD कमिश्नर संजीव खिरवार, अतिरिक्त कमिश्नर अरुण कुमार मिश्रा, म्युनिसिपल पार्षद, आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञ, वेस्ट मैनेजमेंट क्षेत्र के जानकार तथा MCD के वरिष्ठ अधिकारी, इंजीनियर और कर्मचारी उपस्थित रहे। इंदौर के मेयर की उपस्थिति यह संकेत देती है कि दिल्ली प्रशासन इंदौर के अनुभवों को सीधे साझा करने की दिशा में गंभीर है।
आगे की राह
यह वर्कशॉप दिल्ली के कचरा प्रबंधन में नीतिगत बदलाव की एक महत्वपूर्ण शुरुआत मानी जा रही है। MCD और IIT दिल्ली के इस संस्थागत सहयोग से उम्मीद है कि आने वाले समय में साक्ष्य-आधारित, टिकाऊ और सर्कुलर इकॉनमी के सिद्धांतों पर आधारित कचरा प्रबंधन नीतियाँ तैयार की जाएँगी।