हरियाणा विधानसभा ने गुरु रविदास 650वें प्रकाश पर्व पर समरसता संकल्प अभियान प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा विधानसभा ने 1 सितंबर 2026 को संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास के 650वें प्रकाश पर्व को समर्पित राष्ट्रव्यापी 'गुरु रविदास महाराज समरसता संकल्प अभियान' पर एक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्वयं यह प्रस्ताव सदन में पेश किया और सभी दलों ने इसका समर्थन किया।
अभियान का उद्देश्य और समयसीमा
मुख्यमंत्री सैनी ने सदन को बताया कि यह अभियान 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर प्रारंभ हुआ और 20 फरवरी 2027 तक चलेगा। अभियान का मूल उद्देश्य गुरु रविदास के समानता, करुणा, सेवा, भक्ति, सामाजिक न्याय और सामाजिक सद्भाव के संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाना है। साथ ही विभिन्न समुदायों के बीच एकता और भाईचारे को और सुदृढ़ करना इसका प्रमुख लक्ष्य है।
गौरतलब है कि यह अभियान किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है — यह एक राष्ट्रव्यापी पहल है जिसमें देश भर के विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि भागीदार हैं।
वाराणसी से हुई शुरुआत, हरियाणा तक पहुँची कलश यात्रा
मुख्यमंत्री सैनी ने बताया कि इस अभियान की शुरुआत वाराणसी स्थित संत शिरोमणि गुरु रविदास की पवित्र जन्मस्थली 'सर गोबरधन' से की गई। वहाँ की पवित्र मिट्टी से भरे कलश का सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया और फिर उसे देश के विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों को सौंपा गया।
यह कलश यात्रा 4 अगस्त को हरियाणा पहुँची। 5 अगस्त को गुरुग्राम के माता शीतला मंदिर परिसर में एक भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
ज़िला और ग्राम स्तर पर फैल रहा संदेश
हरियाणा में लाए गए कलश को जिला और गाँव के स्तर पर ले जाया जा रहा है। श्रद्धालु पवित्र मिट्टी को स्थानीय मंदिरों की मिट्टी में मिला रहे हैं और गुरु रविदास के सामाजिक सद्भाव के संदेश को जन-जन तक पहुँचा रहे हैं। मुख्यमंत्री सैनी ने बताया कि समरसता यात्रा 5 अक्टूबर को हरियाणा में पुनः प्रवेश करेगी और 5 नवंबर तक जारी रहेगी।
यात्रा के मार्ग पर पूरे राज्य में स्वागत द्वार और स्वागत केंद्र स्थापित किए जाएँगे तथा जनसभाएँ भी आयोजित की जाएँगी।
युवाओं और शिक्षण संस्थानों तक पहुँच
26 नवंबर से 15 जनवरी 2027 तक छात्रावासों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों और कोचिंग संस्थानों में विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे। यह कदम अभियान को युवा पीढ़ी से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
गुरु रविदास और राष्ट्रीय संदर्भ
मुख्यमंत्री सैनी ने स्मरण दिलाया कि संत शिरोमणि गुरु रविदास का जन्म काशी के पवित्र नगर में माघ पूर्णिमा के अवसर पर हुआ था। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास का व्यक्तित्व पूर्णिमा के चंद्रमा की भाँति शांत और तेजस्वी था। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरु रविदास की 649वीं जयंती के अवसर पर 1 फरवरी को डेरा सचखंड बल्लान में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में भाग लिया था। यह अभियान उसी राष्ट्रीय भावना की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।