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अहमदाबाद 'हब एंड स्पोक' मॉडल से बनेगा ग्लोबल एविएशन हब, 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले बड़ी तैयारी

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अहमदाबाद 'हब एंड स्पोक' मॉडल से बनेगा ग्लोबल एविएशन हब, 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले बड़ी तैयारी

सारांश

अहमदाबाद अब दिल्ली के रास्ते का चक्कर काटे बिना सीधे दुनिया से जुड़ेगा — 'हब एंड स्पोक' मॉडल के तहत इमिग्रेशन से बैगेज तक सब कुछ यहीं होगा। 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स और 2047 के ग्लोबल एविएशन हब लक्ष्य के बीच यह अहमदाबाद की सबसे बड़ी एविएशन छलांग है।

मुख्य बातें

नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने 1 सितंबर को अहमदाबाद में 'हब एंड स्पोक' मॉडल का विस्तार लॉन्च किया।
पिछले वर्ष 1.6 करोड़ यात्री अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए अहमदाबाद से दिल्ली तक का अतिरिक्त सफर करने को मजबूर थे।
नई व्यवस्था में इमिग्रेशन, चेक-इन और बैगेज चेक-थ्रू अहमदाबाद में ही होगा, सामान सीधे अंतिम गंतव्य तक पहुँचेगा।
अगले चरण में 22 और हवाई अड्डों को इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, जिनमें गुजरात का सूरत शामिल है।
मंत्रालय के अनुसार, एविएशन हब से 2030 तक 4 लाख नौकरियाँ और 30 अरब डॉलर की जीडीपी वृद्धि संभव।
2047 तक यह ढाँचा 1.6 करोड़ रोज़गारों को सहारा देते हुए अर्थव्यवस्था में 1.4 ट्रिलियन डॉलर का योगदान कर सकता है।

नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने मंगलवार, 1 सितंबर को अहमदाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में घोषणा की कि 'हब एंड स्पोक' मॉडल के तहत अहमदाबाद अब दुनिया के अधिक से अधिक शहरों से आने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों का सीधे स्वागत करने में सक्षम होगा। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष 1.6 करोड़ यात्रियों ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानें पकड़ने के लिए अहमदाबाद से दिल्ली तक का अतिरिक्त घरेलू सफर किया — यह आंकड़ा उस असुविधा की गहराई को दर्शाता है जिसे यह नई व्यवस्था दूर करने का लक्ष्य रखती है।

यात्रियों के लिए क्या बदलेगा

अब तक, अहमदाबाद से पेरिस, टोरंटो या सिडनी जाने के इच्छुक यात्री को पहले दिल्ली के लिए अलग घरेलू टिकट बुक करनी पड़ती थी, वहाँ पहुँचकर सामान लेना पड़ता था, इमिग्रेशन की लंबी कतारों से गुज़रना पड़ता था और कनेक्टिंग फ्लाइट छूटने का जोखिम भी उठाना पड़ता था।

'हब एंड स्पोक' व्यवस्था लागू होने के बाद इमिग्रेशन, चेक-इन और बैगेज चेक-थ्रू की पूरी प्रक्रिया अहमदाबाद में ही पूरी होगी और सामान सीधे अंतिम अंतरराष्ट्रीय गंतव्य तक पहुँचेगा। यह बदलाव यात्रा को न केवल सरल बनाएगा, बल्कि समय और धन की बचत भी करेगा।

आर्थिक क्षेत्रों पर असर

नायडू ने रेखांकित किया कि बेहतर अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी से अहमदाबाद के टेक्सटाइल, फार्मास्युटिकल, डायमंड एवं जेम्स और इंजीनियरिंग क्षेत्रों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। यह ऐसे समय में आया है जब गुजरात पहले से ही देश के प्रमुख निर्यात केंद्रों में शुमार है और 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेज़बानी की दिशा में तैयारियाँ तेज़ हो रही हैं।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अध्ययनों के अनुसार, एविएशन हब के विकास से 2030 तक लगभग 4 लाख प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष नौकरियाँ सृजित हो सकती हैं और भारत की जीडीपी में 30 अरब डॉलर का अतिरिक्त योगदान संभव है। दीर्घकालिक अनुमानों के अनुसार, 2047 तक यह ढाँचा 1.6 करोड़ प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोज़गारों को सहारा दे सकता है और अर्थव्यवस्था में 1.4 ट्रिलियन डॉलर का योगदान कर सकता है।

राष्ट्रीय एविएशन रणनीति का हिस्सा

यह मॉडल सरकार की व्यापक अंतरराष्ट्रीय एविएशन हब रणनीति का अभिन्न अंग है, जिसका उद्देश्य 2030 तक भारत को भारतीय यात्रियों के लिए पसंदीदा एविएशन हब और 2047 तक एक प्रमुख वैश्विक एविएशन हब के रूप में स्थापित करना है। गौरतलब है कि इस दिशा में पहला कदम 25 जून 2026 को वाराणसी से हब एंड स्पोक ऑपरेशन की शुरुआत के साथ उठाया गया था।

अहमदाबाद में इसके विस्तार के बाद अगले चरण में 22 और हवाई अड्डों को इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, जिनमें गुजरात का सूरत भी शामिल है।

लॉन्च कार्यक्रम में कौन रहे मौजूद

अहमदाबाद में आयोजित लॉन्च समारोह में नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू के साथ गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल और गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी उपस्थित रहे। इस उच्चस्तरीय उपस्थिति ने इस पहल के राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व को रेखांकित किया।

आने वाले महीनों में इस ढाँचे का विस्तार देश के अन्य हवाई अड्डों तक होने की उम्मीद है, जो भारत के एविएशन क्षेत्र में एक नए युग की नींव रखेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की गति होगी — वाराणसी से शुरुआत के बाद अहमदाबाद दूसरा केंद्र है, और 22 और हवाई अड्डों तक विस्तार की समयसीमा अभी अस्पष्ट है। मंत्रालय के 2030 और 2047 के रोज़गार अनुमान महत्वाकांक्षी हैं, लेकिन ये 'डायरेक्ट और इनडायरेक्ट' नौकरियों की मिली-जुली गणना पर आधारित हैं जिनकी स्वतंत्र सत्यापन की व्यवस्था अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की डेडलाइन इस योजना को राजनीतिक रूप से बाध्यकारी बनाती है — यह दबाव लाभकारी भी हो सकता है और जोखिम भरा भी।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहमदाबाद में 'हब एंड स्पोक' मॉडल क्या है और यह कैसे काम करेगा?
'हब एंड स्पोक' मॉडल के तहत अहमदाबाद से अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वाले यात्रियों का इमिग्रेशन, चेक-इन और बैगेज चेक-थ्रू अब अहमदाबाद में ही होगा और सामान सीधे अंतिम विदेशी गंतव्य तक पहुँचेगा। इससे यात्रियों को दिल्ली जाकर अलग से घरेलू उड़ान लेने की ज़रूरत नहीं होगी।
पहले अहमदाबाद के यात्रियों को क्या परेशानी होती थी?
पहले पेरिस, टोरंटो या सिडनी जाने के लिए अहमदाबाद के यात्रियों को दिल्ली के लिए अलग घरेलू टिकट बुक करनी पड़ती थी, वहाँ सामान लेना पड़ता था, इमिग्रेशन कतारों से गुज़रना पड़ता था और कनेक्टिंग फ्लाइट छूटने का जोखिम भी रहता था। पिछले वर्ष 1.6 करोड़ यात्रियों ने इसी कारण अहमदाबाद से दिल्ली तक का अतिरिक्त सफर किया।
इस योजना से अहमदाबाद की अर्थव्यवस्था को क्या फायदा होगा?
बेहतर अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी से अहमदाबाद के टेक्सटाइल, फार्मास्युटिकल, डायमंड एवं जेम्स और इंजीनियरिंग क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। मंत्रालय के अनुमानों के अनुसार, एविएशन हब विकास से 2030 तक 4 लाख नौकरियाँ और 30 अरब डॉलर की जीडीपी वृद्धि संभव है।
इस नेटवर्क को आगे कहाँ-कहाँ विस्तारित किया जाएगा?
अहमदाबाद के बाद अगले चरण में 22 और हवाई अड्डों को हब एंड स्पोक नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, जिनमें गुजरात का सूरत भी शामिल है। इस ढाँचे की शुरुआत 25 जून 2026 को वाराणसी से हुई थी।
भारत का 2047 तक ग्लोबल एविएशन हब बनने का लक्ष्य क्या है?
सरकार की रणनीति के अनुसार, 2030 तक भारत को भारतीय यात्रियों के लिए पसंदीदा एविएशन हब और 2047 तक एक प्रमुख वैश्विक एविएशन हब बनाना है। मंत्रालय के अनुमानों के अनुसार, 2047 तक यह ढाँचा 1.6 करोड़ रोज़गारों को सहारा देते हुए अर्थव्यवस्था में 1.4 ट्रिलियन डॉलर का योगदान कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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