अमृतसर बना देश का दूसरा 'हब एंड स्पोक' एयरपोर्ट, 20+ अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों से सीधा जुड़ाव
सारांश
मुख्य बातें
नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने 28 जुलाई 2026 को अमृतसर से 'हब एंड स्पोक' अंतरराष्ट्रीय उड़ान परिचालन की आधिकारिक शुरुआत की। इस पहल के साथ ही वाराणसी के बाद अमृतसर इस नई व्यवस्था से जुड़ने वाला देश का दूसरा हवाई अड्डा बन गया है, जो अब यात्रियों को 20 से अधिक अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों तक निर्बाध पहुँच प्रदान करेगा। इससे पहले अमृतसर से केवल सात अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए सीधी उड़ान उपलब्ध थी।
हब एंड स्पोक मॉडल कैसे काम करेगा
इस व्यवस्था के तहत नई दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा केंद्रीय 'हब' की भूमिका निभाएगा। अमृतसर से उड़ान भरने वाले यात्री अब एक ही चेक-इन और एक ही बैगेज टैग के माध्यम से अपने अंतिम अंतरराष्ट्रीय गंतव्य तक पहुँच सकेंगे। दिल्ली पहुँचने पर उन्हें दोबारा इमिग्रेशन या कस्टम्स प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा।
नायडू ने वीडियो संदेश में कहा, 'यात्री अब एक ही चेक-इन और एक ही बैगेज टैग के जरिए 20 से अधिक अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों तक यात्रा कर सकेंगे, जिससे पूरी यात्रा पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और निर्बाध हो जाएगी।'
अमृतसर को क्यों चुना गया
अमृतसर भारत के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रवेश द्वारों में से एक है। यह पंजाब, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के श्रद्धालुओं, प्रवासी भारतीयों, कारोबारी यात्रियों और पर्यटकों की महत्वपूर्ण जरूरतों को पूरा करता है। मंत्री नायडू ने कहा कि 'मजबूत प्रवासी भारतीय समुदाय और व्यापक क्षेत्रीय पहुँच के कारण अमृतसर उन भारतीय शहरों में शामिल है, जिन्हें इस वैश्विक कनेक्टिविटी परिवर्तन से सबसे अधिक लाभ मिलेगा।'
वर्तमान में हर वर्ष करीब 1.5 लाख यात्री अंतरराष्ट्रीय उड़ान पकड़ने के लिए अमृतसर से दिल्ली जाते हैं, जबकि लगभग 1.5 लाख यात्री विदेशों से दिल्ली पहुँचकर अमृतसर आते हैं। यह नई व्यवस्था इन यात्रियों के लिए समय और असुविधा दोनों को कम करेगी।
वाराणसी से मिली प्रेरणा
यह सेवा 25 जून 2026 को वाराणसी से भारत की पहली हब एंड स्पोक उड़ान व्यवस्था शुरू होने के बाद आरंभ की गई है। पिछले एक महीने में वाराणसी से यात्रा करने वाले यात्री दिल्ली के माध्यम से 18 अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों तक निर्बाध रूप से पहुँचे हैं। इस अनुभव ने पहल की व्यावहारिकता को साबित किया और अमृतसर को इस ढाँचे में शामिल करने का मार्ग प्रशस्त किया।
आर्थिक प्रभाव और रोजगार का अनुमान
मंत्रालय के अध्ययनों के अनुसार, एविएशन हब परिचालन के विस्तार से 2030 तक लगभग 4 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हो सकते हैं तथा भारतीय अर्थव्यवस्था में 30 अरब डॉलर का अतिरिक्त योगदान मिल सकता है। दीर्घकालिक दृष्टि से 2047 तक इस पहल का कुल प्रभाव लगभग 1.6 करोड़ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने तथा देश की अर्थव्यवस्था में करीब 1.4 ट्रिलियन डॉलर का योगदान देने का अनुमान है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार विमानन क्षेत्र को राष्ट्रीय आर्थिक विकास के एक प्रमुख इंजन के रूप में स्थापित करने में जुटी है। आगे और शहरों को इस ढाँचे से जोड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।