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वाराणसी से शुरू हुई भारत की पहली 'ईज़ी कनेक्ट' उड़ान, टियर-2 शहरों से विदेश यात्रा होगी सीधी

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वाराणसी से शुरू हुई भारत की पहली 'ईज़ी कनेक्ट' उड़ान, टियर-2 शहरों से विदेश यात्रा होगी सीधी

सारांश

वाराणसी से 'ईज़ी कनेक्ट' की शुरुआत महज एक उड़ान नहीं — यह भारत के विमानन नक्शे को नए सिरे से खींचने की कोशिश है। अब टियर-2 शहरों के यात्री अपने घरेलू हवाई अड्डे से ही इमिग्रेशन निपटाकर सीधे विदेश रवाना हो सकेंगे। मंत्रालय का दावा है कि 2030 तक 4 लाख रोज़गार और 30 अरब डॉलर की जीडीपी वृद्धि इसी मॉडल से आएगी।

मुख्य बातें

नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से भारत की पहली 'ईज़ी कनेक्ट' उड़ान सेवा लॉन्च की।
नए हब-एंड-स्पोक मॉडल के तहत यात्री मूल हवाई अड्डे पर ही चेक-इन, इमिग्रेशन और कस्टम्स की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।
मंत्रालय के अनुसार, 2030 तक 4 लाख रोज़गार और जीडीपी में 30 अरब डॉलर का अतिरिक्त योगदान संभावित।
2047 तक 1.6 करोड़ रोज़गार और 1.4 ट्रिलियन डॉलर के आर्थिक प्रभाव का दीर्घकालिक अनुमान।
लक्ष्य: भारत को 2030 तक पसंदीदा विमानन हब और 2047 तक वैश्विक विमानन केंद्र बनाना।

नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने 27 जून 2025 को वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से भारत की पहली 'ईज़ी कनेक्ट' उड़ान सेवा को हरी झंडी दिखाई। यह पहल केंद्र सरकार के नए हब-एंड-स्पोक विमानन मॉडल का पहला व्यावहारिक क्रियान्वयन है, जिसका लक्ष्य टियर-2 और टियर-3 शहरों के यात्रियों को बिना अतिरिक्त इमिग्रेशन या कस्टम्स प्रक्रिया के सीधे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से जोड़ना है।

क्या है 'ईज़ी कनेक्ट' मॉडल

नए हब-एंड-स्पोक मॉडल के तहत अंतरराष्ट्रीय यात्री अपने मूल हवाई अड्डे — जैसे वाराणसी — पर ही चेक-इन, इमिग्रेशन और कस्टम्स की सभी औपचारिकताएँ पूरी कर सकेंगे। इसके बाद वे घरेलू उड़ान से दिल्ली जैसे निर्धारित हब एयरपोर्ट तक पहुँचेंगे और वहाँ पुनः किसी प्रक्रिया से गुज़रे बिना सीधे अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ान में सवार हो सकेंगे। यह व्यवस्था उन लाखों यात्रियों के लिए राहत की बात है जो अब तक अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए पहले मेट्रो शहर जाने को मजबूर थे।

मंत्री की प्रतिक्रिया

इस अवसर पर मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा, "आज हमने हवाई यात्रा को अधिक सुलभ बनाने और एक आधुनिक, आत्मनिर्भर, कुशल, समावेशी तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय विमानन उद्योग के निर्माण की अपनी सोच को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।" उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यह कदम भारत को 2030 तक पसंदीदा विमानन हब और 2047 तक वैश्विक विमानन केंद्र बनाने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।

आर्थिक प्रभाव और रोज़गार का अनुमान

नागर विमानन मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, इस विमानन हब मॉडल के विकास से 2030 तक लगभग 4 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार सृजित होने का अनुमान है। साथ ही, भारत की जीडीपी में 30 अरब डॉलर का अतिरिक्त योगदान मिलने की संभावना जताई गई है। दीर्घकालिक दृष्टि से, 2047 तक यह मॉडल लगभग 1.6 करोड़ रोज़गार पैदा करने और भारतीय अर्थव्यवस्था में करीब 1.4 ट्रिलियन डॉलर का योगदान देने में सक्षम हो सकता है — हालाँकि ये दीर्घकालिक अनुमान हैं और इन्हें सावधानी से देखा जाना चाहिए।

व्यापक संदर्भ: क्यों है यह अहम

गौरतलब है कि भारत में अब तक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का बड़ा हिस्सा दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे मेट्रो शहरों से संचालित होता रहा है। टियर-2 और टियर-3 शहरों के यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय उड़ान पकड़ने के लिए पहले इन्हीं शहरों तक आना पड़ता था, जिससे यात्रा समय और खर्च दोनों बढ़ते थे। 'ईज़ी कनेक्ट' इस असुविधा को दूर करने का प्रयास है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत का विमानन बाज़ार तेज़ी से विस्तार कर रहा है और गैर-मेट्रो शहरों से यात्री संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है।

आगे क्या

सरकार के अनुसार, इस मॉडल को धीरे-धीरे अन्य टियर-2 और टियर-3 शहरों तक भी विस्तारित किया जाएगा। व्यापार, पर्यटन, निवेश और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि गैर-मेट्रो शहरों से अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क मज़बूत होगा। इस पहल की सफलता काफी हद तक एयरलाइन्स के सहयोग, हवाई अड्डों की क्षमता विस्तार और निर्बाध तकनीकी समन्वय पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और क्या हवाई अड्डों पर इमिग्रेशन बुनियादी ढाँचा इस अतिरिक्त भार को सँभाल पाएगा? 2030 और 2047 के रोज़गार अनुमान महत्वाकांक्षी हैं, और इन्हें उड़ान देश योजना के उन वादों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए जो छोटे शहरों में कनेक्टिविटी बढ़ाने के बावजूद व्यावसायिक व्यवहार्यता की चुनौती से जूझते रहे हैं। यह पहल तभी परिवर्तनकारी बनेगी जब इसे एयरलाइन प्रोत्साहन, हवाई अड्डा उन्नयन और माँग-आधारित विस्तार की ठोस योजना के साथ जोड़ा जाए।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'ईज़ी कनेक्ट' उड़ान सेवा क्या है?
'ईज़ी कनेक्ट' भारत सरकार की एक नई विमानन पहल है जिसके तहत टियर-2 और टियर-3 शहरों के यात्री अपने स्थानीय हवाई अड्डे पर ही चेक-इन, इमिग्रेशन और कस्टम्स की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं और हब एयरपोर्ट पर बिना दोबारा इन प्रक्रियाओं से गुज़रे अंतरराष्ट्रीय उड़ान पकड़ सकते हैं। इसकी शुरुआत वाराणसी से हुई है।
इस सेवा से किन यात्रियों को फायदा होगा?
मुख्य रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों में रहने वाले वे यात्री लाभान्वित होंगे जिन्हें अब तक अंतरराष्ट्रीय उड़ान के लिए पहले दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे मेट्रो शहर जाना पड़ता था। इससे उनकी यात्रा का समय और खर्च दोनों कम होंगे।
हब-एंड-स्पोक मॉडल कैसे काम करता है?
इस मॉडल में यात्री अपने मूल शहर के हवाई अड्डे — जैसे वाराणसी — पर सभी अंतरराष्ट्रीय औपचारिकताएँ पूरी करते हैं, फिर घरेलू उड़ान से दिल्ली जैसे हब एयरपोर्ट पहुँचते हैं, और वहाँ सीधे अंतरराष्ट्रीय उड़ान में सवार हो जाते हैं। हब पर दोबारा इमिग्रेशन या कस्टम्स की ज़रूरत नहीं होती।
इस पहल से भारत की अर्थव्यवस्था को क्या फायदा होगा?
नागर विमानन मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, 2030 तक लगभग 4 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार और जीडीपी में 30 अरब डॉलर का अतिरिक्त योगदान संभावित है। 2047 तक यह आँकड़ा 1.6 करोड़ रोज़गार और 1.4 ट्रिलियन डॉलर के आर्थिक प्रभाव तक पहुँचने का अनुमान है।
क्या यह सेवा सिर्फ वाराणसी तक सीमित रहेगी?
नहीं, सरकार के अनुसार 'ईज़ी कनेक्ट' मॉडल को चरणबद्ध तरीके से अन्य टियर-2 और टियर-3 शहरों तक भी विस्तारित किया जाएगा। वाराणसी इस पहल का पहला पायलट शहर है।
राष्ट्र प्रेस
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