संत रविदास की 650वीं जयंती: BJP का समरसता संकल्प अभियान, तालकटोरा में आज बड़ा कार्यक्रम
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने संत शिरोमणि गुरु रविदास जी महाराज की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में वर्षभर चलने वाले समरसता संकल्प अभियान की शुरुआत की है। नई दिल्ली के तालकटोरा इंडोर स्टेडियम में सोमवार, 25 अगस्त 2026 को इस अभियान के तहत एक बड़ा कलश वितरण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह अभियान 20 फरवरी 2027 तक पाँच चरणों में चलेगा।
अभियान की रूपरेखा
BJP के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लाल सिंह आर्य ने बताया कि यह अभियान 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के दिन से आरंभ हुआ। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित होकर और BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के मार्गदर्शन में यह अभियान चलाया जा रहा है।" अभियान के अंतर्गत तीन समानांतर कार्यक्रम संचालित हो रहे हैं — कलश वंदना, संत संपर्क अभियान और समरस दीप अभियान।
अब तक की प्रगति
BJP के अनुसार, संत संपर्क अभियान के तहत अब तक देशभर में 25,000 से अधिक संतों से संपर्क किया जा चुका है। समरस दीप अभियान के अंतर्गत 51,000 से अधिक स्थानों पर दीपोत्सव कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। 10 सितंबर तक कलश वंदन पूजन कार्यक्रम का पहला चरण पूरा होने की योजना है।
तालकटोरा कार्यक्रम में कौन होंगे
आज के कार्यक्रम में BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा के साथ-साथ सभी सांसद, विधायक और मंत्री उपस्थित रहेंगे। लाल सिंह आर्य ने कहा कि इस अभियान का मूल उद्देश्य संत रविदास की वाणी और उनके विचारों को जन-जन तक पहुँचाना है।
समरसता संपर्क यात्रा का मार्ग
अगले चरण में जालंधर से समरसता संपर्क यात्रा निकलेगी, जो जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, चंडीगढ़, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश होते हुए काशी में समाप्त होगी। पाँचवाँ और अंतिम चरण छात्र संपर्क अभियान होगा, जिसमें युवाओं तक संत रविदास के विचार पहुँचाए जाएंगे। BJP सरकार ने संत रविदास से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों का समग्र विकास करने का संकल्प भी लिया है।
संत रविदास: विरासत और विचार
भक्ति काल के महान संत, कवि और समाज सुधारक गुरु रविदास का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी के निकट सीर गोवर्धनपुर में सन् 1376 या 1377 में माघ पूर्णिमा को हुआ था। निर्गुण भक्ति धारा के इस संत ने बाहरी आडंबर के स्थान पर मन की पवित्रता को सर्वोच्च माना। उनका प्रसिद्ध वचन "मन चंगा तो कठौती में गंगा" आज भी सामाजिक समरसता का प्रतीक है। उन्होंने बेगमपुरा नामक एक आदर्श समाज की कल्पना की थी — जहाँ जात-पात, कर और दुख का कोई स्थान न हो।