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नवजीवन विहार का 'जीरो वेस्ट' मॉडल बनेगा दिल्ली की मिसाल, एलजी संधू ने किया निरीक्षण

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नवजीवन विहार का 'जीरो वेस्ट' मॉडल बनेगा दिल्ली की मिसाल, एलजी संधू ने किया निरीक्षण

सारांश

नवजीवन विहार का 'जीरो वेस्ट' मॉडल महज़ एक कॉलोनी की कामयाबी नहीं — यह दिल्ली के लैंडफिल संकट का एक व्यावहारिक जवाब है। आठ साल में 10 लाख किग्रा कचरा बचाने वाली इस पहल को एलजी संधू ने पूरी राजधानी के लिए खाका बताया और MCD को अमल का आदेश दिया।

मुख्य बातें

संधू ने 23 जून को नवजीवन विहार (दक्षिण दिल्ली) का दौरा कर 'जीरो वेस्ट कॉलोनी' मॉडल का निरीक्षण किया।
कॉलोनी ने लगभग 8 वर्षों में 10 लाख किलोग्राम से अधिक कचरे को लैंडफिल तक पहुँचने से रोका।
मॉडल में RRR सेंटर , एरोबिक कंपोस्टिंग यूनिट , स्रोत-स्तरीय कचरा पृथक्करण और वर्षा जल संचयन शामिल हैं।
MCD को अन्य RWA में यह मॉडल लागू करने और LIG व अनधिकृत कॉलोनियों में वित्तीय सहायता तलाशने के निर्देश दिए गए।
आधारभूत संरचना विकास के लिए CSR फंड के व्यवस्थित उपयोग पर भी जोर दिया गया।

दिल्ली के उपराज्यपाल टी.एस. संधू ने मंगलवार, 23 जून को दक्षिण दिल्ली स्थित नवजीवन विहार का दौरा कर वहाँ आठ वर्षों से संचालित 'जीरो वेस्ट कॉलोनी' मॉडल का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने इस सामुदायिक पहल को दिल्ली की सर्वोत्तम नागरिक कार्यप्रणालियों में से एक करार दिया और नगर निगम दिल्ली (MCD) को निर्देश दिए कि इसे राजधानी की अन्य कॉलोनियों में भी लागू किया जाए।

मॉडल में क्या है खास

उपराज्यपाल संधू ने कॉलोनी में स्थापित रिड्यूस-रीयूज-रीसायकल (RRR) सेंटर, विकेंद्रीकृत एरोबिक कंपोस्टिंग यूनिट, स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण व्यवस्था और वर्षा जल संचयन प्रणाली का बारीकी से जायज़ा लिया। उन्होंने कहा कि यह मॉडल यह सिद्ध करता है कि सामूहिक नागरिक जिम्मेदारी और जनभागीदारी के ज़रिए एक स्वच्छ, हरित और टिकाऊ शहरी वातावरण तैयार किया जा सकता है।

गौरतलब है कि नवजीवन विहार RWA और स्थानीय निवासियों के नेतृत्व में यह पहल पिछले लगभग आठ वर्षों से सफलतापूर्वक चल रही है। इस अवधि में कॉलोनी ने 10 लाख किलोग्राम से अधिक कचरे को दिल्ली के पहले से ही बोझिल लैंडफिल स्थलों तक पहुँचने से रोका है।

MCD को निर्देश और वित्तीय सहायता की संभावना

उपराज्यपाल ने MCD को स्पष्ट निर्देश दिए कि वह अन्य रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWA) को भी इस आत्मनिर्भर मॉडल को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करे। उन्होंने विशेष रूप से अनधिकृत और निम्न आय वर्ग (LIG) की कॉलोनियों में विकेंद्रीकृत कचरा प्रबंधन एवं कंपोस्टिंग परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता की संभावनाएँ तलाशने को कहा।

उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि इन क्षेत्रों में एरोबिन और RRR सेंटर जैसी आवश्यक आधारभूत संरचनाओं के विकास के लिए कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड का व्यवस्थित उपयोग किया जाए।

एलजी का संदेश: घर से शुरू हो 'वेस्ट टू वेल्थ' की यात्रा

संधू ने ज़ोर देकर कहा कि टिकाऊ कचरा प्रबंधन केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं — इसके लिए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और जिम्मेदारी की भावना भी अनिवार्य है। उन्होंने कहा, 'वेस्ट टू वेल्थ' की यात्रा घर से ही शुरू होती है और प्रत्येक परिवार को स्रोत स्तर पर कचरे का पृथक्करण सुनिश्चित करना चाहिए।

आम जनता और शहर पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली के गाज़ीपुर, भलस्वा और ओखला लैंडफिल स्थल क्षमता से कहीं अधिक बोझ झेल रहे हैं और कई बार आग व दुर्गंध की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। नवजीवन विहार जैसे विकेंद्रीकृत मॉडल इस दबाव को कम करने में सहायक हो सकते हैं।

उपराज्यपाल ने सभी हितधारकों से संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग, पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के निर्वहन और एक विकसित, समावेशी तथा विश्वस्तरीय दिल्ली के निर्माण के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया। MCD के अगले कदम और CSR फंड के उपयोग की रूपरेखा पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या MCD के पास इस मॉडल को हज़ारों कॉलोनियों — खासकर अनधिकृत बस्तियों — तक ले जाने की प्रशासनिक क्षमता और इच्छाशक्ति है। CSR फंड पर निर्भरता एक स्थायी समाधान नहीं है; जब तक बजटीय आवंटन और जवाबदेही तंत्र नहीं बनता, यह पहल कुछ चुनिंदा कॉलोनियों तक सिमटी रह सकती है। दिल्ली के लैंडफिल संकट की गंभीरता को देखते हुए, एलजी के निर्देश की असली परीक्षा अगले छह महीनों में MCD की ज़मीनी कार्रवाई से होगी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवजीवन विहार का 'जीरो वेस्ट कॉलोनी' मॉडल क्या है?
यह दक्षिण दिल्ली स्थित नवजीवन विहार RWA की एक सामुदायिक पहल है जो पिछले लगभग आठ वर्षों से संचालित है। इसमें RRR सेंटर, विकेंद्रीकृत एरोबिक कंपोस्टिंग यूनिट, स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण और वर्षा जल संचयन शामिल हैं, और अब तक 10 लाख किलोग्राम से अधिक कचरे को लैंडफिल से बचाया जा चुका है।
एलजी टी.एस. संधू ने MCD को क्या निर्देश दिए?
उपराज्यपाल संधू ने MCD को निर्देश दिए कि वह अन्य RWA को भी इस मॉडल को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करे। साथ ही LIG और अनधिकृत कॉलोनियों में विकेंद्रीकृत कचरा प्रबंधन परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता और CSR फंड के उपयोग की संभावनाएँ तलाशने को कहा।
इस मॉडल से दिल्ली के लैंडफिल संकट पर क्या असर पड़ेगा?
दिल्ली के गाज़ीपुर, भलस्वा और ओखला जैसे लैंडफिल पहले से ही क्षमता से अधिक बोझ झेल रहे हैं। नवजीवन विहार जैसे विकेंद्रीकृत मॉडल को व्यापक पैमाने पर लागू करने से लैंडफिल पर दबाव कम हो सकता है, हालाँकि इसके लिए ठोस बजटीय और प्रशासनिक समर्थन ज़रूरी होगा।
'वेस्ट टू वेल्थ' की अवधारणा से एलजी का क्या तात्पर्य था?
उपराज्यपाल संधू ने कहा कि 'वेस्ट टू वेल्थ' की यात्रा घर से शुरू होती है — यानी प्रत्येक परिवार को स्रोत स्तर पर कचरे का पृथक्करण करना चाहिए। उनका मानना है कि टिकाऊ कचरा प्रबंधन केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही संभव है।
क्या यह मॉडल LIG और अनधिकृत कॉलोनियों में भी लागू होगा?
एलजी ने विशेष रूप से LIG और अनधिकृत कॉलोनियों का उल्लेख करते हुए MCD को वहाँ वित्तीय सहायता और CSR फंड के ज़रिए एरोबिन व RRR सेंटर जैसी आधारभूत संरचनाएँ विकसित करने के निर्देश दिए। हालाँकि इसकी समयसीमा और विस्तृत रूपरेखा अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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