एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने संभाली IAF की कमान, लड़ाकू ताकत बढ़ाना पहली प्राथमिकता
सारांश
मुख्य बातें
एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने 1 नवंबर 2026 को भारतीय वायुसेना (IAF) के 29वें प्रमुख के रूप में औपचारिक रूप से कमान संभाली और स्पष्ट किया कि वायुसेना की लड़ाकू ताकत को निर्धारित स्तर तक पहुँचाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। नई दिल्ली में गार्ड ऑफ ऑनर के निरीक्षण के बाद उन्होंने अपने कार्यकाल के लिए 'वायु' नाम के चार सूत्रों पर आधारित एक स्पष्ट रोडमैप पेश किया।
'वायु' के चार सूत्र — नए प्रमुख का रोडमैप
दीक्षित ने अपनी प्राथमिकताओं को 'वायु' के चार सूत्रों में समाहित किया: सतर्कता और तत्परता, आत्मनिर्भरता, नवाचार और एकजुट प्रयास। उन्होंने कहा कि वायुसेना का हर स्क्वाड्रन, रडार, वायु रक्षा इकाई और प्रत्येक वायु योद्धा किसी भी समय जवाब देने के लिए तैयार रहना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब देश की सुरक्षा चुनौतियाँ लगातार बनी हुई हैं और युद्ध का स्वरूप तेज़ी से बदल रहा है।
आत्मनिर्भरता और स्वदेशी हथियारों पर ज़ोर
आत्मनिर्भरता के मोर्चे पर तेजस एमके-1ए, तेजस एमके-2, अडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA), भारतीय सेंसर और स्वदेशी हथियारों को सर्वोच्च प्राथमिकता दिए जाने की घोषणा की गई। दीक्षित ने कहा कि वायुसेना भारतीय समाधानों के साथ युद्ध लड़ेगी और अभियान संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए इन्हें पर्याप्त संख्या में शामिल किया जाएगा। गौरतलब है कि यह घोषणा 'मेक इन इंडिया' रक्षा नीति के अनुरूप है जिसे पिछले कई वर्षों से बल दिया जा रहा है।
नई तकनीक और बदलते युद्धक्षेत्र की चुनौती
नए वायुसेना प्रमुख ने माना कि ड्रोन, लंबी दूरी तक मार करने वाले सटीक हथियार, अंतरिक्ष, साइबर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीकों ने युद्ध का स्वरूप बुनियादी रूप से बदल दिया है। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना को अगले दशक की जरूरतों के मुताबिक खुद को ढालना होगा। नवाचार के तहत नेटवर्क-आधारित और AI से युक्त कमान एवं नियंत्रण प्रणाली, ड्रोन रोधी बहुस्तरीय सुरक्षा और निकट अंतरिक्ष के परिचालन उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
ऑपरेशन सिंदूर और पूर्ववर्ती प्रमुख को श्रद्धांजलि
दीक्षित ने निवर्तमान वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का आभार जताते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनके नेतृत्व में वायुसेना ने सटीक और निर्णायक हवाई शक्ति का प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें एक 'पूरी तरह तैयार वायुसेना' की कमान सौंपी गई है। इससे पहले उन्होंने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी।
कार्मिक कल्याण और ऐतिहासिक EV का उपयोग
दीक्षित ने यह भी स्पष्ट किया कि वायुसेना के जवानों, अग्निवीरवायु, असैन्य कर्मचारियों, पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके परिवारों के प्रशिक्षण, मनोबल, कल्याण और सम्मान को व्यक्तिगत प्राथमिकता दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि वे गार्ड ऑफ ऑनर स्थल पर एक इलेक्ट्रिक वाहन (EV) से पहुँचे — राष्ट्रीय राजधानी में वायुसेना प्रमुख की आधिकारिक गाड़ी के रूप में EV का यह पहला उपयोग है। उन्होंने अपने संबोधन का समापन वायुसेना के आदर्श वाक्य 'नभः स्पृशं दीप्तम्' के साथ किया।
एयर चीफ मार्शल दीक्षित के नेतृत्व में भारतीय वायुसेना स्वदेशीकरण, तकनीकी आधुनिकीकरण और संयुक्त युद्धक क्षमता के त्रिकोण पर अपनी दिशा तय करेगी — और आने वाले महीनों में तेजस व AMCA कार्यक्रमों की प्रगति इस संकल्प की पहली परीक्षा होगी।