AAP के 7 सांसदों के BJP में जाने पर अन्ना हजारे बोले- पार्टी में थीं दिक्कतें, इसलिए छोड़ी
सारांश
Key Takeaways
- AAP के 7 राज्यसभा सांसदों ने 25 अप्रैल 2025 को पार्टी छोड़कर BJP जॉइन की।
- समाजसेवी अन्ना हजारे ने कहा — पार्टी में दिक्कतें थीं, इसलिए वे गए; दोष AAP नेतृत्व का है।
- अन्ना हजारे ने केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा — सत्ता और पैसे की चाह ने यह गड़बड़ी पैदा की।
- मनीष सिसोदिया ने सांसदों को 'गद्दार' बताया और कहा — पंजाब गद्दारों को माफ नहीं करता।
- पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष वडिंग ने कहा — इससे BJP को कोई फायदा नहीं होगा।
- यह घटना दिल्ली चुनाव 2025 में हार और केजरीवाल की कानूनी परेशानियों के बाद AAP के लिए एक और बड़ा सांगठनिक झटका मानी जा रही है।
अहिल्यानगर, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों द्वारा शुक्रवार, 25 अप्रैल को पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामने की घटना पर जाने-माने समाजसेवी अन्ना हजारे ने अपनी स्पष्ट राय रखी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी पसंद का रास्ता चुनने का अधिकार है, और यदि नेता पार्टी छोड़ रहे हैं तो इसमें दोष पार्टी नेतृत्व का है।
अन्ना हजारे की सीधी बात — लोकतंत्र में किसी को रोका नहीं जा सकता
पत्रकारों से बातचीत में अन्ना हजारे ने कहा, "लोकतंत्र में हर एक व्यक्ति का यह अधिकार है। इसके लिए किसी पर सख्ती करना उचित नहीं है। उन नेताओं को पार्टी में कुछ दिक्कतें आई होंगी, इसीलिए वे चले गए।" उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि पार्टी सही ढंग से चलाई जाती तो ये नेता कभी नहीं जाते — इसलिए असली जिम्मेदारी पार्टी नेतृत्व की है।
अन्ना हजारे ने अरविंद केजरीवाल पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि जब स्वार्थ बीच में आ जाता है तो व्यक्ति समाज और देश को भूल जाता है। उन्होंने कहा, "सत्ता और पैसे के पीछे पड़ जाने की वजह से यह गड़बड़ी हुई है।" गौरतलब है कि अन्ना हजारे ने ही वर्ष 2011 के ऐतिहासिक जनलोकपाल आंदोलन के दौरान केजरीवाल को राजनीतिक मंच पर स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई थी। बाद में दोनों के रास्ते अलग हो गए थे।
मनीष सिसोदिया का पलटवार — गद्दारों को पंजाब माफ नहीं करेगा
AAP नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर लिखा कि वे पिछले तीन दिनों से गुजरात में हैं। उन्होंने कहा कि जब हजारों कार्यकर्ता भाजपा की धमकियां झेलते हुए पार्टी की विचारधारा को मजबूत करने में जुटे हैं, उसी समय कुछ लोगों ने पंजाब के कार्यकर्ताओं की मेहनत का सौदा कर लिया।
सिसोदिया ने सीधे शब्दों में कहा कि जो राज्यसभा सदस्य आज भाजपा के सामने झुक गए, उन्होंने पंजाब की जनता के साथ गद्दारी की है। उन्होंने चेतावनी दी कि "पंजाब गद्दारों को कभी माफ नहीं करता।" यह बयान इस बात का संकेत है कि AAP इस मुद्दे को पंजाब की अस्मिता से जोड़कर अपने मतदाताओं को एकजुट रखने की कोशिश करेगी।
AAP विधायक और कांग्रेस की प्रतिक्रियाएं
AAP विधायक अशोक पराशर 'पप्पी' ने कहा कि जो व्यक्ति उस पार्टी से विश्वासघात करता है जिसने उसे राज्यसभा जैसा बड़ा सम्मान दिया, जनता उस पर कभी भरोसा नहीं करती। उन्होंने कहा कि पंजाबी लोग अपने वादों और अपने रुख पर सदा कायम रहते हैं।
पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने व्यंग्यात्मक लहजे में भाजपा को बधाई देते हुए कहा कि पार्टी पहले से ही अन्य दलों से आए नेताओं का संग्रह बन चुकी है। उन्होंने कहा कि इससे भाजपा को कोई राजनीतिक लाभ नहीं होगा, बल्कि यह घटना AAP को अपनी वास्तविक स्थिति समझने का अवसर देगी।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब AAP पहले से ही कई मोर्चों पर दबाव में है। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा था। केजरीवाल की शराब नीति मामले में गिरफ्तारी और लंबी कानूनी लड़ाई ने पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया है। ऐसे में 7 राज्यसभा सांसदों का एक साथ पार्टी छोड़ना सांगठनिक बिखराव का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पंजाब में AAP की सरकार होने के बावजूद यदि वहां के राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़ रहे हैं, तो यह केंद्रीय नेतृत्व के प्रति नाराजगी का सीधा प्रतिबिंब है। आने वाले समय में पंजाब की राजनीति पर इस घटनाक्रम का असर देखना दिलचस्प होगा।