पाकिस्तानी सेना पर ISKP को पनाह देने का आरोप, MEMRI रिपोर्ट ने दक्षिण एशिया में बढ़ते खतरे की चेतावनी दी
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका स्थित मिडिल ईस्ट मीडिया रिसर्च इंस्टीट्यूट (MEMRI) की एक नई रिपोर्ट में कथित तौर पर यह दावा किया गया है कि पाकिस्तानी सेना आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रोविंस (ISKP/ISIS-K) को शरण दे रही है और साथ ही आतंकवाद-विरोधी अभियान की आड़ में अफगानिस्तान में हवाई हमले कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, यह रणनीति तालिबान सरकार पर दबाव बनाने और पश्चिमी देशों के समक्ष कड़ी छवि प्रस्तुत करने के दोहरे उद्देश्य से अपनाई जा रही है।
मुख्य आरोप और साक्ष्य
MEMRI रिपोर्ट में कहा गया है कि 30 जून 2026 को अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर ड्रोन गतिविधियाँ देखी गईं, जो कथित तौर पर ISKP के ठिकानों से जुड़ी थीं। रिपोर्ट के अनुसार, 'उपलब्ध साक्ष्य संकेत देते हैं कि पाकिस्तान ISKP को वैचारिक समर्थन के बजाय रणनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल कर सकता है, ताकि अफगान तालिबान और बलूच विद्रोही समूहों पर दबाव बनाया जा सके।' रिपोर्ट ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान दशकों से भारत और अफगानिस्तान के संदर्भ में आतंकी नेटवर्कों के उपयोग की रणनीति अपनाता रहा है।
पाक-तालिबान संबंधों में गिरावट
अगस्त 2021 में तालिबान की अफगानिस्तान में सत्ता वापसी के बाद से पाकिस्तान और तालिबान के संबंध लगातार बिगड़ते रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सीमा पर झड़पें बढ़ी हैं और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के हमलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा चिंताओं को और गहरा किया है। कतर, तुर्की और चीन की मध्यस्थता के प्रयास भी दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने में नाकाम रहे हैं।
बलूचिस्तान और CPEC पर खतरा
बलूच सशस्त्र समूहों ने बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) से जुड़े प्रतिष्ठानों पर हमले तेज़ किए हैं। चीनी नागरिकों और परियोजनाओं की सुरक्षा को लेकर बीजिंग ने पाकिस्तान को अपनी चिंताओं से अवगत कराया है, जिससे पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर पर दबाव बढ़ा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में कड़े सुरक्षा उपायों से स्थानीय समुदायों में असंतोष पनप सकता है।
पश्चिमी देशों से अपील
MEMRI रिपोर्ट ने पश्चिमी देशों से आग्रह किया है कि पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य और आर्थिक सहायता को ISKP नेटवर्क के विरुद्ध स्वतंत्र निगरानी वाली ठोस कार्रवाई से जोड़ा जाए। रिपोर्ट के अनुसार, ऐसा न करने पर क्षेत्रीय अस्थिरता और वैश्विक सुरक्षा जोखिम दोनों बढ़ सकते हैं। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब दक्षिण एशिया में सुरक्षा समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं और आतंकवाद के नए स्वरूप उभर रहे हैं।