पाकिस्तान की पश्चिम एशिया में मध्यस्थता प्रयासों से चीन के साथ तनाव: नई रिपोर्ट
सारांश
Key Takeaways
- पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें चीन-पाकिस्तान संबंधों में तनाव उत्पन्न कर रही हैं।
- बीजिंग अब पाकिस्तान के प्रति सतर्क रुख अपना रहा है।
- अफगानिस्तान के मुद्दे पर मतभेद दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित कर रहे हैं।
इस्लामाबाद, ८ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों ने चीन के साथ उसके संबंधों में तनाव उत्पन्न कर दिया है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बीजिंग ने भले ही सार्वजनिक रूप से चिंता व्यक्त नहीं की हो, लेकिन उसकी कूटनीतिक प्रतिक्रिया में असहजता स्पष्ट है।
थिंक टैंक पोलिटेइया अनुसंधान फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार का हालिया दौरा बीजिंग में मध्यस्थता के लिए समर्थन प्राप्त करने के उद्देश्य से था, लेकिन उन्हें केवल “सतर्क और सिद्धांत आधारित” प्रतिक्रिया मिली।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह स्थिति इस बात का संकेत है कि चीन-पाकिस्तान संबंधों में सब कुछ सामान्य नहीं है। खासकर अफगानिस्तान और अमेरिका को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद उभर रहे हैं, जो इस “ऑल-वेदर” साझेदारी के लिए चुनौती बन रहे हैं।
पाकिस्तान ने पहले इस्लामाबाद में मिस्र, सऊदी अरब और तुर्की जैसे देशों के साथ बैठक कर मध्यस्थता की कोशिश की थी, लेकिन जब कोई ठोस परिणाम नहीं आया तो उसने चीन का रुख किया।
हालांकि, चीन ने इस पहल का खुलकर समर्थन करने के बजाय पाकिस्तान को पहले अपने पड़ोसी अफगानिस्तान के साथ संबंध सुधारने की सलाह दी। रिपोर्ट के अनुसार, चीन का मानना है कि जो देश अपने पड़ोसी के साथ तनाव में हो, वह निष्पक्ष मध्यस्थता नहीं कर सकता।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आसिम मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में चीन के सुरक्षा हितों की अनदेखी की है, जिससे बीजिंग को अपनी क्षेत्रीय रणनीति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता पड़ी है।
चीन की चिंता उसके बड़े निवेश से भी जुड़ी है, खासकर चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) के तहत। इसके अलावा, चीन अफगानिस्तान में भी अपने आर्थिक और कनेक्टिविटी नेटवर्क का विस्तार करना चाहता है, जो उसके बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
रिपोर्ट के अनुसार, हाल के वर्षों में चीन ने सीपीईसी के लिए फंडिंग में काफी कमी की है। इसके पीछे भ्रष्टाचार, चीनी कर्मियों पर आतंकी हमले और पाकिस्तान में बढ़ती अस्थिरता जैसी चिंताएं प्रमुख हैं।
पाकिस्तान बार-बार सीपीईसी का जिक्र कर चीन से आर्थिक समर्थन प्राप्त करने की कोशिश करता है, लेकिन बीजिंग अब सतर्क रुख अपना रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते हालात में चीन और पाकिस्तान के रिश्तों की दिशा में धीरे-धीरे बदलाव आ रहा है, जो क्षेत्रीय राजनीति और आर्थिक सहयोग पर प्रभाव डाल सकता है।