पप्पू यादव का केंद्र सरकार पर हमला: 'सच्चाई से भाग रही है सरकार, ताश के पत्तों की तरह बिखरेगी'
सारांश
मुख्य बातें
पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने 18 जुलाई को पटना में पत्रकारों से बातचीत में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार सच्चाई से मुँह मोड़ रही है और एक दिन यह ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएगी।
सरकार पर सीधा आरोप
पप्पू यादव ने कहा, 'यह सरकार कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जैसे नेताओं का आज तक सामना नहीं कर पाई।' उनके अनुसार, मौजूदा सरकार 'डरी और थकी हुई' है और उसने पूरे देश को थका दिया है। उन्होंने कहा कि इस शासनकाल में लोकतंत्र खतरे में है और गरीबों तथा छात्रों की आवाज़ को दबाया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि जो सरकार मंदिर और सनातन पर हमला करने पर उतारू हो जाए, उससे कोई उम्मीद नहीं रखी जा सकती।
इथेनॉल और कैबिनेट फैसले पर सवाल
निर्दलीय सांसद ने इथेनॉल नीति को लेकर भी सरकार को घेरा। उनके अनुसार, इथेनॉल से संबंधित निर्णय कैबिनेट की ओर से लिया गया, जिसका अर्थ है कि यह सीधे तौर पर प्रधानमंत्री के स्तर का फैसला था। उन्होंने आरोप लगाया कि आम लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है, जो किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
सोनम वांगचुक और लोकतंत्र का सवाल
पप्पू यादव ने सोनम वांगचुक का उल्लेख करते हुए कहा कि वे बच्चों और छात्रों के लिए लड़ रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई नहीं होती और मानवीय मुद्दों पर आवाज़ उठाने वालों पर हमला किया जाता है, तो क्या यही लोकतंत्र है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में संसद को चलने नहीं देना चाहिए।
छात्र और रोज़गार संकट
सांसद ने कहा कि राहुल गांधी लंबे समय से छात्रों के मुद्दे उठाते आ रहे हैं और इसके लिए पदयात्राएँ भी कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से एक-दो नहीं, बल्कि सात करोड़ बच्चे प्रभावित होते हैं। रोज़गार की संभावनाएँ समाप्त होने और परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं पर उन्होंने गहरी चिंता जताई।
मृत्युंजय तिवारी के आरजेडी छोड़ने पर प्रतिक्रिया
मृत्युंजय तिवारी के राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) छोड़ने के सवाल पर पप्पू यादव ने कहा कि घर-परिवार में मतभेद होना स्वाभाविक है और तिवारी 'बहुत अच्छे आदमी' हैं। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों की तुलना करते हुए कहा कि उन्होंने देश की बुनियाद और विश्वविद्यालयों जैसे संस्थानों को मज़बूत किया, जबकि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में बने पुल ध्वस्त हो रहे हैं। आने वाले दिनों में विपक्ष का यह आक्रामक रुख संसद की कार्यवाही को प्रभावित कर सकता है।