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सुप्रीम कोर्ट को राजनीतिक हथियार नहीं बनाया जा सकता, एफआईआर वापस लो: सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास

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सुप्रीम कोर्ट को राजनीतिक हथियार नहीं बनाया जा सकता, एफआईआर वापस लो: सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास

सारांश

सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने 28 जुलाई को केंद्र सरकार को चेताया कि सुप्रीम कोर्ट को राजनीतिक हितों का औज़ार नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी एफआईआर वापस लेने की माँग की और कहा कि युवा यह अन्याय स्वीकार नहीं करेंगे।

मुख्य बातें

सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने 28 जुलाई को केंद्र सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के राजनीतिक दुरुपयोग का आरोप लगाया।
सरकार से माँग — शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर तत्काल वापस ली जाएँ।
दास ने कहा कि इक्का-दुक्का मामलों को आधार बनाकर सभी एफआईआर आगे बढ़ाना लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए खतरनाक है।
सीजेपी ने घोषणा की कि वह आंदोलन में शामिल सभी छात्रों और युवाओं के साथ खड़ी रहेगी।
चेतावनी दी गई कि आश्वासन पूरे न हुए तो युवाओं में असंतोष और बढ़ सकता है।

नई दिल्ली, 28 जुलाई — कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार अपने राजनीतिक हितों की पूर्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट का दुरुपयोग नहीं कर सकती। उन्होंने मंगलवार को जारी बयान में स्पष्ट किया कि अदालत के अंतरिम आदेशों को भी सरकार के पक्ष में हथियार की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

मुख्य आरोप और माँगें

सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'प्रदर्शनकारियों के संबंध में देश के सामने एक स्पष्ट सार्वजनिक वादा किया गया था, जिसका सम्मान होना चाहिए।' उन्होंने सरकार से माँग की कि शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर तत्काल वापस ली जाएँ और दिए गए आश्वासनों पर अमल किया जाए।

कानूनी प्रक्रिया पर सवाल

सीजेपी प्रवक्ता ने यह भी कहा कि यदि कोई वास्तविक अपराधी खुलेआम घूम रहा है, तो पुलिस को पुराने मामलों में कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत से जमानत रद्द कराने का रास्ता अपनाना चाहिए। उनके अनुसार, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि ऐसा व्यक्ति अब तक बिना किसी कार्रवाई के कैसे घूम रहा था।

दास ने आरोप लगाया कि इक्का-दुक्का मामलों को आधार बनाकर सभी एफआईआर को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे भविष्य में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को भी कार्रवाई के दायरे में लाया जा सकता है। उनके अनुसार, यदि सरकार को इस प्रकार की छूट मिलती है तो उसके दुरुपयोग की आशंका बनी रहेगी।

युवाओं और छात्रों के अधिकारों की पैरवी

सौरव दास ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्र और युवा लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा रहे थे और उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि युवा यह स्थिति स्वीकार नहीं करेंगे।

गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश को लेकर विपक्षी दलों और नागरिक समाज में बहस तेज है।

सीजेपी की प्रतिबद्धता

सीजेपी प्रवक्ता ने घोषणा की कि उनकी पार्टी उन सभी प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ी रहेगी जिन्होंने देश और अपने भविष्य से जुड़े मुद्दों पर आंदोलन में भाग लिया। उन्होंने रेखांकित किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन नागरिकों का मौलिक अधिकार है और सरकार का दायित्व है कि वह इस अधिकार का सम्मान करे।

क्या होगा आगे

सीजेपी ने सरकार से अपील की है कि वह प्रदर्शनकारियों से किए गए सार्वजनिक वादों को पूरा करे। दास ने चेतावनी दी कि यदि एफआईआर वापसी सहित दिए गए आश्वासनों पर अमल नहीं हुआ, तो युवाओं में असंतोष और गहरा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उसके क्रियान्वयन पर अभी तक स्पष्टता नहीं है। शांतिपूर्ण विरोध और कानूनी कार्रवाई के बीच की यह धुंधली रेखा भारतीय लोकतंत्र में एक गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़ा करती है। सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि अदालती आदेशों की आड़ में नागरिक अधिकारों की सीमा कहाँ तय होती है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट के इस्तेमाल पर क्या आपत्ति जताई?
सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि केंद्र सरकार अपने राजनीतिक हितों के लिए सुप्रीम कोर्ट का दुरुपयोग नहीं कर सकती और न ही अदालत के अंतरिम आदेशों को हथियार की तरह प्रयोग किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि ऐसा करना न्यायपालिका की स्वतंत्रता के विरुद्ध है।
सीजेपी ने प्रदर्शनकारियों की एफआईआर को लेकर क्या माँग की?
सीजेपी ने माँग की कि शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल सभी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर तत्काल वापस ली जाएँ। दास ने कहा कि सरकार ने इस संबंध में सार्वजनिक वादा किया था जिसे पूरा करना उसकी जिम्मेदारी है।
सीजेपी का यह बयान किस संदर्भ में आया?
यह बयान 28 जुलाई को ऐसे समय में आया जब प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश को लेकर विपक्षी दलों और नागरिक समाज में बहस तेज है। सीजेपी का आरोप है कि सरकार इस आदेश का उपयोग सभी एफआईआर को आगे बढ़ाने के लिए कर रही है।
क्या सरकार ने एफआईआर वापसी का वादा किया था?
सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास के अनुसार, सरकार की ओर से देश के सामने एक स्पष्ट सार्वजनिक वादा किया गया था कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर वापस ली जाएगी। हालाँकि, उनका कहना है कि अब तक इस आश्वासन पर अमल नहीं हुआ है।
यदि एफआईआर वापस नहीं ली गई तो क्या होगा?
सीजेपी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अपने वादे पूरे नहीं किए तो युवाओं और छात्रों में असंतोष और गहरा हो सकता है। पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह आंदोलन में शामिल सभी प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ी रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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