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सीजेआई सूर्यकांत का वादा: सुप्रीम कोर्ट किसी भी याचिका की सुनवाई से कभी इनकार नहीं करेगा

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सीजेआई सूर्यकांत का वादा: सुप्रीम कोर्ट किसी भी याचिका की सुनवाई से कभी इनकार नहीं करेगा

सारांश

सीजेआई सूर्यकांत ने साफ किया — सुप्रीम कोर्ट ने कोई याचिका अस्वीकार नहीं की, क्योंकि विधिवत याचिका दायर ही नहीं हुई थी। 'संसद चलो' मार्च में पुलिस कार्रवाई से जुड़ा केवल एक पृष्ठ का अभ्यावेदन मिला था। उनका वादा: 'हम 24 घंटे उपलब्ध हैं।'

मुख्य बातें

सीजेआई सूर्यकांत ने 25 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शन से जुड़ी किसी याचिका की सुनवाई से इनकार नहीं किया।
शीर्ष अदालत के समक्ष विधिवत रिट याचिका दायर नहीं हुई थी — केवल एक पृष्ठ का अभ्यावेदन सौंपा गया था।
सीजेआई ने वादा किया: ' सुप्रीम कोर्ट किसी भी मामले की सुनवाई से कभी इनकार नहीं कर सकता ; हम 24 घंटे उपलब्ध हैं।' जब याचिकाएं विधिसम्मत तरीके से दायर की गईं, तो सुप्रीम कोर्ट ने उनका स्वागत किया।
सीजेआई ने देशवासियों को आश्वस्त किया कि अन्याय होने पर अदालत कानून के दायरे में न्याय दिलाने की हरसंभव कोशिश करेगी।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने 25 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने 'संसद चलो' मार्च के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़ी किसी याचिका की सुनवाई से इनकार नहीं किया था। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत के समक्ष कोई विधिवत दायर रिट याचिका थी ही नहीं — केवल एक पृष्ठ का अभ्यावेदन सौंपा गया था, जो कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।

क्या था पूरा विवाद

पिछले कुछ दिनों में यह खबरें फैलीं कि सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिका को सूचीबद्ध करने से मना कर दिया और वकीलों से कहा कि वे अदालत का समय 'बर्बाद' न करें। सीजेआई सूर्यकांत ने इन खबरों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह 'पूरी तरह से गलत बयानबाज़ी' थी।

उन्होंने खुली अदालत में और बाद में मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया: 'सुबह 10 बजे तक एक भी पन्ना दायर नहीं किया गया था। यह सिर्फ एक रिप्रजेंटेशन था। मैं रिप्रजेंटेशन को रिट याचिका कैसे मान सकता हूं?'

सीजेआई का स्पष्ट वादा

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट किसी भी मामले की सुनवाई से कभी इनकार नहीं कर सकता। यह मेरा वादा है। हम 24 घंटे उपलब्ध हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब याचिकाएं विधिसम्मत तरीके से दायर की गईं, तो शीर्ष अदालत ने उनका स्वागत किया।

उन्होंने प्रक्रियागत पहलू को रेखांकित करते हुए कहा, 'अगर मुझे याचिका मिली ही नहीं, तो मैं सुनवाई कैसे कर सकता हूं? अगर वे एक पेज का पत्र देकर उस पर सुनवाई की मांग करते हैं, तो यह सही तरीका नहीं है।'

आम नागरिकों को संदेश

सीजेआई ने देशवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि यदि किसी के साथ अन्याय होता है, तो सुप्रीम कोर्ट कानून के दायरे में रहते हुए उसे न्याय दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना तत्काल सुनवाई चाहते थे, इसलिए उन्हें सही तरीके से याचिका दायर करने का निर्देश दिया गया।

प्रक्रिया और न्याय का संतुलन

यह मामला उस व्यापक प्रश्न को उठाता है कि संकट के समय न्यायिक पहुँच कितनी सुलभ होनी चाहिए। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में अर्जेंट हियरिंग के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया है, जिसमें रजिस्ट्री के माध्यम से विधिवत रिट याचिका दायर करना अनिवार्य है। सीजेआई का यह स्पष्टीकरण न केवल गलत सूचना को सुधारता है, बल्कि नागरिकों को न्यायिक प्रक्रिया की जानकारी भी देता है।

आगे यह देखना होगा कि विधिवत दायर याचिकाओं पर सुनवाई कब और किस पीठ के समक्ष सूचीबद्ध होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक बड़े सवाल को भी उजागर करता है — जब देश में सामाजिक उथल-पुथल हो, तो क्या न्यायिक पहुँच की प्रक्रिया इतनी जटिल होनी चाहिए कि आम नागरिक या छात्र उसे समझ न सकें? प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है, यह सही है — लेकिन 'एक पृष्ठ के अभ्यावेदन' और 'विधिवत रिट याचिका' के बीच की खाई को भरने की जिम्मेदारी भी न्यायपालिका और बार काउंसिल की है। गलत सूचना फैलने के पीछे केवल मीडिया नहीं, प्रक्रियागत अस्पष्टता भी जिम्मेदार है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीजेआई सूर्यकांत ने 25 जुलाई को क्या स्पष्ट किया?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शनकारियों से जुड़ी किसी याचिका की सुनवाई से इनकार नहीं किया था। शीर्ष अदालत के समक्ष विधिवत रिट याचिका दायर ही नहीं हुई थी — केवल एक पृष्ठ का अभ्यावेदन सौंपा गया था।
सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका और अभ्यावेदन में क्या अंतर है?
रिट याचिका एक विधिवत कानूनी दस्तावेज़ है जो सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री के माध्यम से निर्धारित प्रारूप में दायर की जाती है। अभ्यावेदन (Representation) एक साधारण पत्र या आवेदन होता है, जिसे न्यायिक सुनवाई के लिए स्वीकार नहीं किया जा सकता। सीजेआई ने कहा कि प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।
'संसद चलो' मार्च और सुप्रीम कोर्ट का क्या संबंध है?
'संसद चलो' मार्च के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर कुछ पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी। हालांकि, उस समय शीर्ष अदालत के समक्ष कोई विधिवत याचिका दायर नहीं थी, जिसे बाद में सीजेआई ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया।
क्या सुप्रीम कोर्ट में तत्काल सुनवाई मिल सकती है?
हाँ, सुप्रीम कोर्ट में अर्जेंट हियरिंग की व्यवस्था है, लेकिन इसके लिए विधिवत रिट याचिका दायर करना अनिवार्य है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अदालत 24 घंटे उपलब्ध है और किसी भी विधिसम्मत याचिका की सुनवाई से इनकार नहीं किया जाएगा।
सीजेआई ने आम नागरिकों को क्या संदेश दिया?
सीजेआई सूर्यकांत ने देशवासियों को आश्वस्त किया कि यदि किसी के साथ अन्याय होता है, तो सुप्रीम कोर्ट कानून के दायरे में रहते हुए न्याय दिलाने की हरसंभव कोशिश करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि 'सुप्रीम कोर्ट किसी भी मामले की सुनवाई से कभी इनकार नहीं कर सकता — यह मेरा वादा है।'
राष्ट्र प्रेस
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