सीजेआई सूर्यकांत का खुलासा: छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट में कोई याचिका दाखिल नहीं हुई थी
सारांश
मुख्य बातें
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने शुक्रवार, 24 जुलाई को खुली अदालत में उन मीडिया रिपोर्टों को सिरे से खारिज किया, जिनमें दावा किया गया था कि उन्होंने 'संसद चलो' मार्च के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से जुड़ी याचिका को सूचीबद्ध करने से मना कर दिया। सीजेआई ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट में इस विषय पर कोई रिट याचिका दायर ही नहीं की गई थी — केवल एक पत्र भेजा गया था।
सीजेआई का सीधा बयान
खुली अदालत में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, 'यह पूरी तरह गलत बताया गया कि मामला कोर्ट में दाखिल किया गया था और मुख्य न्यायाधीश ने उसे सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया। सुबह 10 बजे तक कोर्ट में इस मामले का एक भी पन्ना दाखिल नहीं हुआ था। केवल एक प्रतिनिधित्व (पत्र) भेजा गया था। मैं उसे रिट याचिका कैसे मान सकता हूं? इसके बावजूद लोग गैर-जिम्मेदारी से खबरें चला रहे हैं।'
उन्होंने आगे जोड़ा, 'किसी मिश्रा नामक व्यक्ति ने इसका जिक्र किया। मीडिया ने गलत तरीके से रिपोर्ट किया कि मैंने मामले को सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया, जबकि यह सिर्फ एक प्रतिनिधित्व था। मैंने रजिस्ट्री से जांच की और पाया कि एक भी दस्तावेज दाखिल नहीं हुआ था।'
पृष्ठभूमि: नीट यूजी 2026 और छात्र प्रदर्शन
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है, जब दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने नीट यूजी 2026 पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दिल्ली पुलिस द्वारा बल प्रयोग के मामले में भेजे गए एक पत्र पर स्वत: संज्ञान लेने से इनकार किया था। इस सप्ताह की शुरुआत में एक वकील ने अदालत में छात्रों पर पुलिस बर्बरता का मुद्दा उठाते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की थी।
उस अवसर पर सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ — जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन भी शामिल थे — ने कहा था, 'कृपया हमारा और अपना समय बर्बाद मत कीजिए। आपका समय हमारे समय से ज्यादा कीमती है।' वकील द्वारा प्रदर्शन से जुड़े वीडियो का हवाला दिए जाने पर पीठ ने यह भी कहा था, 'हमें वीडियो में कोई रुचि नहीं है। हमारे पास वीडियो देखने का समय नहीं है।' इसके बाद अदालत ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया था।
पत्र में क्या था
अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा ने मुख्य न्यायाधीश को भेजे अपने पत्र में संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत स्वत: संज्ञान लेने की मांग की थी। पत्र में आरोप लगाया गया था कि नीट यूजी 2026 पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान छात्रों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ।
पत्र में यह भी मांग की गई थी कि उन आरोपों की जांच कराई जाए, जिनमें कहा गया कि सादे कपड़ों में मौजूद कुछ अज्ञात लोगों ने पुलिस की मौजूदगी में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की। इसके अतिरिक्त घटना से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, ड्रोन फुटेज, बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग, वायरलेस लॉग और सोशल मीडिया वीडियो सुरक्षित रखने के निर्देश देने की भी मांग की गई थी।
छात्रों की मांगें
प्रदर्शनकारी छात्र नीट परीक्षा के निष्पक्ष आयोजन, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में व्यापक सुधार और बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक के आरोपों के मद्देनजर एजेंसी को भंग करने की मांग कर रहे हैं। गौरतलब है कि नीट से जुड़े विवाद पिछले कई वर्षों से राष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा रहे हैं और यह ऐसे समय में एक बार फिर उभरे हैं, जब परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर व्यापक सवाल खड़े हो रहे हैं।
आगे क्या
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में इस विषय पर कोई औपचारिक याचिका लंबित नहीं है। यदि कोई पक्ष रिट याचिका दाखिल करता है, तभी न्यायालय इस पर विधिवत सुनवाई कर सकता है। सीजेआई सूर्यकांत के इस स्पष्टीकरण के बाद मीडिया रिपोर्टिंग की जवाबदेही और न्यायिक प्रक्रिया की सटीक समझ पर बहस तेज होने की संभावना है।